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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने डीजीपी द्वारा जारी एक सर्कुलर पर नाराजगी व्यक्त की है। यह सर्कुलर सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने की अवधि से संबंधित है, जो सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन करता प्रतीत होता है। कोर्ट ने इस मामले में मुख्य सचिव को व्यक्तिगत शपथ पत्र दाखिल करने का आदेश दिया है।
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यह मामला रूबी सिंह व अन्य द्वारा दायर एक याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने उन्नाव पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार, 5 अगस्त को उन्हें और उनके परिवार को अवैध रूप से हिरासत में लिया गया, मारपीट की गई और पैसे वसूले गए। याची ने घटना के दिन की सीसीटीवी फुटेज की मांग की थी ताकि हिरासत में लिए जाने का सबूत मिल सके।
शपथ पत्र दाखिल करने का आदेश दिया
पिछली सुनवाई पर, न्यायालय ने पुलिस अधीक्षक को मामले में शपथ पत्र दाखिल करने का आदेश दिया था। इसके अनुपालन में दाखिल शपथ पत्र में बताया गया कि घटना से संबंधित सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं है। पुलिस ने तर्क दिया कि डीजीपी द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज को केवल 2 से 2.5 महीने तक ही सुरक्षित रखा जा सकता है।
आदेश की अवमानना की
इस पर न्यायालय ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की। खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट का निर्देश है कि सीसीटीवी फुटेज को कम से कम 6 महीने और अधिकतम डेढ़ साल तक सुरक्षित रखा जाना चाहिए। न्यायालय ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद डीजीपी द्वारा कम अवधि का सर्कुलर जारी करना प्रथम दृष्टया आदेश की अवमानना प्रतीत होता है।
शपथ पत्र दाखिल करने का आदेश
न्यायमूर्ति अब्दुल मोइन और न्यायमूर्ति बबीता रानी की खंडपीठ ने सुनवाई के बाद मुख्य सचिव को अगली तारीख पर व्यक्तिगत शपथ पत्र दाखिल करने का आदेश जारी किया।




