चुनाव आयोग की शनिवार को एक बड़ी बैठक हुई, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी शामिल हुए. मीटिंग का वक्…
चुनाव आयोग की शनिवार को एक बड़ी बैठक हुई, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी शामिल हुए. मीटिंग का वक्त इसलिए खास है क्योंकि वर्तमान में मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों के बीच अनबन की खबरें सामने आईं हैं. इसी के साथ वर्तमान में SIR को लेकर आयोग के फैसलों और प्रक्रियाओं पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. चुनाव आयोग के तीनों सदस्यों की बैठक निर्वाचन सदन नई दिल्ली में हुई. रिपोर्ट के अनुसार, इससे पहले 9 सितंबर को तीनों आयुक्तों की बैठक हुई थी
आयोग ने कहा कि किसी लोकतांत्रिक संस्था के भीतर विचार-विमर्श, आपत्तियां और सुझाव आना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि SIR और तकनीक से जुड़े सभी अंतिम फैसले तीनों आयुक्तों की सर्वसम्मति और पूर्ण सहमति से ही लिए गए हैं। वहीं, आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि SIR के तहत जिन लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं, उन्हें केवल असाधारण मामलों को छोड़कर व्यक्तिगत रूप से सुनवाई के लिए उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं है
आयोग के अनुसार, कैबिनेट सचिव को लिखा गया पत्र आयोग या आईटी डिवीजन के किसी नीतिगत मामले से नहीं, बल्कि ईसीआई में प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) पर आए एक अधिकारी के कामकाज से जुड़ा था। संबंधित अधिकारी द्वारा जारी कार्य विभाजन के आदेश असल में दो कमिश्नरों के आदेशों के बाद लागू नहीं किए गए थे और डीईसी द्वारा आईटी डिवीजन की निगरानी का अधिकार कभी वापस नहीं लिया गया था
भारतीय निर्वाचन आयोग ने स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा, “बिहार और पश्चिम बंगाल सहित 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR का काम पूरा हो चुका है। एसआईआर के दौरान या उसके बाद यदि किसी व्यक्ति का नाम छूट गया है, या कोई नया/युवा मतदाता है, तो वह लगातार अपडेट होने की प्रक्रिया के तहत वोटर लिस्ट में अपना नाम शामिल करवाने के लिए संबंधित (ERO) के पास आवेदन कर सकता है. आयोग ने निर्देश दिया कि सीईओ, जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) और ईआरओ इन छूटे हुए मतदाताओं के नामांकन के लिए तुरंत एक विशेष अभियान शुरू करें
दिल्ली के लिए चुनाव आयोग ने दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समय-सीमा 30 अक्टूबर, 2026 तक बढ़ा दी है. नोटिस और दावों व आपत्तियों के निपटारे की समय-सीमा 30 नवंबर, 2026 तक बढ़ा दी गई है. इसके अलावा, महाराष्ट्र के सीईओ से मिले अनुरोध के अनुसार, महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समय-सीमा आयोग ने 12 अक्टूबर, 2026 तक बढ़ा दी है. महाराष्ट्र में नोटिस और दावों-आपत्तियों के निपटारे की समय-सीमा 10 नवंबर, 2026 तक बढ़ा दी गई है
कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP ने एक दिन पहले चेतावनी देते हुए कहा कि अगर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं तो 2 अक्टूबर से देशव्यापी आंदोलन किया जाएगा. दीपके का कहना है कि वह इस आंदोलन को शहर-शहर में लेकर जाएंगे. गुरुवार को CJP ने ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे की डेडलाइन दी थी. उन्होंने आरोप लगाया था कि एसआईआर के जरिए देश में 13 करोड़ से अधिक वोट डिलीट किए गए हैं. दीपके ने आरोप लगाया कि CEC ने लोगों से वोट देने का अधिकार छीना है
दरअसल, 23 सितंबर को द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दावा किया गया कि दो चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में SIR को लेकर कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज की है, जिसमें 4 आपत्तियां एक ही दिन की थीं. हालांकि, चुनाव आयोग ने इमनन दावों पर सफाई पेश करते हुए कहा कि यह आपत्तियां सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं. एसआईआर सहित सभी अंतिम फैसले सर्वसम्मति से ही लिए गए हैं
एक दिन पहले कांग्रेस सासंद राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी, जिसमें राहुल ने कहा था कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश ने वोट चोरी की है. वे देशद्रोही हैं. उनकी नियुक्ति का मैंने विरोध किया था लेकिन फिर भी सरकार ने मेरी बात नहीं सुनी. संभावना है कि एक बार फिर से ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग लाया जा सकता है. अगर ऐसा होता है तो यह छह महीने के अंदर दूसरी बार होगा. इससे पहले अप्रैल में महाभियोग प्रस्ताव लाया गया था, जो लोकसभा में खारिज हो गया था
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ दिल्ली के संसद मार्ग थाने में TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने शिकायत दर्ज कराई. महुआ का आरोप है कि ज्ञानेश ने मतदाता सूची में नियमों के खिलाफ बदलाव किए हैं और पात्र मतदाताओं के नाम हटाए हैं
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Source: NewsNation TV







