बस्ती न केवल प्रदेश का एक प्रमुख सांस्कृतिक व कृषि-प्रधान केंद्र है, बल्कि चंदो ताल का प्राकृतिक सौंदर्य, छावनी का अमोढ़ा खास (1857 की क्रांति का अमर साक्षी) औ…
बस्ती न केवल प्रदेश का एक प्रमुख सांस्कृतिक व कृषि-प्रधान केंद्र है, बल्कि चंदो ताल का प्राकृतिक सौंदर्य, छावनी का अमोढ़ा खास (1857 की क्रांति का अमर साक्षी) और मखौड़ा धाम (जहां महाराजा दशरथ ने पुत्रेष्टि यज्ञ किया था) इसकी विशिष्ट पहचान हैं. वाल्टरगंज की बंद पड़ी चीनी मिलों के पुनरुद्धार की मांग से लेकर कटरा के ऐतिहासिक बाज़ारों तक, और हर्रैया के ग्रामीण अंचलों से लेकर महादेवा व कप्तानगंज के कृषि बेल्ट तक, बस्ती की समझदार जनता का हर एक सियासी फैसला लखनऊ के सिंहासन के समीकरणों को सीधे प्रभावित करता है
बस्ती की राजनीति का मिज़ाज राज्य के अन्य जिलों की तुलना में बेहद संवेदनशील, विकास-आकांक्षी और चुनावी दृष्टि से अत्यंत निर्णायक माना जाता है. 5 विधानसभा सीटों (बस्ती सदर, हर्रैया, कप्तानगंज, महादेवा और रुधौली) वाला यह जिला सामाजिक, रणनीतिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से अत्यधिक महत्वपूर्ण है. यहां चुनावी वैतरणी पार करने के लिए कुआनों और मनोरमा नदियों के तटवर्ती क्षेत्रों में बाढ़ व कटान नियंत्रण, बंद पड़ी चीनी मिलों का मुद्दा व गन्ना किसानों के भुगतान की समस्या, बेहतर स्वास्थ्य तंत्र, शिक्षा-रोजगार के अवसर और ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार बेहद निर्णायक सिद्ध होते हैं
ऐतिहासिक रूप से बस्ती की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी (BJP), समाजवादी पार्टी (SP), बहुजन समाज पार्टी (BSP) और कांग्रेस के बीच दिलचस्प व बहुकोणीय मुकाबला देखने को मिलता है. यहां का ब्राह्मण, कुर्मी, मौर्य, दलित व मुस्लिम सामाजिक समीकरण हर बार चुनावी नतीजों को प्रभावित करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाता है. बस्ती की राजनीति में लंबे समय से कृषि मूल्य, रोजगार, स्थानीय विकास और सामाजिक समीकरण ही हार-जीत की दिशा तय करते आए हैं
यहां के सियासी मैदान में मुख्य मुद्दे गन्ना किसानों की समस्याएं व समय पर भुगतान, कुआनों नदी का प्रदूषण व बाढ़ नियंत्रण, बंद पड़ी मिलों का पुनरुद्धार, पर्यटन स्थल के रूप में मखौड़ा धाम व वशिष्ठ आश्रम का विकास, और युवाओं के लिए स्थानीय रोजगार के साधनों के इर्द-गिर्द घूमते हैं. आखिर बस्ती जिले की विधानसभा सीटों का राजनीतिक इतिहास क्या कहता है? किन सीटों पर किस दल का पलड़ा भारी रहा है? और आगामी महामुकाबले में किसकी चुनावी रणनीति सटीक बैठेगी? आइये सिलसिलेवार ढंग से समझते हैं…
श्रेणी
कुल (Total)
पुरुष (Male)
महिला (Female)
जनसंख्या
साक्षरता दर
धर्म (Religion)
जनसंख्या (Population)
हिंदू (Hindu)
मुस्लिम (Muslim)
बौद्ध (Buddhist)
ईसाई (Christian)
सिख (Sikh)
जैन (Jain)
अन्य धर्म (Other Religions)
विधानसभा सीट (Constituency)
उम्मीदवार (Candidate)
राजनीतिक पार्टी (Party)
वोट (Votes)
हर्रैया (307)
अजय सिंह
त्रयंबक नाथ (तुलसीदास)
राज किशोर सिंह
कप्तानगंज (308)
काविंद्र चौधरी
चंद्र प्रकाश शुक्ला
जहीर अहमद
रुधौली (309)
राजेंद्र प्रसाद चौधरी
संगीता देवी (संगीता प्रताप जैसवाल)
अशोक कुमार मिश्र
बस्ती सदर (310)
महेंद्र नाथ यादव
दयाराम चौधरी
आलोक रंजन वर्मा
महादेवा – SC (311)
दूधराम
रवि कुमार सोनकर
लक्ष्मी चंद्र खरवार
हर्रैया (307):इस सामान्य सीट पर भारतीय जनता पार्टीके अजय सिंह ने सपा के त्रयंबक नाथ को हराकर अपनी जीत बरकरार रखी. यह जिला बस्ती की एकमात्र ऐसी सीट रही जहाँ 2022 में भाजपा अपना किला बचाने में कामयाब रही
कप्तानगंज (308): यहाँ समाजवादी पार्टीके काविंद्र चौधरी ने मौजूदा भाजपा विधायक चंद्र प्रकाश शुक्ला को 24,000 से अधिक वोटों के अंतर से शिकस्त दी. इस बड़ी जीत के साथ सपा ने भाजपा से यह सीट सफलतापूर्वक छीन ली
रुधौली (309): इस विधानसभा सीट पर सपा के राजेंद्र प्रसाद चौधरी ने भाजपा की संगीता देवी को करीब 15,226 वोटों से मात दी. आम आदमी पार्टी के पुष्करादित्य सिंह ने भी यहाँ 24,000 से अधिक वोट लेकर मुकाबले को दिलचस्प बनाया था
बस्ती सदर (310): जिले की इस मुख्य सीट पर बेहद कड़ा और रोमांचक मुकाबला देखा गया, जहाँ सपा के महेंद्र नाथ यादव ने भाजपा के दयाराम चौधरी को मात्र 1,779 वोटों के मामूली अंतर से हराया. इस कांटे की टक्कर में जीत दर्ज कर सपा ने यहाँ अपना परचम लहराया
महादेवा – SC (311): इस सुरक्षित (अनुसूचित जाति) सीट पर सपा गठबंधन की सहयोगी पार्टी सुभासपाके दूधराम ने भाजपा के रवि कुमार सोनकर को हराकर जीत हासिल की. त्रिकोणीय मुकाबले में बसपा के लक्ष्मी चंद्र खरवार 40,000 से अधिक वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे
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Source: NewsNation TV







