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September 28, 2026
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जीवनरक्षक दवाओं की कीमतों पर केरल हाई कोर्ट ने केंद्र से मांगी समीक्षा

September 28, 2026 · Ashish Bajpai · 1 मिनट पढ़ें

कोच्चि, 28 सितंबर (आईएएनएस)। केरल हाई कोर्ट ने सोमवार को केंद्र से कहा कि वह इस बात की समीक्षा करे कि क्या पेटेंट अधिनियम की धारा 100 के तहत मिले अधिकारों का इ…

कोच्चि, 28 सितंबर (आईएएनएस)। केरल हाई कोर्ट ने सोमवार को केंद्र से कहा कि वह इस बात की समीक्षा करे कि क्या पेटेंट अधिनियम की धारा 100 के तहत मिले अधिकारों का इस्तेमाल महंगी पेटेंटेड जीवन-रक्षक दवाओं तक पहुंच बेहतर बनाने के लिए किया जा सकता है, खासकर तब जब ऐसी दवाएं मरीजों की पहुंच से बाहर हों

जस्टिस हरिशंकर वी. मेनन ने कहा कि इस प्रावधान को लागू करना आखिरकार एक नीतिगत मामला है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि जहां दवाएं बहुत ज्यादा कीमतों पर बेची जा रही हों, वहां सरकार के दखल पर विचार किया जा सकता है

धारा 100 केंद्र सरकार को पेटेंट धारक की सहमति के बिना सरकारी उद्देश्यों के लिए पेटेंट प्राप्त आविष्कार के उपयोग को अधिकृत करने का अधिकार देती है

अदालत ने महंगे स्तन कैंसर की दवाओं से जुड़े इस मामले में केंद्र को इस प्रावधान को लागू करने का निर्देश नहीं दिया, बल्कि सरकार से वहनीयता निर्धारित करने के लिए आंकड़े एकत्र करने और जहां आवश्यक हो, हस्तक्षेप पर विचार करने को कहा

यह कार्यवाही नोवार्टिस द्वारा निर्मित पेटेंट प्राप्त स्तन कैंसर की दवा रिबोसिक्लिब और एक अन्य स्तन कैंसर की दवा पालबोसिक्लिब पर केंद्रित थी, जिसका पेटेंट समाप्त हो चुका है और जो कम कीमत पर उपलब्ध है

कैंसर उपचार संस्थानों और भारतीय औषधि नियंत्रक जनरल की विशेषज्ञ राय ने पुष्टि की कि दोनों दवाओं को एक दूसरे के स्थान पर उपयोग नहीं किया जा सकता है

फिर भी, कोर्ट ने कहा कि किफायती होने का सही अंदाजा लगाने के लिए जरूरी डाटा के आधार पर जांच होनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि अगर दखल देना जरूरी हो तो केंद्र सरकार न सिर्फ इस मामले में, बल्कि जान बचाने वाली दवाओं से जुड़े दूसरे मामलों में भी धारा 100 लागू करने पर विचार कर सकती है

यह मामला 2022 में कैंसर के एक मरीज की याचिका से शुरू हुआ था, जिसमें रिबोसिक्लिबदवा सस्ती दरों पर उपलब्ध कराने की मांग की गई थी। उस समय इस दवा की कीमत लगभग 78,468.75 रुपए प्रति महीना थी। याचिकाकर्ता की सितंबर 2022 में मौत हो गई, लेकिन हाई कोर्ट ने इस मामले की जांच जारी रखने का फैसला किया

एएसएच/डीकेपी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी

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Source: NewsNation TV

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