AI in Disaster Management: भूकंप, बाढ़, भूस्खलन या किसी दूसरी प्राकृतिक आपदा के बाद कम समय में ज्यादा से ज्यादा लोगों तक मदद पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती होती है.…
AI in Disaster Management: भूकंप, बाढ़, भूस्खलन या किसी दूसरी प्राकृतिक आपदा के बाद कम समय में ज्यादा से ज्यादा लोगों तक मदद पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती होती है. ऐसे समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI और दूसरी आधुनिक तकनीकें राहत और बचाव के काम में तेजी ला रही हैं. नेपाल में आई हालिया आपदा इसका एक उदाहरण है
यहां एक AI आधारित वेब पोर्टल का इस्तेमाल किया गया, जो लापता लोगों की जानकारी को मृतकों और घायलों की आधिकारिक सूची से मिलाने में मदद कर रहा था. इसे नेपाल के वित्त मंत्रालय में IT इंजीनियर नीरज भुसाल ने तैयार किया था. इस टूल ने ओपन-सोर्स सैटेलाइट तस्वीरों की मदद से क्षतिग्रस्त इमारतों और दूसरी संरचनाओं की पहचान और मैपिंग में भी मदद की
इसी तरह निजी ड्रोन ऑपरेटर मनीष महार्जन ने थर्मल कैमरों से लैस ड्रोन का इस्तेमाल किया. ये कैमरे मलबे के अंदर इंसानी शरीर से मिलने वाले ताप संकेतों को पहचान सकते थे. इससे बचाव दल को उन जगहों की जानकारी मिली, जहां लोगों के दबे होने की आशंका थी. ये उदाहरण बताते हैं कि AI और ड्रोन जैसी तकनीकें आपदा के दौरान इंसानी टीमों की क्षमता को कई गुना बढ़ा सकती हैं
पहले आपदा प्रबंधन मुख्य रूप से सरकारी एजेंसियों और राहत-बचाव टीमों तक सीमित रहता था. अब इसमें टेक कंपनियां, टेलीकॉम कंपनियां, सैटेलाइट कंपनियां और आम लोग भी बड़ी भूमिका निभा रहे हैं. स्मार्टफोन, सोशल मीडिया, सैटेलाइट और ड्रोन से बड़ी मात्रा में डेटा मिलता है. चुनौती यह है कि इतने बड़े डेटा को जल्दी समझा जाए और उससे उपयोगी जानकारी निकाली जाए
IIT बॉम्बे के सेंटर फॉर क्लाइमेट स्टडीज के प्रमुख सुबिमल घोष के मुताबिक, AI बहुत कम समय में बड़ी मात्रा में डेटा को समझ सकता है. वह टेक्स्ट, आवाज और वीडियो जैसी अलग-अलग जानकारियों को एक साथ प्रोसेस कर सकता है. आपदा के समय हर मिनट महत्वपूर्ण होता है, इसलिए AI की उपयोगिता बढ़ रही है
AI का एक बड़ा इस्तेमाल मौसम की भविष्यवाणी और समय से चेतावनी देने में हो रहा है. पारंपरिक मौसम पूर्वानुमान में बड़ी संख्या में वैज्ञानिक समीकरणों और भारी कंप्यूटिंग संसाधनों की जरूरत होती है. खासकर जब किसी छोटे इलाके या कम समय के लिए मौसम का अनुमान लगाना हो, तो चुनौती और बढ़ जाती है
AI मॉडल पुराने मौसम के बड़े डेटा से पैटर्न सीखते हैं और उसके आधार पर तेजी से नए पूर्वानुमान तैयार करते हैं. इससे हाइपरलोकल यानी बहुत छोटे इलाके के लिए भी मौसम का अनुमान लगाने की संभावना बढ़ती है
उदाहरण के लिए, Google का Flood Hub दुनिया की प्रमुख मौसम एजेंसियों से डेटा लेकर बाढ़ की भविष्यवाणी करता है. इसका इस्तेमाल भारत में 2018 की बाढ़ के दौरान भी किया गया था. यह स्थानीय और शहरी बाढ़ जैसी घटनाओं के लिए भी पूर्वानुमान देने में मदद करता है और कुछ मामलों में सात दिन पहले तक चेतावनी उपलब्ध करा सकता है
हालांकि, सिर्फ मौसम का पूर्वानुमान काफी नहीं है. यह भी जानना जरूरी है कि अगर बाढ़ या भारी बारिश आती है तो उसका असर किन इलाकों पर सबसे ज्यादा पड़ेगा. इसके लिए मौसम की जानकारी को हैजार्ड मैप यानी जोखिम वाले इलाकों के नक्शे के साथ जोड़ना पड़ता है. AI अलग-अलग एजेंसियों से मिले डेटा, ग्राफ, तस्वीर और टेक्स्ट को एक साथ समझकर खतरे की पूरी तस्वीर तैयार करने में मदद कर सकता है
आपदा के दौरान सोशल मीडिया और स्मार्टफोन से हजारों तस्वीरें, वीडियो और संदेश सामने आते हैं. इनमें जरूरी जानकारी के साथ गलत या भ्रामक जानकारी भी हो सकती है. ऐसे में सबसे बड़ी चुनौती होती है कि सही जानकारी को जल्दी से अलग किया जाए
AI यहां बड़ी भूमिका निभा सकता है. यह अलग-अलग स्रोतों से मिली जानकारियों को एक साथ रखकर महत्वपूर्ण जानकारी निकाल सकता है. स्थानीय भाषाओं में मिली जानकारी को समझना भी इसके उपयोग का अहम हिस्सा है. नेपाल में लापता, मृत और घायल लोगों की जानकारी को मिलाने वाला AI टूल इसी तरह की जरूरत को पूरा करता है
AI का इस्तेमाल सिर्फ बचाव अभियान तक सीमित नहीं है. आपदा के बाद भी यह पता लगाने में मदद कर सकता है कि कौन से इलाके मुख्य नेटवर्क से कट गए हैं, किन सड़कों को नुकसान पहुंचा है और हेलीकॉप्टर उतारने के लिए कौन सी जगह सुरक्षित हो सकती है.इसके अलावा स्थानीय प्रशासन को यह तय करने में भी मदद मिल सकती है कि खाना, दवाएं और राहत सामग्री किन इलाकों में पहले भेजी जाए. इससे सीमित संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है
AI आपदा प्रबंधन को तेज और प्रभावी बनाने में मदद कर सकता है, लेकिन यह इंसानों की जगह नहीं ले सकता. किसी भी तकनीक की सफलता के लिए वैज्ञानिकों, राहतकर्मियों, प्रशासन और स्थानीय लोगों की विशेषज्ञता जरूरी रहती है
संयुक्त राष्ट्र के आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्यालय की रिपोर्ट भी इस बात पर जोर देती है कि मजबूत संस्थान, बेहतर शासन व्यवस्था और मानवीय विशेषज्ञता आपदा प्रबंधन की बुनियाद हैं. AI नई क्षमताएं जरूर देता है, लेकिन इसके साथ नई जिम्मेदारियां भी आती हैं
आखिरकार AI की सफलता इस बात से नहीं मापी जाएगी कि उसका मॉडल कितना आधुनिक है, बल्कि इस बात से होगी कि क्या उसकी मदद से लोगों को समय पर, भरोसेमंद और समान रूप से राहत मिल पाई और कितनी जानें बचाई जा सकीं
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Source: NewsNation TV







