मुंबई, अक्टूबर 206 : मराठी भाषा केवल संचार का माध्यम नहीं है, बल्कि हमारी समृद्ध संस्कृति की वाहक और हमारे गौरवशाली इतिहास की गवाह है। इसके वी के साथ…
मुंबई, अक्टूबर 206 : मराठी भाषा केवल संचार का माध्यम नहीं है, बल्कि हमारी समृद्ध संस्कृति की वाहक और हमारे गौरवशाली इतिहास की गवाह है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने कहा कि अपनी विशाल शब्दावली, समृद्ध साहित्यिक परंपरा और विविध बोलियों की विरासत के साथ, मराठी 21वीं सदी में एक डिजिटल और ज्ञान भाषा के रूप में मजबूत होगी।
दैनिक लेनदेन में मराठी का उपयोग बढ़ाने के साथ-साथ उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डिजिटल प्रौद्योगिकी, क्वांटम कंप्यूटिंग, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और जैव प्रौद्योगिकी जैसे आधुनिक क्षेत्रों में भाषा के अधिक से अधिक उपयोग की अपील की।
मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा मिलने की पृष्ठभूमि में आयोजित ‘शास्त्रीय मराठी भाषा सप्ताह’ और ‘शास्त्रीय मराठी भाषा सम्मान दिवस’ कार्यक्रमों का चर्चगेट में श्रीमती नाथीबाई दामोदर थैकर्सी महिला विश्वविद्यालय के पाटकर हॉल में उत्साह के साथ उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर आयोजित विशेष समारोह में फड़णवीस बोल रहे थे
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, मराठी भाषा और उद्योग मंत्री डॉ. उदय सामंत, मुंबई की मेयर रितु तावड़े, विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. हेमलता बागला, मराठी भाषा विभाग की सचिव किरण कुलकर्णी सहित गणमान्य व्यक्ति, शिक्षक, छात्र और मराठी भाषा प्रेमी उपस्थित थे।
मराठी के लिए शास्त्रीय भाषा का दर्जा गौरव का क्षण
फड़नवीस ने कहा कि मराठी हमेशा से एक प्राचीन और शास्त्रीय भाषा रही है, लेकिन केंद्र सरकार से शास्त्रीय भाषा के रूप में आधिकारिक मान्यता प्राप्त करना मराठी भाषियों के लिए गर्व का क्षण था।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा मिलने से महाराष्ट्र की भाषाई और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर एक विशेष और प्रमुख स्थान मिला है।
फड़णवीस ने यह भी याद दिलाया कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने स्वराज्य की अवधारणा के साथ-साथ मातृभाषा को भी महत्व दिया था। उन्होंने प्रशासन में मराठी का प्रयोग बढ़ाने के प्रयास किये, जिससे इसके सरकारी प्रयोग को नई दिशा मिली
मराठी शब्दावली का विस्तार करने की आवश्यकता
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Source: Maverick News30







