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Uttarakhand News: उत्तराखंड में आपदा से क्षतिग्रस्त सड़कों की बहाली, रोड सेफ्टी और सीमांत क्षेत्रों तक सड़क कनेक्टिविटी मजबूत करने को लेकर लोक निर्माण विभाग (PWD) की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने अधिकारियों को वैकल्पिक मार्गों पर स्पष्ट साइन बोर्ड लगाने, सड़क दुर्घटनाओं के ब्लैक स्पॉट का समाधान करने और गड्ढों की मरम्मत में तेजी लाने के निर्देश दिए।
बैठक में सामने आए आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में प्रदेश में आपदा के कारण 2,360 सड़क मार्ग क्षतिग्रस्त हुए, जिनमें से 2,329 मार्गों को यातायात के लिए खोल दिया गया है। शेष क्षतिग्रस्त सड़कों को पूरी तरह पूर्व स्थिति में लाने के लिए 461 करोड़ 87 लाख रुपये की आवश्यकता बताई गई है। इसके अलावा, पुराने और अनुपयोगी पुलों को पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने तथा सीमांत क्षेत्रों में सड़क नेटवर्क का विस्तार करने पर भी चर्चा हुई।
पीडब्ल्यूडी की समीक्षा बैठक में आपदा के दौरान बाधित होने वाले सड़क मार्गों और यात्रियों को होने वाली परेशानियों पर विशेष ध्यान दिया गया। सतपाल महाराज ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सड़क बंद होने की स्थिति में वैकल्पिक मार्गों की जानकारी स्पष्ट रूप से उपलब्ध कराई जाए।
उन्होंने कहा कि कई बार यात्रियों को यह पता नहीं चल पाता कि मुख्य मार्ग बंद होने पर वैकल्पिक रास्ता कहां से शुरू होता है और किस मार्ग से आगे बढ़ा जा सकता है। ऐसे में डायवर्जन, सड़क के विभाजित होने वाले स्थानों और प्रमुख मोड़ों पर पर्याप्त साइन बोर्ड लगाए जाने चाहिए।
बैठक में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में उत्तराखंड में आपदा से 2,360 मार्ग प्रभावित हुए। इनमें से 2,329 मार्गों को यातायात के लिए खोल दिया गया है।
हालांकि, सड़कों को पूरी तरह उनकी पूर्व स्थिति में बहाल करने के लिए 461.87 करोड़ रुपये की जरूरत बताई गई है। सतपाल महाराज के अनुसार, इस कार्य के लिए धनराशि की मांग की गई है।
आपदा प्रभावित क्षेत्रों में सड़क बहाली पहाड़ी राज्य के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि सड़क मार्ग बाधित होने से स्थानीय लोगों, पर्यटकों और आवश्यक सेवाओं की आवाजाही प्रभावित हो सकती है।
समीक्षा बैठक में सड़क सुरक्षा को लेकर भी अहम निर्देश दिए गए। पीडब्ल्यूडी की सड़कों पर करीब 199 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए हैं। इन स्थानों पर दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करने के लिए आवश्यक सुधार करने पर जोर दिया गया।
मंत्री ने अधिकारियों को रोड साइनेज व्यवस्था बेहतर बनाने के निर्देश दिए, ताकि वाहन चालकों को आगे के रास्ते, मोड़, डायवर्जन और संभावित बाधाओं की जानकारी समय पर मिल सके।
पहाड़ी क्षेत्रों में घुमावदार सड़कें, संकरे मार्ग और खराब मौसम के कारण यात्रा चुनौतीपूर्ण हो सकती है। ऐसे में स्पष्ट संकेतक और जोखिम वाले स्थानों पर सुधार सड़क सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं।
बैठक में सड़कों पर गड्ढों से संबंधित शिकायतों की भी समीक्षा की गई। प्रस्तुत जानकारी के मुताबिक, गड्ढा पैचवर्क को लेकर कुल 1,953 शिकायतें दर्ज हुई थीं।
इनमें से 1,327 शिकायतों पर कार्रवाई किए जाने की जानकारी दी गई, जबकि 626 मामले अन्य विभागों से संबंधित होने के कारण उन्हें संबंधित विभागों को हस्तांतरित कर दिया गया।
सरकार की ओर से सड़क मरम्मत और शिकायतों के निस्तारण में तेजी लाने पर जोर दिया गया, ताकि लोगों को आवागमन के दौरान होने वाली परेशानियों से राहत मिल सके।
पीडब्ल्यूडी की समीक्षा बैठक में अनुपयोगी या डिसफंक्शनल पुलों को नए उपयोग में लाने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रदेश में ऐसे 34 पुल हैं, जिनमें से 21 पुलों का किसी नए उद्देश्य के लिए इस्तेमाल किए जाने की संभावना है।
इस पहल के तहत पुराने बुनियादी ढांचे को पर्यटन और अन्य उपयोगी गतिविधियों से जोड़ने पर विचार किया जा रहा है। इससे अनुपयोगी संरचनाओं का बेहतर इस्तेमाल करने के साथ पर्यटन को भी बढ़ावा मिल सकता है।
बैठक में शिपुरी के एक पुराने पुल का उदाहरण दिया गया, जहां डिसफंक्शनल ब्रिज पर कैफेटेरिया और होटल विकसित किया गया है। इस परियोजना को ‘द ब्रिज’ नाम दिया गया है।
सतपाल महाराज के अनुसार, पर्यटकों ने इस पहल को सराहा है। इसे पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर के पुनर्पयोग और पर्यटन की संभावनाओं को विकसित करने के एक मॉडल के तौर पर देखा जा रहा है।
इस तरह की परियोजनाओं के जरिए अनुपयोगी पुलों को पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने की संभावनाओं पर आगे भी काम किया जा सकता है।
उत्तराखंड के सीमांत और दूरस्थ क्षेत्रों तक सड़क पहुंचाना भी समीक्षा बैठक का प्रमुख मुद्दा रहा। जादुंग, माणा, नीति, आदि कैलास और अधनाबीडांग जैसे क्षेत्रों में सड़क संपर्क विकसित करने की दिशा में किए जा रहे कार्यों पर चर्चा हुई।
सरकार का जोर इन क्षेत्रों को बेहतर सड़क नेटवर्क से जोड़ने पर है, जिससे स्थानीय आबादी को आवागमन में सुविधा मिल सके और पर्यटन गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिले।
सीमांत क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी का महत्व केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है। यह स्थानीय लोगों की आवश्यक सेवाओं तक पहुंच और रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
बैठक में कैलास पर्वत के दर्शन की संभावनाओं का भी उल्लेख किया गया। सतपाल महाराज ने कहा कि सड़क संपर्क विकसित होने के बाद भारत की धरती से कैलास पर्वत के दर्शन की संभावना को साकार करने की दिशा में काम किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में संबंधित क्षेत्र तक पहुंचने के लिए पैदल यात्रा करनी पड़ती है, जबकि सड़क निर्माण से वहां तक पहुंचना अधिक सुविधाजनक हो सकता है।
हालांकि, इस योजना की वास्तविक स्थिति, प्रस्तावित मार्ग, निर्माण की समयसीमा और दर्शन स्थल तक पहुंच की उपलब्धता से संबंधित आधिकारिक विवरण सामने आने पर ही इसकी पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।
पीडब्ल्यूडी की समीक्षा बैठक में सड़क बहाली, रोड सेफ्टी, वैकल्पिक मार्गों के संकेतक, ब्लैक स्पॉट, गड्ढों की मरम्मत, पुराने पुलों के पुनर्पयोग और सीमांत क्षेत्रों की कनेक्टिविटी जैसे मुद्दों पर दिशा तय की गई।
सतपाल महाराज ने अधिकारियों और कर्मचारियों को सड़क संपर्क से जुड़े कार्यों को प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। बैठक का मुख्य उद्देश्य आपदा प्रभावित मार्गों की बहाली में तेजी लाना, यात्रियों की सुरक्षा बेहतर करना और उत्तराखंड के दूरस्थ क्षेत्रों तक आवागमन को सुगम बनाना रहा।
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Source: Filmitics







