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Unnao News: उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के सफीपुर स्थित मिनी औद्योगिक आस्थान में उद्योग विभाग की भूमि और संपत्ति को लेकर विवाद सामने आया है। कई उद्यमियों ने सामूहिक प्रार्थना-पत्र देकर कथित अनधिकृत हस्तक्षेप, दबाव बनाने और धमकी दिए जाने के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उद्यमियों ने राजस्व, उद्योग और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम से मामले की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग उठाई है।
उद्यमियों की ओर से दिए गए प्रार्थना-पत्र में भूमि की पैमाइश, सीमांकन, चारदीवारी को कथित रूप से नुकसान पहुंचाने और औद्योगिक आस्थान की व्यवस्थाओं में हस्तक्षेप समेत कई मुद्दे उठाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। मामले में संबंधित पक्षों का जवाब और जांच के आधिकारिक निष्कर्ष सामने आने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
प्रार्थना-पत्र के अनुसार, सफीपुर स्थित मिनी औद्योगिक आस्थान में गाटा संख्या 1038 की पैमाइश और सीमांकन कराने की मांग की गई है। उद्यमियों का आरोप है कि सड़क के बीच गेट और बाउंड्री बनाए जाने से आवागमन को लेकर समस्या उत्पन्न हुई है।
उद्यमियों ने संबंधित भूमि के राजस्व अभिलेखों और मौके की स्थिति का मिलान कराकर विवाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। उनका कहना है कि भूमि की सीमाओं और रास्ते की स्थिति का आधिकारिक निर्धारण होने से विवाद का समाधान करने में मदद मिल सकती है।
सामूहिक प्रार्थना-पत्र में मिनी औद्योगिक आस्थान के उन्नयन के दौरान बनाई गई चारदीवारी को कथित रूप से तोड़े जाने का मुद्दा भी उठाया गया है। उद्यमियों ने इस संबंध में अनुमति, जिम्मेदारी और संबंधित अभिलेखों की जांच कराने की मांग की है।
इसके अलावा, सरकारी जेसीबी, ट्रैक्टर और अन्य संसाधनों के कथित इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। उद्यमियों ने इन आरोपों की जांच कर यह स्पष्ट करने की मांग की है कि संबंधित संसाधनों का इस्तेमाल किस उद्देश्य से और किसकी अनुमति से किया गया।
फिलहाल, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। जांच के बाद ही संबंधित घटनाओं और जिम्मेदारियों के बारे में स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी।
उद्यमियों ने औद्योगिक आस्थान के गेट पर कैमरा लगाए जाने और वैध निर्माण कार्यों में कथित हस्तक्षेप किए जाने का मुद्दा भी प्रार्थना-पत्र में उठाया है।
उनका आरोप है कि कुछ उद्यमियों के कामकाज और औद्योगिक गतिविधियों पर दबाव बनाया जा रहा है। प्रार्थना-पत्र में कुछ उद्यमियों को अधिवक्ता के माध्यम से लीगल नोटिस मिलने का भी उल्लेख किया गया है।
उद्यमियों ने प्रशासन से पूरे मामले की परिस्थितियों, संबंधित दस्तावेजों और कानूनी पहलुओं की जांच कराने की मांग की है, ताकि तथ्यों के आधार पर उचित निर्णय लिया जा सके।
मामले को लेकर उद्यमियों ने राजस्व, उद्योग और पुलिस विभाग की संयुक्त जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि भूमि के अभिलेखों, सीमांकन, निर्माण कार्यों और मौके की स्थिति की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
उद्यमियों ने यह भी मांग की है कि जांच पूरी होने तक किसी भी वैध रूप से आवंटित उद्यमी को कथित दबाव के आधार पर बेदखल न किया जाए। उनके मुताबिक, औद्योगिक आस्थान में संचालित इकाइयों के अधिकारों और कामकाज से जुड़े मामलों का निस्तारण नियमानुसार होना चाहिए।
सफीपुर मिनी औद्योगिक आस्थान से जुड़े इस मामले में उद्यमियों ने प्रशासन से निष्पक्ष और पारदर्शी कार्रवाई की अपील की है। उनका कहना है कि भूमि संबंधी विवाद और औद्योगिक संपत्ति के इस्तेमाल से जुड़े सभी पहलुओं की जांच अभिलेखों और मौके की स्थिति के आधार पर की जानी चाहिए।
अब मामले में संबंधित विभागों की जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर नजर रहेगी। आरोपों की पुष्टि, जिम्मेदारी तय करने और आगे की कार्रवाई के संबंध में आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही प्रकरण की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
नोट: यह खबर उद्यमियों की ओर से दिए गए प्रार्थना-पत्र में उल्लिखित आरोपों और मांगों पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष और जांच के निष्कर्ष उपलब्ध होने पर खबर को अपडेट किया जाना चाहिए।
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Source: Filmitics







