CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके दिल्ली पुलिस की हिरासत से रिहा होने के बाद महाराष्ट्र के हिंगोली जिले स्थित अपने पैतृक गांव संतुक पिंपरी पहुंचे, यहां उन्होंने अपन…
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके दिल्ली पुलिस की हिरासत से रिहा होने के बाद महाराष्ट्र के हिंगोली जिले स्थित अपने पैतृक गांव संतुक पिंपरी पहुंचे, यहां उन्होंने अपनी दादी सावित्रीबाई दीपके को अंतिम विदाई दी, इस दौरान उन्होंने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए।
अभिजीत दीपके ने पुरुष पुलिसकर्मियों पर लगे कथित छेड़छाड़ के आरोपों और मामले में दिल्ली पुलिस की भूमिका को लेकर सवाल उठाए, उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम को लेकर दिल्ली पुलिस को जवाब देना चाहिए, दीपके के मुताबिक, महिला पुलिसकर्मियों को आगे रखने के पीछे पुलिस की अपनी वजह हो सकती है, उन्होंने आशंका जताई कि ऐसा पुरुष पुलिसकर्मियों पर लगे कथित आरोपों से जुड़ी स्थिति को संभालने या खुद को बचाने के लिए किया गया हो सकता है हालांकि, ये आरोप अभिजीत दीपके के अपने दावे हैं।
– बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांगजनों की पेंशन ₹1,000 से बढ़कर ₹1,500 करने की तैयारी, 1.21 करोड़ लोगों को मिल सकता है लाभ
दिल्ली पुलिस पर निशाना साधते हुए अभिजीत दीपके ने कहा, “यह सवाल दिल्ली पुलिस से पूछा जाना चाहिए। मेरा मानना है कि दिल्ली पुलिस को पुरुष पुलिसकर्मियों पर लगे कथित छेड़छाड़ के आरोपों के कारण शर्मिंदगी महसूस हुई होगी, शायद इसी वजह से उन्होंने महिला पुलिसकर्मियों को आगे कर दिया, या फिर यह खुद को बचाने का एक तरीका हो सकता है,” उन्होंने आगे कहा, “लेकिन मैं दिल्ली पुलिस को बताना चाहता हूं कि हम आप जैसे नहीं हैं, हम सभ्य और शिक्षित लोग हैं, जो महिलाओं के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार करना जानते हैं, हम आपकी तरह गुंडे नहीं हैं।”
– अखिलेश यादव को ओम प्रकाश राजभर की चुनौती, बोले- अयोध्या नहीं तो जहूराबाद से लड़कर दिखाएं चुनाव
उनके इस बयान से दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को लेकर उनकी नाराजगी सामने आई। हालांकि, पुलिस की ओर से इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया दी गई है, इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं है।
दिल्ली पुलिस की हिरासत से रिहा होने के बाद अभिजीत दीपके महाराष्ट्र के हिंगोली जिले के संतुक पिंपरी गांव पहुंचे। यहां उन्होंने श्मशान घाट पर अपनी दादी सावित्रीबाई दीपके को अंतिम विदाई दी, जानकारी के मुताबिक, दीपके 11 अक्टूबर की रात करीब 10:30 बजे अपने गांव पहुंचे थे, एक ओर वह अपनी दादी के निधन से दुखी थे, तो दूसरी ओर उन्होंने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को लेकर अपनी नाराजगी भी जाहिर की फिलहाल, इस मामले में दिल्ली पुलिस का पक्ष सामने आना बाकी है।
div
Source: Filmitics







