नई दिल्ली। पाकिस्तान को आतंकवाद के मुद्दे पर चेतावनी देते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि अगर भविष्य में उसकी ओर से कोई आतंकी हरकत हुई, तो भारत का जवाब…
नई दिल्ली। पाकिस्तान को आतंकवाद के मुद्दे पर चेतावनी देते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि अगर भविष्य में उसकी ओर से कोई आतंकी हरकत हुई, तो भारत का जवाब पहले से भी बड़ा होगा। उन्होंने कहा कि भारत ने आतंकवादियों की हर चुनौती का जवाब दिया है और भारतीय सेना की कार्रवाई ने देश की सुरक्षा क्षमता का प्रदर्शन किया है। रक्षा मंत्री ने 2016 के उरी आतंकी हमले के बाद हुई सर्जिकल स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए रक्षा क्षेत्र में भारत की बढ़ती तकनीकी ताकत और आत्मनिर्भरता पर भी जोर दिया।
नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में राजनाथ सिंह ने कहा कि आतंकवादियों ने जब भी भारत की धरती को निशाना बनाने की कोशिश की, देश ने उन्हें करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान आतंकियों के ठिकानों को निशाना बनाया गया था। उनके मुताबिक, भारत की सैन्य कार्रवाई का प्रभाव आतंकवादियों के आकाओं तक पहुंचा है।
रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर को तकनीक आधारित युद्ध का शानदार नमूना बताया। उन्होंने कहा कि अभियान में आकाश तीर, आकाश मिसाइल प्रणाली और ब्रह्मोस जैसी उन्नत प्रणालियों के साथ कई अत्याधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने इसे इस बात का प्रमाण बताया कि भारतीय सेनाएं आधुनिक तकनीक और बदलती युद्ध परिस्थितियों के अनुरूप अपनी क्षमता विकसित कर रही हैं।
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत का लक्ष्य अपनी सैन्य तैयारियों को आधुनिक बनाने के साथ रक्षा उपकरणों के घरेलू निर्माण को बढ़ावा देना है। इससे देश की सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
रक्षा क्षेत्र में भारत की प्रगति का उल्लेख करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि वित्त वर्ष 2013-14 में देश का रक्षा निर्यात केवल 686 करोड़ रुपये था। उनके अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 38,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। उन्होंने दावा किया कि भारतीय रक्षा उत्पाद करीब 200 देशों को निर्यात किए जा रहे हैं।
रक्षा मंत्री ने कहा कि निर्यात में वृद्धि से केवल आर्थिक लाभ ही नहीं हुआ, बल्कि भारतीय तकनीक की विश्वसनीयता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की प्रतिष्ठा भी मजबूत हुई है।
उन्होंने भारतीय सेना के शस्त्र भंडार में शामिल गोला-बारूद का उदाहरण देते हुए बताया कि 175 प्रकार के गोला-बारूद में से 159 प्रकार स्वदेशी हैं। यह संख्या के आधार पर 90 प्रतिशत से अधिक आत्मनिर्भरता को दर्शाती है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि रक्षा उत्पादन अब केवल सार्वजनिक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। इसमें सार्वजनिक क्षेत्र के रक्षा उपक्रमों के साथ निजी कंपनियां, 16 हजार से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम तथा हजारों आपूर्ति इकाइयां भी योगदान दे रही हैं। उन्होंने इसे भारत का नया रक्षा औद्योगिक परिवार बताया।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन की भूमिका पर उन्होंने कहा कि डीआरडीओ उद्योगों, विश्वविद्यालयों, स्टार्टअप और वैज्ञानिकों को जोड़ने वाले राष्ट्रीय नवाचार मंच के रूप में काम कर रहा है। रक्षा मंत्रालय ने एमएसएमई से 2,400 करोड़ रुपये से अधिक की खरीद को मंजूरी दी है, जबकि नई तकनीकों के विकास के लिए 1,500 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं।
रक्षा मंत्री के मुताबिक, सेनाओं के आधुनिकीकरण के लिए निर्धारित बजट का 75 प्रतिशत हिस्सा भारतीय उद्योगों से खरीद के लिए सुरक्षित किया गया है। रक्षा खरीद प्रक्रिया में किए जा रहे सुधारों का उद्देश्य देश में उत्पादन को गति देना और स्वदेशी तकनीक को मजबूत करना है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत ऐसा देश बनना चाहता है जो शांति के प्रति प्रतिबद्ध रहे, लेकिन अपनी संप्रभुता, अखंडता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने में भी पूरी तरह सक्षम हो। उन्होंने भरोसा जताया कि स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने तक भारत रक्षा, तकनीक और अर्थव्यवस्था सहित कई क्षेत्रों में वैश्विक नेतृत्व की क्षमता विकसित करेगा।
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Source: Filmitics







