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October 21, 2026
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यूपी पुलिस बनी संकटमोचक,सोशल मीडिया अलर्ट से बचाईं 4 हजार से अधिक जिंदगियां –

October 21, 2026 · Ashish Bajpai · 1 मिनट पढ़ें

उत्तर प्रदेश पुलिस अब अपराधियों पर शिकंजा कसने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ संकट में फंसे लोगों के लिए जीवनरक्षक की भूमिका भी निभा रही है। मुख्यमंत्र…

उत्तर प्रदेश पुलिस अब अपराधियों पर शिकंजा कसने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ संकट में फंसे लोगों के लिए जीवनरक्षक की भूमिका भी निभा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में तकनीक आधारित पुलिसिंग और मानवीय संवेदनशीलता का अनूठा समन्वय देखने को मिल रहा है। सोशल मीडिया पर आत्महत्या से संबंधित पोस्ट करने वाले लोगों तक पुलिस न सिर्फ समय रहते पहुंच रही है, बल्कि उन्हें भावनात्मक सहारा देकर जिंदगी की नई उम्मीद भी दे रही है। पुलिस की इस संवेदनशील पहल के जरिए एक जनवरी 2023 से 10 अक्टूबर 2026 के बीच 4 हजार से अधिक लोगों को आत्मघाती कदम उठाने से बचाया गया है।

उत्तर प्रदेश पुलिस और मेटा कंपनी के बीच वर्ष 2022 से संचालित विशेष अलर्ट व्यवस्था संकट में फंसे लोगों के लिए जीवनरक्षक साबित हो रही है। इस व्यवस्था के तहत फेसबुक या इंस्टाग्राम पर आत्महत्या से संबंधित कोई पोस्ट सामने आने पर मेटा कंपनी तत्काल पुलिस महानिदेशक मुख्यालय स्थित सोशल मीडिया सेंटर को ई-मेल और फोन के जरिए सूचना भेजती है। अलर्ट मिलते ही पुलिस मुख्यालय संबंधित व्यक्ति की लोकेशन का पता लगाकर स्थानीय पुलिस को सक्रिय करता है। इसके बाद पुलिस टीम बिना समय गंवाए मौके पर पहुंचती है और संबंधित व्यक्ति को सुरक्षित करने के साथ उसकी काउंसलिंग भी करती है। इस पूरी प्रक्रिया में पुलिस की प्राथमिकता व्यक्ति की जान बचाने और उसे मानसिक तनाव से बाहर निकालने की होती है।राजधानी लखनऊ के सआदतगंज इलाके में यूपी पुलिस की तत्परता और संवेदनशीलता का उदाहरण सामने आया। यहां 26 वर्षीय एक डिलीवरी बॉय पारिवारिक विवाद के चलते मानसिक तनाव से गुजर रहा था। पत्नी और ससुराल पक्ष से विवाद के कारण परेशान युवक ने इंस्टाग्राम पर आत्महत्या से संबंधित वीडियो पोस्ट कर दिया। वीडियो सामने आते ही मेटा कंपनी ने पुलिस मुख्यालय को अलर्ट भेजा। सूचना मिलते ही सआदतगंज पुलिस को युवक की लोकेशन उपलब्ध कराई गई। पुलिस टीम ने महज 10 मिनट में युवक तक पहुंचकर उसे नदी में कूदने से बचा लिया। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने युवक से बातचीत कर उसकी काउंसलिंग की और परिजनों को भी उसके सहयोग के लिए प्रेरित किया।

गाजियाबाद के लिंक रोड थाना क्षेत्र में भी पुलिस की त्वरित कार्रवाई से एक बड़ा हादसा टल गया। आर्थिक तंगी और परिवार का खर्च पूरा न कर पाने के कारण मानसिक तनाव में चल रहे 24 वर्षीय युवक ने इंस्टाग्राम पर आत्महत्या से संबंधित पोस्ट साझा की थी। मेटा से अलर्ट मिलते ही पुलिस मुख्यालय ने स्थानीय पुलिस को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। सूचना के महज आठ मिनट के भीतर पुलिस टीम युवक के घर पहुंच गई। मौके पर कमरे में फंदा मिलने के बाद पुलिस ने युवक को सुरक्षित किया और उससे बातचीत कर उसकी परेशानी समझी। पुलिसकर्मियों ने युवक की काउंसलिंग की और उसे कठिन परिस्थितियों का सामना करने के लिए मानसिक संबल दिया।योगी सरकार में उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यशैली में तकनीक के इस्तेमाल के साथ मानवीय दृष्टिकोण को भी प्राथमिकता दी जा रही है। मेटा अलर्ट व्यवस्था इसका महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर उभरी है। सोशल मीडिया पर सामने आने वाले आत्महत्या संबंधी संकेतों को गंभीरता से लेकर पुलिस जिस तेजी से कार्रवाई कर रही है, उससे हजारों परिवारों को अपनों को खोने के दर्द से बचाने में मदद मिली है। इस पहल की खास बात यह है कि पुलिस केवल संबंधित व्यक्ति को सुरक्षित करने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि काउंसलिंग और परिजनों के सहयोग से उसे मानसिक रूप से मजबूत बनाने का भी प्रयास करती है। इससे पुलिस और आम जनता के बीच विश्वास बढ़ाने में भी मदद मिल रही है।

तकनीक आधारित इस मानवीय पुलिसिंग पहल को राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है। यूपी पुलिस को मेटा अलर्ट व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एसकेओसीएच अवॉर्ड-2025 और द इकोनॉमिक टाइम्स जीओवी अवॉर्ड्स-2026 से सम्मानित किया जा चुका है।प्रदेश में पुलिस की यह पहल संदेश दे रही है कि खाकी वर्दी केवल कानून का पालन कराने के लिए ही नहीं, बल्कि मुश्किल वक्त में लोगों की जिंदगी बचाने और उन्हें नई उम्मीद देने के लिए भी तत्पर है। सोशल मीडिया से मिलने वाले अलर्ट पर त्वरित कार्रवाई और संवेदनशील व्यवहार के जरिए यूपी पुलिस मानवीय पुलिसिंग की नई मिसाल पेश कर रही है।

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Source: Filmitics

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