भारत की आजादी के इतिहास और संसद की पहचान से जुड़े ऐतिहासिक राजदंड ‘सेंगोल’ को तैयार करने वाले शिल्पकार वुम्मिदी एथिराज का बुधवार को निधन हो गया। वह 25 नवंबर 19…
भारत की आजादी के इतिहास और संसद की पहचान से जुड़े ऐतिहासिक राजदंड ‘सेंगोल’ को तैयार करने वाले शिल्पकार वुम्मिदी एथिराज का बुधवार को निधन हो गया। वह 25 नवंबर 1926 को जन्मे थे और अगले महीने 100 वर्ष के होने वाले थे। उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुख व्यक्त किया और भारतीय संस्कृति तथा विरासत में उनके योगदान को याद किया। एथिराज का नाम उस ऐतिहासिक सेंगोल से जुड़ा था, जिसे 1947 में देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को भेंट किया गया था।
वुम्मिदी एथिराज तमिलनाडु के प्रसिद्ध शिल्पकार परिवार वुम्मिदी बंगारू चेट्टी परिवार से जुड़े थे। इस परिवार ने सेंगोल के निर्माण में अहम भूमिका निभाई थी। सेंगोल का निर्माण भारतीय परंपरा और शिल्पकला की बारीकियों को ध्यान में रखकर किया गया था।यह राजदंड चांदी से बनाया गया था और इस पर सोने की परत चढ़ाई गई थी। इसके शीर्ष पर नंदी की आकृति है। भारतीय परंपरा में सेंगोल को सत्ता, न्याय, कर्तव्य और जिम्मेदार शासन का प्रतीक माना जाता है। इसके निर्माण से जुड़े शिल्पकारों का योगदान इसे एक कलात्मक वस्तु से आगे बढ़ाकर ऐतिहासिक महत्व प्रदान करता है।एथिराज का जीवन उस शिल्प परंपरा से जुड़ा रहा, जिसने भारत के स्वतंत्रता काल की एक महत्वपूर्ण धरोहर को आकार दिया।
सेंगोल का इतिहास भारत की आजादी के समय से जुड़ा हुआ है। वर्ष 1947 में इसे तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को सौंपा गया था। इसके बाद यह ऐतिहासिक राजदंड भारतीय स्वतंत्रता से जुड़ी महत्वपूर्ण वस्तुओं में शामिल रहा।हालांकि, समय के साथ सेंगोल का सार्वजनिक उल्लेख सीमित हो गया था। फिर वर्ष 2023 में नए संसद भवन के उद्घाटन के दौरान इसकी स्थापना ने इसे एक बार फिर राष्ट्रीय पहचान दिलाई।28 मई 2023 को नए संसद भवन में सेंगोल को लोकसभा अध्यक्ष की कुर्सी के पास स्थापित किया गया। इसके बाद इसके इतिहास, प्रतीकात्मक महत्व और निर्माण से जुड़े कारीगर परिवार के योगदान पर व्यापक चर्चा हुई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एथिराज के निधन पर शोक संदेश जारी करते हुए उनके योगदान को याद किया। उन्होंने उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
पीएम मोदी ने सेंगोल के संबंध में एथिराज से हुई मुलाकात का भी जिक्र किया। प्रधानमंत्री के मुताबिक, नए संसद भवन में सेंगोल की स्थापना से जुड़ी तैयारियों के दौरान उन्हें अनुभवी शिल्पकार से मिलने और भारतीय संस्कृति के लिए उनके योगदान के प्रति आभार व्यक्त करने का अवसर मिला था।
प्रधानमंत्री ने सेंगोल को नए संसद भवन में प्रमुख स्थान दिए जाने को सम्मान का विषय बताया। इससे नई पीढ़ी को भारत की ऐतिहासिक विरासत और पारंपरिक शिल्पकला को करीब से समझने का अवसर मिला।
वुम्मिदी एथिराज के निधन से भारतीय शिल्पकला और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी एक महत्वपूर्ण हस्ती दुनिया से विदा हो गई। उनका योगदान उस ऐतिहासिक राजदंड से जुड़ा है, जिसने आजादी के दौर से लेकर आधुनिक भारत की संसद तक अपनी पहचान बनाए रखी है।
सेंगोल की कहानी केवल सत्ता के प्रतीक की कहानी नहीं है, बल्कि उन शिल्पकारों के हुनर की भी कहानी है, जिन्होंने इसे आकार दिया। एथिराज की विरासत आने वाली पीढ़ियों को भारतीय कला, परंपरा और इतिहास के बीच के संबंध की याद दिलाती रहेगी।
उनके निधन पर प्रधानमंत्री की श्रद्धांजलि ने एक बार फिर इस बात को रेखांकित किया है कि देश की ऐतिहासिक धरोहरों के पीछे काम करने वाले कारीगर भी भारत की सांस्कृतिक पहचान के निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं।
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Source: Filmitics







