रायबरेली अब बदल चुका है,रायबरेली को लोग बोलते थे कि वीआईपी जनपद और वीआईपी संसदीय क्षेत्र है,लेकिन वीआईपी के नाम पर यहां बदहाली,अराजकता, अभाव था।
गरीब को शासन की योजना नही मिलती थी, स्व.राजीव गांधी ने ये पीड़ा कही थी कि एक रुपया भेजता हूँ,नीचे केवल 15 पैसे पहुंचता है,बाकी 85 पैसा कौन खाता था!
ये 85 फीसदी खाने वाले कोई और नही ये वही कांग्रेसी, समाजवादी पार्टी के लोग थे,जो इन गरीबो के पैसे खा जाते थे,आज जो सड़को का जाल बिछा है,और योजनाओं का उपहार प्राप्त हो रहा है।






