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जर्मनी से यूपी के MSME को मिलेगा ग्लोबल बाजार का रास्ता, इंडो-जर्मन गेटवे प्रोग्राम से बढ़ेगा व्यापार और निवेश –

September 2, 2026 · Ashish Bajpai · 1 मिनट पढ़ें

लखनऊ, 2 सितंबर। उत्तर प्रदेश के MSME सेक्टर को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की दिशा में योगी सरकार ने अहम पहल की है। इंडो-जर्मन गेटवे प्रोग्राम के तहत जर्मनी से आए प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को एमएसएमई मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी से मुलाकात की। इस दौरान उत्तर प्रदेश और जर्मनी के बीच व्यापार, निवेश, तकनीकी सहयोग और MSME व स्टार्टअप्स के वैश्विक विस्तार की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई।मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश तेजी से वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

प्रदेश में निवेशकों के लिए भरोसेमंद, पारदर्शी और अनुकूल कारोबारी माहौल तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि देश के कुल MSME का करीब 14 प्रतिशत हिस्सा उत्तर प्रदेश में है और प्रदेश में लगभग एक करोड़ MSME इकाइयां संचालित हो रही हैं। कृषि के बाद रोजगार उपलब्ध कराने वाला सबसे बड़ा क्षेत्र MSME सेक्टर है।बैठक में भारत और जर्मनी के बीच बढ़ते व्यापारिक संबंधों पर भी चर्चा हुई। बताया गया कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 31.01 बिलियन डॉलर है।

उत्तर प्रदेश से जर्मनी को हर साल 404.20 मिलियन डॉलर से अधिक का निर्यात किया जाता है। इसमें रेडीमेड वस्त्र, चर्म उत्पाद, फुटवियर, कालीन और ऑटो कंपोनेंट्स प्रमुख हैं। प्रदेश का कुल निर्यात करीब 18.2 बिलियन यूरो यानी लगभग दो लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुका है और उत्तर प्रदेश देश का पांचवां सबसे बड़ा निर्यातक राज्य बन गया है।इंडो-जर्मन गेटवे प्रोग्राम 12 महीने का एक संरचित कार्यक्रम है, जिसे जर्मनी के इनोवेशन हब राइन-मेन और जीआईबीए के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। इसके तहत चयनित MSME और स्टार्टअप्स को जर्मनी में कंपनी स्थापित करने, वहां के बाजार को समझने और विदेशी खरीदारों से सीधे संपर्क स्थापित करने में मदद दी जाएगी। प्रिसीजन इंजीनियरिंग, ऑटोमेशन, इलेक्ट्रिक वाहन, सौर ऊर्जा और रीसाइक्लिंग जैसे क्षेत्रों में संयुक्त परियोजनाओं की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।

जर्मन प्रतिनिधिमंडल ने उत्तर प्रदेश के मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और कारोबारी माहौल की सराहना की। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि कार्यक्रम के तहत केवल बड़ी कंपनियों पर ध्यान नहीं दिया जाएगा, बल्कि स्पष्ट विजन और वैश्विक विस्तार की क्षमता रखने वाले MSME और स्टार्टअप्स का भी चयन किया जाएगा। जर्मन प्रतिनिधियों ने उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों के साथ सहयोग बढ़ाने और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के माध्यम से व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने में भी रुचि दिखाई।एमएसएमई मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी ने जर्मन उद्यमियों को 25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा में आयोजित होने वाले चौथे यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में शामिल होने का न्योता दिया। उन्होंने कहा कि भारत और जर्मनी के बीच यह साझेदारी व्यापार, तकनीक, निवेश और कौशल विकास के क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग का मजबूत आधार बनेगी। कार्यक्रम के प्रथम चरण में वैश्विक बाजार में विस्तार की क्षमता रखने वाली MSME इकाइयों और स्टार्टअप्स की पहचान की जाएगी।जर्मन प्रतिनिधिमंडल में राउनहाइम के मेयर डेविड रेंडेल, इनोवेशन हब राइन-मेन के सीईओ स्टीफन विट्टेकाइंड, जर्मन इंडियन बिजनेस अलायंस के सीईओ निर्मल रमण कन्नाइयन और चेयरमैन सेल्वकुमार पेरियासामी शामिल रहे। बैठक में प्रमुख सचिव एमएसएमई शशि भूषण लाल, विशेष सचिव शिशिर समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

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Source: Filmitics

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