Semiconductor News: मोबाइल फोन निर्माण के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ने के बाद अब भारत ने सेमीकंडक्टर सेक्टर में बड़ा निर्माता बनने की दिशा में कदम तेज कर दिए…
Semiconductor News: मोबाइल फोन निर्माण के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ने के बाद अब भारत ने सेमीकंडक्टर सेक्टर में बड़ा निर्माता बनने की दिशा में कदम तेज कर दिए हैं। केंद्र सरकार ने सेमीकंडक्टर उद्योग को बढ़ावा देने के लिए Semicon 2.0 के तहत ₹1.27 लाख करोड़ के प्रोत्साहन की अधिसूचना जारी की है।
इस प्रोत्साहन राशि के जरिए सेमीकंडक्टर सेक्टर में निवेश करने वाली कंपनियों को निर्धारित नियमों के अनुसार आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार का लक्ष्य देश में चिप निर्माण के साथ-साथ इससे जुड़े पूरे इकोसिस्टम को विकसित करना है।
सरकार की नई पहल के तहत सेमीकंडक्टर निर्माण और इससे जुड़े उद्योगों में निवेश को बढ़ावा देने के लिए ₹1.27 लाख करोड़ की प्रोत्साहन व्यवस्था की गई है।
इससे चिप निर्माण के क्षेत्र में नई कंपनियों और निवेशकों को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। साथ ही देश में सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए जरूरी तकनीक, इंफ्रास्ट्रक्चर और सप्लाई चेन विकसित करने में भी मदद मिलेगी।
इससे पहले सरकार ने Semicon 1.0 के तहत वर्ष 2022 में सेमीकंडक्टर क्षेत्र में कंपनियों को निर्माण शुरू करने के लिए करीब ₹76 हजार करोड़ का प्रावधान किया था।
इस योजना के बाद भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण की दिशा में काम तेजी से आगे बढ़ा और अब तक देश में तीन कंपनियां विभिन्न प्रकार के चिप का निर्माण शुरू कर चुकी हैं।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, अगले एक से दो वर्षों में भारतीय कंपनियां देश की जरूरत का करीब 10 प्रतिशत चिप घरेलू स्तर पर बनाने में सक्षम हो सकती हैं।
उन्होंने बताया कि वॉशिंग मशीन से लेकर कई औद्योगिक क्षेत्रों में इस्तेमाल होने वाले चिप का निर्माण भारत में शुरू हो चुका है। इससे आयात पर निर्भरता कम करने और घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
सेमीकंडक्टर उद्योग के विस्तार से देश में बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, पिछले चार वर्षों में करीब 85 हजार इंजीनियरों को सेमीकंडक्टर सेक्टर के लिए प्रशिक्षित किया गया है।
उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ आने वाले वर्षों में करीब एक लाख इंजीनियरों की जरूरत पड़ सकती है। इससे तकनीकी शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में भी नए अवसर पैदा होंगे।
सेमीकंडक्टर निर्माण केवल चिप बनाने तक सीमित नहीं है। इसके लिए देश में एक मजबूत और व्यापक औद्योगिक इकोसिस्टम की जरूरत होती है।
इस इकोसिस्टम में केमिकल, गैस, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स, मशीनरी और विभिन्न प्रकार के पार्ट्स की सप्लाई से जुड़े उद्योग भी शामिल होते हैं। सरकार का फोकस सेमीकंडक्टर निर्माण के साथ इन सहायक उद्योगों को भी विकसित करने पर है।
सेमीकंडक्टर से जुड़े निर्माण, सप्लाई चेन और सहायक उद्योगों को मिलाकर इस क्षेत्र में हर साल 50 से 60 हजार प्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने की संभावना जताई जा रही है।
इसके अलावा अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी बड़ी संख्या में पैदा हो सकते हैं। इससे इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, केमिकल और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र के युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे।
दुनिया में सेमीकंडक्टर उद्योग के तेजी से विस्तार के बीच आने वाले वर्षों में बड़ी संख्या में कुशल इंजीनियरों की जरूरत होगी। अनुमान के मुताबिक 2032 तक वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर निर्माण क्षेत्र में करीब 10 लाख इंजीनियरों की आवश्यकता हो सकती है।
भारत के पास बड़ी तकनीकी मानव संसाधन क्षमता होने के कारण वह वैश्विक सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री के लिए प्रशिक्षित इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों का प्रमुख सप्लायर बन सकता है।
भारत पिछले कुछ वर्षों में मोबाइल फोन निर्माण के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ा है। अब सरकार सेमीकंडक्टर निर्माण को भी देश की इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रही है।
यदि नई निवेश योजनाएं और उत्पादन परियोजनाएं निर्धारित गति से आगे बढ़ती हैं, तो भारत आने वाले वर्षों में सेमीकंडक्टर निर्माण, डिजाइन और इससे जुड़े सप्लाई चेन इकोसिस्टम में अपनी वैश्विक भूमिका मजबूत कर सकता है।
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Source: Filmitics

