ऊंचाहार में मनोज पांडे ने ऐसा शक्ति प्रदर्शन किया है कि सियासी गलियारों में हलचल मच गई है! जिस मनोज पांडे को लेकर कहा जा रहा था कि समाजवादी पार्टी छोड़कर उन्हो…
ऊंचाहार में मनोज पांडे ने ऐसा शक्ति प्रदर्शन किया है कि सियासी गलियारों में हलचल मच गई है! जिस मनोज पांडे को लेकर कहा जा रहा था कि समाजवादी पार्टी छोड़कर उन्होंने अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मार ली, वही मनोज पांडे अब भगवान शिव की कथा के बहाने अपनी ताकत का ऐसा प्रदर्शन करते नजर आ रहे हैं, जिसने विरोधियों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है! हजारों महिलाओं की कलश यात्रा, सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब और आगे होने वाले दिग्गजों के जमावड़े ने सवाल खड़ा कर दिया है—क्या ऊंचाहार में मनोज पांडे ने बीजेपी को अपनी ताकत का ट्रेलर दिखा दिया है?
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जी हां, ऊंचाहार में मनोज पांडे की शिव कथा से पहले निकली कलश यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाएं सड़कों पर नजर आईं। खुद मनोज पांडे अपनी पत्नी के साथ इस आयोजन में शामिल हुए। भीड़ का ये नजारा सामने आया तो सियासी चर्चाएं भी तेज हो गईं। कभी समाजवादी पार्टी का मजबूत चेहरा माने जाने वाले मनोज पांडे अब बीजेपी के साथ हैं। ऐसे में उनके इस आयोजन को सिर्फ धार्मिक कार्यक्रम मानकर नजरअंदाज करना आसान नहीं है। क्योंकि इस शिव कथा में उत्तर प्रदेश की सियासत के कई बड़े नामों के पहुंचने की चर्चा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, बृजेश पाठक, केशव प्रसाद मौर्य, अनुप्रिया पटेल, संजय निषाद, पंकज चौधरी और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा जैसे नेताओं के नाम चर्चा में हैं। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के भी पहुंचने की बात कही जा रही है। और कहानी यहीं खत्म नहीं होती। ऊंचाहार में इस आयोजन में राजा भैया, बृजेश सिंह और धनंजय सिंह जैसे चर्चित बाहुबली नेताओं की मौजूदगी की भी चर्चा है। यानी एक तरफ सत्ता और संगठन के बड़े चेहरे, तो दूसरी तरफ पूर्वांचल और यूपी की राजनीति के बड़े दबदबे वाले नाम। इसीलिए राजनीतिक जानकारों की नजर अब इस पूरे आयोजन पर टिकी है। कहा जा रहा है कि मनोज पांडे इस कथा के जरिए सिर्फ भगवान शिव की भक्ति नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक ताकत का संदेश भी देना चाहते हैं। संदेश साफ है—समाजवादी पार्टी छोड़ने के बाद भले ही सवाल उठे हों, लेकिन ऊंचाहार की राजनीति में मनोज पांडे का दबदबा खत्म नहीं हुआ है। अब बड़ा सवाल यही है—क्या मनोज पांडे का ये शक्ति प्रदर्शन बीजेपी के लिए आने वाले चुनाव से पहले एक बड़ा सियासी संकेत है?
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Source: Filmitics







