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September 13, 2026
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मायावती की प्रतिज्ञा: आकाश और ईशान के लिए BSP के दरवाजे बंद –

September 12, 2026 · Ashish Bajpai · 1 मिनट पढ़ें

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने परिवारवाद को लेकर एक बार फिर अपना रुख बेहद स्पष्ट कर दिया है। पार्टी में युवाओं और नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने की बात क…

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने परिवारवाद को लेकर एक बार फिर अपना रुख बेहद स्पष्ट कर दिया है। पार्टी में युवाओं और नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने की बात कहते हुए मायावती ने अपने छोटे भाई आनंद कुमार के परिवार को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। उन्होंने साफ कहा है कि आनंद कुमार के दोनों बेटों आकाश आनंद और ईशान को अब बहुजन समाज पार्टी में किसी भी छोटे-बड़े पद पर रहकर राजनीति करने का अवसर नहीं दिया जाएगा।मायावती के इस फैसले को पार्टी के भीतर परिवारवाद पर उनकी सख्त नीति के तौर पर देखा जा रहा है। मायावती ने कहा कि बीएसपी का उद्देश्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के आत्मसम्मान और स्वाभिमान के कारवां को आगे बढ़ाना तथा बहुजन समाज को सत्ता की मास्टर चाबी हासिल कर अपने पैरों पर खड़ा करना है। इस मिशन के रास्ते में किसी भी तरह का व्यक्तिगत या पारिवारिक मोह स्वीकार नहीं किया जाएगा।

मायावती ने अपने बयान में कहा कि उन्होंने स्वयं मान्यवर कांशीराम की तरह अपने भाई-बहनों और उनके परिवार के सदस्यों को पार्टी के काम तक सीमित रखा और उन्हें सांसद, विधायक, मंत्री या अन्य राजनीतिक लाभ के पदों से दूर रखा।अपने अविवाहित होने की वजह से छोटे भाई आनंद कुमार को अपने साथ रखने की मजबूरी का जिक्र करते हुए मायावती ने कहा कि आनंद कुमार उनकी देखभाल के साथ-साथ उनकी निगरानी में पार्टी की अहम जिम्मेदारियां लंबे समय से निभा रहे हैं। लेकिन अब उनके परिवार के लोगों को इसका राजनीतिक लाभ मिलना पार्टी और मूवमेंट के हित में सही नहीं होगा।यही वजह है कि मायावती ने इसे अपना “अंतिम फैसला और प्रतिज्ञा” बताते हुए कहा कि आनंद कुमार के दोनों बेटों को भविष्य में बीएसपी में किसी भी राजनीतिक पद पर बने रहने का मौका नहीं दिया जाएगा। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आगे चलकर उनके बेटों के बच्चों को भी यह जिम्मेदारी नहीं सौंपी जाएगी।हालांकि मायावती ने आनंद कुमार के परिवार में उनकी इकलौती बेटी कुमारी दीपिका आनंद के लिए भविष्य में संभावना खुली रखी है। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें अपनी मदद के लिए किसी सदस्य की आवश्यकता होती है तो आनंद कुमार अपनी बेटी की मदद ले सकते हैं। उसकी ईमानदारी, वफादारी और कार्यक्षमता को देखते हुए भविष्य में उसे पार्टी में जिम्मेदारी दी जा सकती है।मायावती ने यह भी कहा कि यदि दीपिका तैयार नहीं होती हैं तो पार्टी की आम सहमति से दलित वर्ग के किसी अन्य मिशनरी कार्यकर्ता को जिम्मेदारी दी जा सकती है, लेकिन आनंद कुमार के बेटों या उनके बच्चों को यह जिम्मेदारी नहीं सौंपी जाएगी।मायावती ने बीएसपी को परिवारवाद से मुक्त रखने की बात करते हुए कहा कि संगठन में और भविष्य में सरकार बनने पर भी किसी एक व्यक्ति को जिम्मेदारी मिलने का अर्थ यह नहीं होगा कि उसके परिवार के दूसरे सदस्यों को भी राजनीतिक लाभ दिया जाए। उनका कहना है कि इससे सर्वसमाज के ज्यादा से ज्यादा लोगों को सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक मुक्ति के आंदोलन से जोड़ा जा सकेगा।अपने बयान में मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं से विरोधी दलों और कथित जातिवादी मीडिया व सोशल मीडिया के “प्रचार और प्रोपेगेंडा” से सावधान रहने की अपील भी की।

उन्होंने दावा किया कि बीएसपी को उत्तर प्रदेश में सत्ता में आने से रोकने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। निष्कासन के बाद वापसी पर भी मायावती का संदेश मायावती ने पार्टी से निष्कासित किए गए नेताओं और कार्यकर्ताओं की वापसी को लेकर चल रही चर्चाओं को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण निष्कासित लोगों को वापस लिए जाने की खबरें प्रचारित की जा रही हैं, लेकिन यह “फेक न्यूज़” है। मायावती ने स्पष्ट किया कि ऐसे लोगों को बीएसपी में वापस नहीं लिया जाएगा।कुल मिलाकर, मायावती का यह बयान पार्टी के भीतर परिवारवाद बनाम संगठनात्मक अनुशासन की बहस को नई दिशा देता है। आकाश आनंद और ईशान को लेकर मायावती की घोषणा ने यह भी साफ कर दिया है कि आने वाले दौर में बीएसपी में राजनीतिक उत्तराधिकार का रास्ता पारिवारिक विरासत के बजाय संगठन और मिशन के आधार पर तय करने की कोशिश की जाएगी।

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Source: Filmitics

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