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September 21, 2026
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दिल्ली SIR पर इलेक्शन कमिशन की सफाई, नोटिस का मतलब वोटर लिस्ट से बाहर होना नहीं

September 21, 2026 · Ashish Bajpai · 1 मिनट पढ़ें

दिल्ली में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर मतदाताओं के बीच बनी असमंजस की स्थिति पर चुनाव आयोग ने अहम स्पष्टीकरण दिया है. दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अ…

दिल्ली में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर मतदाताओं के बीच बनी असमंजस की स्थिति पर चुनाव आयोग ने अहम स्पष्टीकरण दिया है. दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय ने साफ किया है कि SIR के दौरान किसी मतदाता को नोटिस मिलना अपने आप में उसका नाम मतदाता सूची से हटाए जाने का संकेत नहीं है. नाम हटाने से पहले संबंधित मतदाता को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा

दरअसल, दिल्ली में SIR की प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के रिकॉर्ड में विसंगतियां या पुराने रिकॉर्ड से मेल नहीं मिलने की स्थिति सामने आई है. चुनाव अधिकारियों के मुताबिक करीब 33.1 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं. इनमें कई चर्चित नाम भी शामिल हैं. नोटिस पाने वालों में विदेश मंत्री एस.जयशंकर, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत कई अन्य लोग शामिल हैं

चुनाव आयोग के अनुसार SIR का उद्देश्य मतदाता सूची में दर्ज जानकारी का सत्यापन और उसे अपडेट करना है. जिन मामलों में मौजूदा रिकॉर्ड और पुराने चुनावी रिकॉर्ड के बीच नाम, उम्र या दूसरी जानकारियों में अंतर मिला है, या जिन मतदाताओं का पिछली सूची से मिलान नहीं हो पाया, उन्हें नोटिस भेजा जा रहा है. कुछ मामलों में इसे ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ के तौर पर चिन्हित किया गया है

इसका मतलब यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति की मतदाता पात्रता पहले ही खत्म मानी जा चुकी है. नोटिस मिलने के बाद मतदाता को जरूरी दस्तावेज और अपनी स्थिति स्पष्ट करने का मौका दिया जाता है

दिल्ली CEO ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी मतदाता का नाम केवल नोटिस जारी होने के आधार पर नहीं हटाया जा सकता. नाम हटाने से पहले संबंधित व्यक्ति को सुनवाई का अवसर देना जरूरी है. इसके बाद ही उचित आदेश पारित किया जा सकता है, जिसके खिलाफ अपील का प्रावधान भी रहेगा

इसलिए SIR नोटिस को अंतिम कार्रवाई के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए. यह मुख्य रूप से मतदाता रिकॉर्ड की जांच और आवश्यक सुधार की प्रक्रिया का हिस्सा है. आयोग की सफाई ऐसे समय आई है जब प्रमुख लोगों को नोटिस मिलने के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में इसे लेकर कई तरह की चर्चाएं तेज हो गई थीं

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Source: NewsNationTV

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