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नेतन्याहू के ‘कायर’ वाले बयान पर आइसलैंड की विदेश मंत्री ने दिया ये जवाब

September 27, 2026 · Ashish Bajpai · 1 मिनट पढ़ें

यूएनजीए में इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू के भाषण के दौरान कई देशों के प्रतिनिधि हॉल से बाहर चले गए थे. इस पर नेतन्याहू ने उन्हें 'नैतिक तौर पर का…

आइसलैंड की विदेश मंत्री ने यूएन जनरल असेंबली में इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू के ‘ नैतिक तौर पर कायर’ वाले बयान का जवाब दिया है

आइसलैंड की विदेश मंत्री थोर्गेर्दुर कैट्रीन गुन्नार्सदोतिर ने 27 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा में नेतन्याहू का नाम लिए बगैर कहा कि ‘नैतिक तौर पर कायर वो लोग हैं जो न्यायपूर्ण और स्थायी शांति के लिए बातचीत करने से इनकार करते हैं.’

संयुक्त राष्ट्र महासभा में 24 सितंबर को नेतन्याहू के भाषण के दौरान कई देशों के प्रतिनिधि हॉल से बाहर चले गए थे

इस पर नेतन्याहू ने कहा था कि अगर अभी भी इस हॉल में ‘नैतिक रूप से कोई कायर’ बचा है, तो वो बाहर जा सकता है

आइसलैंड की विदेश मंत्री ने क्या कहा

आइसलैंड की विदेश मंत्री थोर्गेर्दुर कैट्रीन गुन्नार्सदोतिर ने कहा, ” हमने इस मंच से ‘नैतिक रूप से कायर’ जैसे शब्द सुने हैं. मेरे लिए नैतिक रूप से कायर वे लोग हैं जो न्यायपूर्ण और स्थायी शांति के लिए बातचीत करने से इनकार करते हैं.”

उन्होंने कहा, ”जो बेहद ज़रूरतमंद लोगों तक मानवीय सहायता पहुंचने से रोकते हैं वो नैतिक रूप से कायर हैं. वो वर्ल्ड लीडर नैतिक रूप से कायर हैं जो बार-बार अंतरराष्ट्रीय क़ानून की अवहेलना और अनादर करते हैं.”

उन्होंने कहा, ”फ़लस्तीनी नागरिकों की पीड़ा पृष्ठभूमि में चलने वाली आवाज़ नहीं बनने दी जा सकती. बच्चे अब भी मारे जा रहे हैं. परिवार अब भी अपने घर खो रहे हैं और माता-पिता बार-बार अपने बच्चों को ज़िंदा रखने की कोशिश कर रहे हैं.”

”हमें ये मंजूर नहीं कि ग़ज़ा को बार-बार तबाह किया जाए और फिर दोबारा बनाया जाए, जबकि मूल वजह का समाधान अब भी नहीं हुआ है.”

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उन्होंने कहा, वेस्ट बैंक में अवैध बस्तियों का विस्तार लगातार जारी है. फ़लस्तीनी नागरिकों को अक्सर बसने वालों की हिंसा का सामना करना पड़ता है. इसे सजा से मिली छूट, भड़काऊ बयानबाज़ी और ऐसी नीतियों से बढ़ावा मिलता है जो इसे रोकने में पर्याप्त सख़्ती नहीं दिखातीं.”

‘हमारा मक़सद साफ़ है. इसराइल के साथ एक टिकाऊ फ़लस्तीन राष्ट्र, जहां दोनों समुदाय सुरक्षा, गरिमा और शांति के साथ रह सकें.”

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उहोंने कहा, ”हमें यूक्रेन और मध्य पूर्व की भयावह घटनाओं को दूसरे संकटों को नजरअंदाज़ करने की वजह नहीं बनने देना चाहिए.”

उन्होंने कहा, ” संप्रभुता पवित्र है. जब तक किसी दूसरे देश का क्षेत्र हमारी महत्वाकांक्षाओं के रास्ते में न आ जाए. हम अदालतें नहीं बना सकते. जब वे हमारे दुश्मनों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करें तो उनकी सराहना करें और जब उनका ध्यान हमारे मित्रों की ओर जाए तो उन्हें कमजोर करने की कोशिश करें.”

” जब गंभीर उल्लंघनों पर कोई कार्रवाई नहीं होती, तो उनके दोहराए जाने की आशंका बढ़ जाती है. और छोटे देशों के लिए यह सिर्फ़ सिद्धांत का नहीं, बल्कि अस्तित्व का सवाल है.”

”यूक्रेन के ख़िलाफ़ रूस का क्रूर युद्ध इसका साफ़ उदाहरण है. रूस ने एक संप्रभु पड़ोसी देश पर हमला किया, जिसका मक़सद जबरदस्ती सीमाएं बदलना और दूसरे राष्ट्र को अपना भविष्य तय करने की स्वतंत्रता से वंचित करना था.”

”यूक्रेन के लोगों ने जो क़ीमत चुकाई है उसकी कल्पना नहीं की जा सकती.”

‘हर तबाह घर के पीछे एक परिवार है. हर मृतक के पीछे कोई ऐसा व्यक्ति है, जिसे कोई प्यार करता था.”

उन्होंने कहा, ”आइसलैंड का रुख़ स्पष्ट है. यूक्रेन को अंतरराष्ट्रीय क़ानून के आधार पर अपनी रक्षा करने, अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने और न्यायपूर्ण और स्थायी शांति हासिल करने का अधिकार है.”

”यूक्रेन के लिए हमारा समर्थन उस सिद्धांत की रक्षा करता है, जिस पर हमारे सभी देशों की सुरक्षा निर्भर करती है. कोई भी देश किसी दूसरे देश का भविष्य तय नहीं कर सकता.”

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नेतन्याहू ने क्या कहा था

24 सितंबर को जब संयुक्त राष्ट्र महासभा में इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू भाषण देने के लिए आए तो कई देशों के प्रतिनिधि हॉल से बाहर चले गए

इस पर उन्होंने उन प्रतिनिधियों को ‘नैतिक तौर पर कायर’ कहा था

नेतन्याहू ने ग़ज़ा में इसराइल पर लगाए जा रहे जनसंहार के आरोपों को ख़ारिज किया था और आलोचकों पर “झूठ” फैलाने का आरोप लगाया था. उन्होंने हमास के ख़िलाफ़ इसराइल की कार्रवाई का बचाव किया था

उन्होंने फ़लस्तीनी इलाकों में बसने वालों की हिंसा की आलोचना को ख़ारिज करते हुए इसे इसराइल के ख़िलाफ़ अंतरराष्ट्रीय बहस में एक विकृत तस्वीर बताया

बिन्यामिन नेतन्याहू ने कहा कि फ़्रांस और ब्रिटेन इसराइल की आलोचना कर रहे हैं. लेकिन सच तो यही है कि यही देश उपनिवेश जैसी अवधारणाओं के स्रोत रहे हैं

नेतन्याहू ने हमास से बंधकों को रिहा करने की मांग दोहराई और कहा कि युद्ध खत्म करने का रास्ता बंधकों की रिहाई और हमास के सैन्य ढांचे को ख़त्म करने से होकर जाता है

नेतन्याहू ने न्यूयॉर्क के मेयर ज़ोहरान ममदानी को भी निशाना बनाया था. उन्होंने कहा था कि ममदानी उन्हें चुप कराने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन वे ऐसा नहीं कर सकते. ममदानी ने नेतन्याहू की ग़ज़ा नीति की कड़ी आलोचना की थी और उन्हें युद्ध अपराधी कहा था

उन्होंने क़तर की भी कड़ी आलोचना की. उनका आरोप था कि क़तर ने अमेरिकी विश्वविद्यालयों और अल-जज़ीरा पर अरबों डॉलर खर्च करके युवाओं में इसराइल, अमेरिका और पश्चिम के प्रति नफ़रत पैदा करने की कोशिश की

उन्होंने ईरान पर हमले का ब्योरा देते हुए कहा था कि ईरान के परमाणु संयंत्रों पर हमला करना कठिन था, लेकिन प्रधानमंत्री के रूप में यह उनके लिए “सबसे आसान फैसलों” में से एक था. उनका दावा था कि ऐसा न किया जाता तो “हम सब मारे जाते.”

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Source: BBC News हिन्दी

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