
यह फैसला सीबीआई द्वारा वर्ष 2017 में दर्ज किए गए एक रिश्वत प्रकरण में सुनाया गया।
अंबेडकर नगर जिले का मामला
मामला अंबेडकरनगर जिले के बसखारी शाखा का है, जहां बैंक ऑफ बड़ौदा के तत्कालीन शाखा प्रबंधक राम स्वरूप मिश्रा ने कामधेनु योजना के तहत स्वीकृत ऋण जारी करने के एवज में ₹30,000 की रिश्वत मांगी थी। शिकायतकर्ता को ₹20.25 लाख का लोन मंजूर हुआ था, लेकिन उसका खाता रोक दिया गया था, जब शिकायतकर्ता ने इसकी वजह पूछी, तो बैंक मैनेजर ने खाते को दोबारा सक्रिय करने के लिए रिश्वत की मांग थी।
ब्लैंक चेक लेते हुए थे गिरफ्तार
शिकायत सीबीआई को दी गई, जिसने 7 मार्च 2017 को मामला दर्ज किया। जांच के बाद तय योजना के तहत सीबीआई टीम ने आरोपी को रंगेहाथ पकड़ा। आरोपी राम स्वरूप मिश्रा शिकायतकर्ता से ₹25,000 की रिश्वत एक साइन किए हुए ब्लैंक चेक के रूप में लेते हुए गिरफ्तार किया गया। मौके से सीबीआई ने वह चेक बरामद किया।
साल 2017 में दाखिल हुई चार्जशीट
जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने 31 मार्च 2017 को चार्जशीट दाखिल किया। अदालत ने सभी सबूतों, गवाहों और सीबीआई की चार्जशीट के आधार पर आरोपी को दोषी पाया और 12 नवम्बर 2025 को उसे 5 वर्ष की सजा और ₹50,000 के जुर्माने की सजा सुनाई।
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