div class=”d1172d9b”
div class=”edd8d071″div
div
div class=”f3e032cb”
div
div class=”cf559a0e b06c8b9b rendered filled” data-atd-fill-state=”filled”
divdiv
div
शिकायती पत्र में उन्होंने लिखा- हमारे पास 4 गाय हैं। शादी के लग्न और धार्मिक आयोजन वाले महीनों को छोड़कर गाय पूरे साल करीब 5 लीटर दूध देती हैं। लेकिन, आयोजनों में बजने वाले DJ के शोर से वो करीब 3 लीटर दूध ही दे पा रही हैं। DJ के शोर से कभी-कभी गायें भड़क जाती हैं। खूंटा तोड़कर भाग जाती हैं। फिर दोबारा दूध निकालना मुश्किल हो जाता है।
क्या सच में तेज शोर या DJ की कानफाड़ू आवाज से गाय या बाकी दूध देने वाले जानवरों पर फर्क पड़ता है? क्या कहता है विज्ञान?
सबसे पहले इसे लेकर सीएम से की गई शिकायत पढ़िए
div class=”f3e032cb “
div class=”f46ba790″ये लेटर संदीप सिंह ने सीएम योगी को सौंपा, जिसमें DJ की शिकायत की गई है।div
divdiv
क्या गायों पर आसपास के वातावरण का फर्क पड़ता है?
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन जर्नल के मुताबिक, गायों पर वातावरण का सीधा असर पड़ता है। गाय कैसा और कितना दूध देगी, ये उसके शारीरिक और मानसिक दोनों ही स्वास्थ्य पर निर्भर करता है।
आसपास के वातावरण को शांत और आरामदायक रखने पर गायों के दूध के प्रोडक्शन पर असर दिखता है। इसमें उनकी देखभाल भी शामिल है। देखभाल करने वाले इंसान उसके साथ कैसा व्यवहार करते हैं, इसका भी असर पड़ता है।
गायों के दूध के प्रोडक्शन का क्या म्यूजिक से कोई लेना-देना है?
इस सवाल का जवाब है- हां। गाय के दूध देने का म्यूजिक से सीधा कनेक्शन है। इस पर पिछले एक दशक में कई रिसर्च हुईं। इनमें सामने आया है कि अगर दूध निकालते समय गाय या दूध देने वाले किसी भी जानवर के आसपास हल्का संगीत बजता रहे तो यह उनकी दूध देने की क्षमता को बढ़ा देता है।
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन जर्नल के मुताबिक, प्रयोग में गाय से दूध निकालने से पहले जब धीमा और मधुर संगीत बजाया गया तो उनकी दूध देने की क्षमता में फर्क देखा गया। वहीं, बिना ऐसे किसी सेटअप के दूध निकाला गया तो कम था।
सवाल उठता है, संगीत कैसे गाय के दूध देने की क्षमता पर असर डालता है?
ट्रॉपिकल एग्रीकल्चरल साइंस और नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन जर्नल के मुताबिक, हल्के और मधुर संगीत से गायों के अंदर मूड को रिलैक्स करने वाला हार्मोन सेरोटोनीन रिलीज होता है। स्ट्रेस कम करने वाला यह हार्मोन जब गायों के अंदर रिलीज होता है, तो उनके दूध देने की मात्रा पर इसका सीधा असर होता है।
साइनडो जर्नल में 1991 में छपी एक रिपोर्ट ‘नॉइस इज ए फैक्टर ऑफ एनवायरमेंटल स्ट्रेस फॉर कैटल’ के मुताबिक, दूध देने वाले पालतू जानवरों के आस-पास अगर एक निश्चित डेसिबल से ज्यादा तेज आवाज हो तो उन पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है।
ऐसे जानवरों के आस पास अगर हर रोज 80 से 100 या उससे अधिक डेसिबल की आवाज रहती है, तो ये उनके दूध देने की क्षमता को घटा सकता है।
div class=”f3e032cb “
div class=”f46ba790″div
जानिए दूध देने वाले जानवरों पर लंबे समय तक तेज आवाज में रहने के असर किसी भी तरह की तेज आवाज इंसानों के लिए ही नहीं, जानवरों के लिए भी उतनी ही नुकसानदेह होती है। या यूं कहें कि इंसानों से भी ज्यादा और जल्दी जानवरों को नुकसान पहुंचता है। बीते कुछ सालों में DJ के बढ़ते चलन और उन पर बजने वाला कानफोड़ू संगीत, बच्चों से लेकर बूढ़े और जानवरों तक के लिए समस्या बन गया है।
अब तो पिछले एक दशक में हुई कई रिसर्च में यह बात सामने आ चुकी है कि लंबे समय तक गाय या उस जैसे दूध देने वाले पालतू पशुओं के पास तेज आवाज होती रही तो इससे उनके दूध की मात्रा और गुणवत्ता दोनों पर असर पड़ने लगता है।
-
इंसान जहां 80 से 100 डेसिबल के आवाज के बीच संतुलित रह पाता है। वहीं, जानवरों के लिए 60 डेसिबल से ऊपर आवाज परेशान करने लगती है। तेज आवाज का पशुओं पर असर-
div class=”f5e1d774 ”
- चारा पचाने में दिक्कत: रिसर्च के मुताबिक, तेज आवाज और शोर-गुल में रहने पर गाय सहित ऐसे जानवरों को चारा पचाने में दिक्कत होती है। इसका नतीजा, उनका दूध कम हो जाता है।
- प्रजनन पर असर: DJ या इस जैसी तेज आवाज के बीच रहने से जानवरों की प्रजनन क्षमता पर भी बुरा असर पड़ता है। ये उनके प्रजनन वाले अंगों और ग्रंथियों को प्रभावित कर सकता है।
- जानवरों के व्यवहार में बदलाव: जिस तरह से इंसानों को तेज संगीत या आवाज वाली जगह पर रहने से थोड़ी देर में ही घबराहट और चिड़चिड़ाहट होने लगती है, ठीक कुछ ऐसा ही जानवरों के साथ भी होता है।
- इसका अंदाजा उनके व्यवहार में आने वाले बदलाव से लगाया जा सकता है। वो गुस्सैल और हिंसक हो जाते हैं। उस जगह से छुड़ाकर दूर भागने की कोशिश करने लगते हैं।
div

