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LDA से फाइल गायब होने से जिन्हें नुकसान हुआ, उनकी सुनिए
1. जानकीपुरम निवासी अतुल कुमार सिंह
ने जानकीपुरम सेक्टर-G में 1993 में मकान बनवाया था। 2019 में इसको फ्री होल्ड करवाने के लिए LDA में आवेदन किया। पहले अधिकारियों ने चार महीने आज-कल कहकर दौड़ाया। बाद में पता चला कि प्लॉट से जुड़ी फाइल ही नहीं है। इसे लेकर LDA के वीसी और सचिव से कई बार शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
2. गोमती नगर विस्तार निवासी ओम प्रकाश यादव
ने LDA ने सेक्टर-6 में अपनी योजना की सड़क का चौड़ीकरण करवाने के लिए 2015 में 18 घरों का तुड़वा दिया था। इसके एवज में मलेसेमऊ में लोगों को जमीनें दी गई थीं। यहां विवाद होने के चलते लोगों ने जमीन लेने से मना कर दिया था।
बताया कि सेक्टर छह में ही अलग से जमीन दी गई। इसके एवज में उनसे अतिरिक्त भुगतान भी जमा करवाया गया। 17 भूखंड मालिकों की रजिस्ट्री करवा दी लेकिन मेरी नहीं। इसके लिए जब LDA गए तब पता चला कि मेरे भूखंड की फाइल गायब है। इस कारण रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है।
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div class=”f46ba790″यह तस्वीर LDA में समाधान दिवस की है। (प्रतीकात्मक)div
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समाधान दिवस में आ रही शिकायतें
LDA में प्राधिकरण दिवस और समाधान दिवस सहित आम दिनों में ऐसे सैकड़ों मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें प्लॉट से जुड़ी फाइलें गायब होने की शिकायत की गई। सूत्रों की मानें तो LDA में करीब 21 हजार फाइल गायब हैं। इसमें कई गंभीर मामलों से जुड़ीं फाइलें भी थीं। इनके पीड़ितों को इंसाफ नहीं मिला पा रहा है।
स्कैनिंग के लिए भेजी गई थीं फाइलें
LDA ने राइटर कंपनी को 1,45,449 स्कैनिंग के लिए फाइल दी थी। लेकिन कंपनी के रिकॉर्ड में 1,25,000 फाइलें ही हैं। इनमें से 1,22,000 फाइलें स्कैन करके LDA को वापस कर दी गई हैं। यानी कि 20,499 फाइलें गायब हैं। इसे लेकर LDA अधिकारियों ने खानापूर्ति के लिए कंपनी पर एफआईआर दर्ज करवा कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया।
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गोमतीनगर के भी प्लॉटों की फाइलें गायब
गोमतीनगर के अलग-अलग खंडों में LDA के बाबुओं ने फर्जीवाड़ा करके 22 प्लॉटों की फर्जी तरीके से रजिस्ट्री कर दी थी। उसमें मुख्य रूप से विनम्र खंड में चार, वास्तुखंड में पांच, विराजखंड में चार, विकल्पखंड में छह, विक्रांतखंड में एक और विराटखंड में दो प्लॉट शामिल हैं। मामले का खुलासा होने के बाद LDA के अधिकारियों ने जांच की तो मालूम चला कि 22 में से छह प्लॉटों से जुड़ी फाइल भी गायब है।
लखनऊ विकास प्राधिकरण के दस्तावेजों से जो फाइलें गायब हुई हैं, उनमें ज्यादातर फाइलें पुरानी योजनाओं की हैं। जानकीपुरम, ट्रांसपोर्ट नगर, गोमती नगर विस्तार सहित दूसरी योजनाओं की फाइलें शामिल हैं।
तत्कालीन VC और स्टोर इंचार्ज हैं जिम्मेदार
1. स्टोर इंचार्ज रोहन दुबे थे। फाइलों के मिलान का काम उनका ही था। उन्होंने पोर्टल पर सारी फाइलों का कंपनी से मिलान नहीं कराया। इसे लेकर तत्कालीन अफसरों ने कार्रवाई के आदेश दिए लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब रोहन दुबे रिटायर्ड हैं।
2. तत्कालीन VC सतेंद्र यादव ने फाइलों को मैन्युअल से डिजिटल करवाया था। इसके लिए राइट कंपनी को काम दिया। उसके बाद 20 हजार से ज्यादा फाइल न पोर्टल पर थीं, न भौतिक रूप से मौजूद थीं। इस पर उन्होंने कंपनी को सिर्फ नोटिस जारी किया था।




