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अंतराष्ट्रीय

रुपईडीहा मे डग्गामार वाहन लगा रहे रोडवेज को चुना। यदा कदा ऐसे वाहनों को सीज कर एआरटीओ कर रहे खानापूर्ति।

By admin · July 29, 2025 · 1 min read

रुपईडीहा बहराइच। नेपाल सीमा से सटी नगर पंचायत रुपईडीहा मे चारों ओर डग्गामार वाहनों का बोलबाला है। खबरें छपने पर कभी कभी एआरटीओ चिन्हित वाहनों को ही सीज सीज कर वाहवाही लूटते देखे जाते हैं।

परंतु नेपाली सवारियों का दोहन बंद नही हो रहा है। जबकि रुपईडीहा डिपो के बसें खाली जा रही हैं। दुर्घटनाओं को दावत देती डबल डेकर बसें जगह जगह दुर्घटनाग्रस्त होती रहती है। यात्री मरते रहते हैं, घायल होते रहते हैं व सरकार मुवावजा देती रहती है। परंतु प्रदेश सरकार यहां स्थानीय प्रशासनिक व छुपे रुस्तम अधिकारियों की नकेल कसने मे नाकामयाब है।

रुपईडीहा के चारों ओर ये वाहन खड़े देखे जाते हैं। इनके सेट नेपालगंज मे बैठे एजेंट वहीं नेपाली सवारियों को सेट करते हैं। सवारियों को स्थान बता दिया जाता है। रिक्शा वाले वहीं इन्हें उतार देते हैं। पूरे वर्ष यह गोरखधंधा चलता रहता है। सभी जिम्मेदारों के पास उनका निर्धारित हक शाम को पहुंचता रहता है। इन वाहनों की कोई जांच नही होती। वाहनों में क्या जा रहा है इसी का पैसा दिया जाता है। इस गोरख धंदे मे पैडल रिक्शे व ई रिक्शे शामिल हैं। यही लोग जिस स्टैंड की सवारियां होती है वहां पहुंचाते रहते हैं।

नेपाली जिलों बांके, बर्दिया, दांग, दैलेख, सुर्खेत, कंचनपुर, कैलाली, जाजरकोट, रुकुम, रोल्पा व महेंद्र नगर आदि क्षेत्रों सहित नेपाल के दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों सहित भारत के महानगरों के लिए गरीब नेपाली नागरिक नित्य यात्राएं किया करते हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यहां की जिम्मेदार एजेंसियों के अतिरिक्त सत्ताधारी नेताओ व क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं का भी इन्हें संरक्षण प्राप्त है।इस सीमावर्ती क्षेत्र में मकड़जाल की तरह फैली प्राइवेट टूर एंड ट्रेवल्स कंपनियां इन नेपाली कामगारों दोहन कर रही हैं।

यह सारा कारोबार सेटिंग पर चल रहा है। बिना पूंजी के कारोबार में सामाजिक तत्वों का भी जमावड़ा रहता है। इन्हें क्षेत्रीय माफियाओं का भी संरक्षण प्राप्त है। मनमाने तरीके से इनका किराया निर्धारित होता है। इनका कोई न तो आधिकारिक मापदंड है न ही किसी पैसेंजर को किराए की उचित रशीद दी जाती है। ये डग्गामार वाहन गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश व पंजाब के लिए मनमाने किराए वसूल कर मालामाल हो रहे हैं। इन अवैध स्टैंडों पर जाम की स्थिति बनी रहती है। इनमें क्षमता से अधिक सवारियां बैठाई जाती हैं।

गत 26 जुलाई को एआरटीओ व स्थानीय पुलिस कर्मियों ने 11, 4 पहिया छोटे वाहन सीज कर कर्तव्य पालन किया है। रोडवेज को इनसे कोई क्षति नही होती। क्षति होती है हरिद्वार, शिमला, जयपुर, लखनऊ, कानपुर गोआ, मुंबई व गुजरात जाने वाले यात्रियों से होती है। जिन्हें जबरिया डग्गामार वाहनों में बैठाया जाता है।

क्या कहते हैं एआरएम रुपईडीहा।

उक्त जानकारी देते हुए एआरएम रुपईडीहा राम प्रकाश ने बताया कि मैंने उच्चाधिकारियों, प्रशासनिक अधिकारियों, संबंधित विभागीय अधिकारियों को कई बार पत्र लिखे हैं। परंतु अभीतक कोई ठोस कार्यवाही नही हुई। उन्होंने बताया कि मैं सन् 2022 से पत्र लिखता आ रहा हूं।

23 अप्रैल 2022, 9 अगस्त 2023, 10 मई 2023, 2 जुलाई 2024, को पत्र दिए हैं। 2 जून 2025 मे भी पत्राचार जारी किया है। उन्होंने कहा कि इन अवैध डग्गामार वाहनों के चलने के कारण रोडवेज की आय घटती जा रही है। परिचालकों को उच्चाधिकारी नोटिसें देते हैं व वेतन काटने की धमकी दी जाती है। आय कम होने से रोडवेज वाहनों की मरम्मत नही हो पाती।

परिचालकों के इंसेंटिव मे कटौती होती है। उन्होंने यह भी कहा कि एक किलोमीटर के दायरे में अवैध वाहन नही चलने चाहिए। परंतु दबंगई के बल पर स्थानीय जिम्मेदारों का वरदहस्त प्राप्त कर यह अवैध धंधा बंद होने का नाम नही ले रहा है।
एआरएम ने शुलभ संदर्भ हेतु उच्चाधिकारियों को 2 जून 2025 को भेजे गए पत्र को भी प्रदान किया है।

श्याम कुमार मिश्रा रुपईडीहा
29/7/2025

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