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अंतराष्ट्रीय

STF का बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह आखिरकार लखनऊ से गिरफ्तार हो गया। STF ने मंगलवार को उसे पकड़ा।

By admin · December 2, 2025 · 1 min read

STF का बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह आखिरकार लखनऊ से गिरफ्तार हो गया। STF ने मंगलवार को उसे पकड़ा। एक दिन पहले ही लुकआउट नोटिस जारी किया गया था। आलोक कोडीन युक्त नशीले कफ सिरप मामले में फरार था। पूर्वांचल के बाहुबली पूर्व सांसद धनंजय सिंह के साथ उसकी कई तस्वीरें हैं।

कफ सिरप की तस्करी में कई गिरफ्तारियां होने के बाद आलोक सिंह विदेश भागने की फिराक में भी था। पूछताछ में आलोक ने STF को बताया कि सरेंडर करने जा रहा था। लखनऊ कोर्ट में इसके लिए अर्जी भी दाखिल की थी। इससे पहले ही STF ने उसे दबोच लिया।

इस तस्वीर में धनंजय सिंह ने आलोक सिंह के कंधे पर हाथ रखा है। पूर्व सांसद धनंजय के दाहिनी ओर अमित टाटा है।
इस तस्वीर में धनंजय सिंह ने आलोक सिंह के कंधे पर हाथ रखा है। पूर्व सांसद धनंजय के दाहिनी ओर अमित टाटा है।

सिलसिलेवार घटनाक्रम समझिए

शासन ने 12 फरवरी 2024 को गठित की थी जांच समिति

STF को कोडीन युक्त कफ सिरप का उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, असम, पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश में अवैध कारोबार की सूचना मिली। इस पर 12 फरवरी 2024 को उत्तर प्रदेश शासन ने STF और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रसाधन विभाग की संयुक्त जांच समिति गठित की गई।

जांच के दौरान भारी मात्रा में अवैध कोडीन युक्त कफ सिरप बरामद हुई। सुशांत गोल्फ सिटी में इस संबंध में मुकदमा दर्ज हुआ।

12 नवंबर को मामले में हुई पहली गिरफ्तारी

STF के अपर पुलिस अधीक्षक लाल प्रताप सिंह की टीम मामले की जांच कर रही थी। 12 नवंबर को इस मामले में सगे भाइयों विभोर राणा और विशाल सिंह निवासी शास्त्री नगर, थाना सदर बाजार जिला सहारनपुर को गिरफ्तार किया। 27 नवंबर को अमित कुमार सिंह उर्फ अमित टाटा को गिरफ्तार किया।

गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के बाद आलोक प्रताप सिंह का नाम सामने आया। मंगलवार को उसे सुशांत गोल्फ सिटी के प्लासियो मॉल के पास से गिरफ्तार किया गया।

बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह अक्सर बाहुबली धनंजय सिंह के साथ नजर आता है।
बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह अक्सर बाहुबली धनंजय सिंह के साथ नजर आता है।

अब पढ़िए आलोक प्रताप सिंह का कबूलनामा

विकास सिंह के जरिए शुभम जायसवाल से मिला

STF की पूछताछ में आलोक प्रताप सिंह ने बताया- ग्राम नरवे आजमगढ़ के रहने वाले विकास सिंह के माध्यम से मेरा परिचय कोडीन युक्त कफ सिरप सिंडिकेट के मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल पुत्र भोला प्रसाद निवासी कायस्थ टोला प्रह्लाद घाट वाराणसी से हुआ था।

विकास सिंह ने बताया था कि शुभम जायसवाल का एबॉट कंपनी की कोडीन युक्त कफ सिरप का शैली ट्रेडर्स के नाम से रांची, झारखंड में बड़ा कारोबार है। कोडीन युक्त कफ सिरप नशे के रूप में प्रयोग होता है, जिसकी पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश में काफी डिमांड है।

इसकी तस्करी में बहुत फायदा है। उसके धंधे में कुछ पैसे लगाओगे तो काफी आमदनी होगी। इस पर लालच में आकर तैयार हो गया और साथी अमित कुमार सिंह उर्फ अमित टाटा को भी बताया तो वह भी तैयार हो गया। अमित टाटा को एसटीएफ द्वारा पूर्व में गिरफ्तार किया जा चुका है।

धनबाद और वाराणसी में फर्जी फर्म बनी

आलोक प्रताप सिंह ने पूछताछ में बताया- मैंने और अमित सिंह ने विकास सिंह के माध्यम से शुभम जायसवाल और उसके पार्टनर वरुण सिंह, गौरव जायसवाल, विशाल मेहरोत्रा के साथ बातचीत की। उन लोगों ने धनबाद में मेरा श्रेयसी मेडिकल एजेंसी के नाम से जनवरी 2024 में फर्म बनवा दी।

फर्म का सारा लेनदेन शुभम जायसवाल व उसके पार्टनर तथा उसका सीए तुषार देखता था। धनबाद के बिजनेस में मैंने और अमित सिंह ने 5-5 लाख रुपए कुल 10 लाख लगाये। मुझको और अमित टाटा को इन लोगों ने लगभग 20-22 लाख रुपए दिए। हम लोग धनबाद 2-3 बार ही गये थे।

धनबाद, रांची का काम वरूण सिंह देखता था। इसके बाद इन लोगों के कहने पर हम दोनों के नाम से वाराणसी में भी ड्रग लाइसेंस लेकर फर्म खुलवाई। मेरे नाम मां शारदा मेडिकल के नाम से फर्म खुलवाई।इसका भी सारा लेन-देन शुभम जायसवाल और उसके साथी देखते थे।

वाराणसी के फर्म में दो-तीन महीने ही फेन्सेडिल का व्यापार होना बताया। उसके बाद एबॉट कंपनी द्वारा फेन्सेडिल कफ सिरप बनाना बंद हो गया। वाराणसी की फर्म में भी लगभग 8 लाख रुपए का लाभ अलग-अलग समय पर शुभम के पार्टनर विकास सिंह व विशाल मल्होत्रा ने दिया।

गैंग के सदस्यों की गिरफ्तारी के बाद दुबई भागे

आलोक प्रताप सिंह ने पूछताछ में कहा- रांची और गाजियाबाद में पुलिस और एसटीएफ टीम द्वारा इस गैंग के सौरभ त्यागी, विभोर राणा आदि को गिरफ्तार किया गया। इस पर मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल अपने परिवार, पार्टनर वरुण सिंह, गौरव जायसवाल के साथ दुबई भाग गया है।

शुभम जायसवाल व उसके पार्टनर द्वारा हम लोगों के अलावा अन्य काफी लोगों के नाम से भी इसी प्रकार फर्जी फर्म बनवाकर फेन्सेडिल कफ सीरप के कूटरचित बिल और ई-वे बिल तैयार कर फर्जी खरीद बिक्री दिखाकर उसको तस्करों के हाथ बेचकर भारी मुनाफा कमाते हैं।

ड्रग लाइसेंस, अनुभव प्रमाण पत्र एवं शपथ पत्र आदि फर्जी है। हम लोगों ने कभी भी किसी भी दुकान पर काम नहीं किया है। अमित टाटा के पकडे़ जाने के बाद मैंने कोर्ट में अपना सरेंडर प्रार्थना पत्र डाला था।

आलोक की तस्वीरें सपा प्रमुख अखिलेश यादव के साथ भी हैं।
आलोक की तस्वीरें सपा प्रमुख अखिलेश यादव के साथ भी हैं।

अब पढ़िए आलोक प्रताप सिंह ने कैसे अपराध की दुनिया में कदम रखा…

2006 में 4 किलो सोना लूटने में आया था नाम

आलोक का पैतृक घर ग्राम कैथी, पोस्ट गुरेरा थाना बलुआ, जिला चंदौली में है। लखनऊ में मालवीय नगर, ऐशबाग, राजेंद्र नगर में भी उसका घर है। साल- 2006 में प्रयागराज के कारोबारी से लखनऊ में 4 किलो सोना लूट लिया गया था। इस मामले में 5 पुलिसकर्मियों समेत 7 लोग आरोपी बनाए गए थे।

आरोपियों मे दरोगा संतोष सिंह, बृजनाथ यादव, तत्कालीन लखनऊ क्राइम ब्रांच के सिपाही सुशील पचौरी, आलोक सिंह और संतोष तिवारी के साथ नीरज गुप्ता और सुभाष भी शामिल थे। पुलिस ने शुरुआती दौर में 3 किलो सोना बरामद करने का दावा किया था।

लाइन हाजिर भी किया गया, रियल एस्टेट से करोड़पति बना

इसके बाद आलोक और सुशील पचौरी को पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। हालांकि, मामला कोर्ट में जाने पर आलोक सिंह के पक्ष में फैसला आया। इसके बाद 27 सितंबर, 2022 में उसे सेवा में बहाल कर दिया गया था।

इस बीच आलोक पर नाका क्षेत्र में व्यापारी से लूट समेत कई संगीन आरोप लगे। तब उसे लाइन हाजिर कर दिया गया। उसी दौरान उसकी नजदीकियां पूर्व सांसद धनंजय सिंह से बढ़ीं। इसके बाद वह रियल एस्टेट और अन्य कारोबार के जरिए प्रभावशाली बन गया।

इसी बीच, 2019 में पूर्व सांसद धनंजय सिंह और आलोक सिंह पर आरोप लगा था कि हजरतगंज इलाके में मुख्तार अंसारी के प्रतिनिधियों पर जानलेवा हमला किया है।

दुबई कनेक्शन, सफेदपोशों की भूमिका संभव

जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि आलोक सिंह से पूछताछ में दुबई कनेक्शन और नेटवर्क को शह देने वाले लोगों के नाम सामने आ सकते हैं। उससे जुड़े रियल एस्टेट कारोबार, फर्जी फर्मों और स्लीपर सेल जैसी संरचना की भी जांच की जाएगी। खासतौर पर उन सफेदपोशों और प्रभावशाली लोगों की भूमिका पर फोकस है, जिनके संरक्षण में यह सिंडीकेट फल-फूल रहा था।

आलोक सिंह की गिरफ्तारी के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और यूपी एसटीएफ की संयुक्त पूछताछ की तैयारी है। ईडी को शक है कि 100 करोड़ से अधिक के इस अवैध कारोबार में मनी लॉन्ड्रिंग के पुख्ता साक्ष्य मिल सकते हैं। उसकी बैंकिंग ट्रांजैक्शन, विदेश यात्रा और संपर्कों का ब्योरा खंगाला जाएगा।

आलोक सिंह के सोशल मीडिया पर रौब दिखाते हुए वीडियो और फोटो हैं।
आलोक सिंह के सोशल मीडिया पर रौब दिखाते हुए वीडियो और फोटो हैं।

बाहुबली धनंजय ने पोस्ट कर CBI जांच की मांग की थी

अमित टाटा की गिरफ्तारी के अगले ही दिन उसके साथ धनंजय सिंह के फोटो-वीडियो वायरल होने लगे। इस पर बाहुबली धनंजय सिंह ने सफाई दी थी। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। कहा- मेरे खिलाफ साजिश रची जा रही। कोडीन मिक्स नशीली सिरप की तस्करी की CBI जांच करानी चाहिए। मैं पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और सीएम योगी को पत्र लिखूंगा।

यूपी STF ने गोमतीनगर से 27 नवंबर को 100 करोड़ रुपए की कोडीन मिक्स कफ सिरप तस्करी से जुड़े केस में अमित कुमार सिंह उर्फ अमित टाटा को गिरफ्तार किया था। इसके बाद अमित टाटा की धनंजय सिंह के साथ कई तस्वीरें वायरल हुईं। इससे सियासी हलचल बढ़ गई।

पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर ने लगाए आरोप

पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर ने आरोप लगाया है कि पूर्व सांसद धनंजय सिंह, उनके परिवार और बर्खास्त सिपाही आलोक प्रताप सिंह का वोटर लिस्ट में एक ही मकान संख्या है। इस संबंध में उन्होंने यूपी के मुख्य सचिव और डीजीपी को शिकायत भेजी है।

इसमें उन्होंने कहा कि उन्हें विधानसभा क्षेत्र 367-मल्हनी, जौनपुर के अनुभाग संख्या-1 वनसफा की वोटर लिस्ट मिली है। इसमें क्रम संख्या-115 पर धनंजय सिंह के भाई जितेंद्र सिंह, 116 पर उन की पत्नी श्रीकला सिंह और 118 पर धनंजय सिंह का नाम अंकित दिखता है। इस वोटर लिस्ट के क्रम संख्या-120 पर आलोक प्रताप सिंह लिखा हुआ है, जो बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह बताए गए हैं।

सोशल मीडिया पर वोटर लिस्ट शेयर कर दावा किया जा रहा है कि बाहुबली धनंजय सिंह और बर्खास्त सिपाही आलोक का मकान नंबर एक ही है।
सोशल मीडिया पर वोटर लिस्ट शेयर कर दावा किया जा रहा है कि बाहुबली धनंजय सिंह और बर्खास्त सिपाही आलोक का मकान नंबर एक ही है।

अमित टाटा के साथ भी धनंजय की तस्वीरें आई थीं

STF ने 4 दिन पहले लखनऊ से कोडीन मिक्स नशीली फेन्सेडिल कफ सिरप की तस्करी करने वाले अमित टाटा को गिरफ्तार किया था। वह लखनऊ समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में 100 करोड़ की नशीली ड्रग खपाने वाले सिंडिकेट का अहम हिस्सा है। उसके साथ भी पूर्व सांसद धनंजय सिंह की तस्वीरें सामने आई थीं।

STF ने गोमती नगर के ग्वारी चौराहे के पास से अमित कुमार सिंह उर्फ अमित टाटा को गिरफ्तार किया। एसटीएफ के अनुसार आरोपी लखनऊ में रहकर नेटवर्क को दोबारा सक्रिय करने की कोशिश कर रहा था। उसके पास से दो मोबाइल फोन, एक फॉरच्यूनर कार, आधार कार्ड, 4500 रुपए नकद और मोबाइल में मौजूद कई अहम डिजिटल दस्तावेज बरामद किए हैं।

सोशल मीडिया पर धनंजय सिंह के साथ अमित टाटा की कई तस्वीरें और वीडियो हैं।
सोशल मीडिया पर धनंजय सिंह के साथ अमित टाटा की कई तस्वीरें और वीडियो हैं।

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