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अंतराष्ट्रीय

विधायक योगेश शुक्ला से विशेष बातचीत की। विधायक ने स्पष्ट किया कि यूजीसी कानून को लेकर भ्रम की स्थिति बनाई जा रही है

By admin · January 28, 2026 · 1 min read

 

लखनऊ में यूजीसी कानून के विरोध में सवर्ण समाज का प्रदर्शन तेज हो गया है। इसी क्रम में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बीकेटी मंडल महामंत्री अंकित तिवारी सहित कई पदाधिकारियों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। इस घटनाक्रम से राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है।

 ने इस मुद्दे पर क्षेत्रीय विधायक योगेश शुक्ला से विशेष बातचीत की। विधायक ने स्पष्ट किया कि कानून को लेकर भ्रम की स्थिति बनाई जा रही है और लोगों को पहले इसका पूरा अध्ययन करना चाहिए। युवाओं को बहकावे में आना ठीक नहीं है।

भाजपा के बीकेटी मंडल के कई पदाधिकारियों ने पद से इस्तीफा लगा दिया है।
भाजपा के बीकेटी मंडल के कई पदाधिकारियों ने पद से इस्तीफा लगा दिया है।

सवाल – यूजीसी कानून लागू होने के बाद बीजेपी के पदाधिकारी इस्तीफा क्यों दे रहे हैं?

जवाब – इस कानून को लेकर भ्रम की स्थिति बनाई जा रही है और लोगों को पहले पूरे कानून का अध्ययन करना चाहिए। “मुझे लगता है कि पूरे कानून को जोश में नहीं, बल्कि अध्ययन करके समझने की जरूरत है। अगर कहीं कोई कमी है, तो उसका समाधान जरूर होगा। मुझे केंद्रीय नेतृत्व पर पूरा विश्वास है। यह कानून संसदीय समिति के जरिए सभी राजनीतिक दलों की सहमति से बना है।कार्यकर्ताओं को जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। फेसबुक पोस्ट देखकर इस्तीफा देना या बहकावे में आना ठीक नहीं है। केंद्रीय नेतृत्व ने देश को नई दिशा दी है, इस मामले में भी कोई भेदभाव नहीं होगा।

सवाल – सवर्ण समाज के लिए इस कानून को काला कानून की तरह देखा जा रहा है?

जवाब – यह कहा जा रहा है कि इस कानून में सामान्य वर्ग का कोई प्रतिनिधि नहीं होगा, यह पूरी तरह गलत है। स्थायी सदस्यों में एक दलित, एक पिछड़ा, एक महिला और एक दिव्यांग का होना तय है, लेकिन महिला या दिव्यांग किस जाति से होंगे, यह कहीं नहीं लिखा है। वे सामान्य वर्ग से भी हो सकते हैं।उन्होंने बताया कि यूनिवर्सिटी का टॉप हेड सामान्य वर्ग से हो सकता है।

शिक्षा विशेषज्ञ सामान्य वर्ग से हो सकते हैं।सामाजिक क्षेत्र के प्रतिनिधि भी सामान्य वर्ग से हो सकते हैं, यानी 10 में से 7 सदस्य सामान्य वर्ग के हो सकते हैं।विधायक योगेश शुक्ला ने कहा दलितों को उनका हक मिलना चाहिए, पिछड़ों को उनका हक मिलना चाहिए, महिलाओं को मिलना चाहिए, दिव्यांगों को मिलना चाहिए। लेकिन साथ ही सामान्य वर्ग के लोगों में यह भावना नहीं आनी चाहिए कि उनके साथ अन्याय हो रहा है। केंद्रीय नेतृत्व इस दिशा में संतुलन बनाकर काम करेगा।

सवाल – जो पदाधिकारी इस्तीफा दे रहे उसको लेकर क्या कहना चाहते हैं?

जवाब – जो लोग इस्तीफा दे रहे हैं, वे मेरे परिवार जैसे हैं। पता नहीं उन्होंने सोशल मीडिया पर क्या देखा। मेरा मानना है कि उन्हें यूजीसी कानून को खुद पढ़ना चाहिए। मैंने भी इसका अध्ययन किया है और इसमें सामान्य वर्ग को बाहर करने जैसी कोई बात नहीं है।

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