Skip to content
September 24, 2026
ब्रेकिंग न्यूज़
मां को गालियां दीं, लेकिन मैं उन्हें माफ करता हूं… जंतर-मंतर प्रदर्शन पर पीएम मोदी की देश से बड़ी अपील, राष्ट्रपति ने पेपर लीक कानून संशोधन को दी मंजूरी, राज्यों में फास्ट ट्रैक अदालतों का रास्ता साफ *RBI का नया नियम : अब बैंकों को अपनी सभी शाखाओं में जमा पर देना होगा एकसमान ब्याज, चाहे सरकारी हो या प्राइवेट… अब चढ़ावा आठ सदस्यीय निगरानी टीम के हवाले, नई व्यवस्था 25 जुलाई से लागू विदिशा ट्रस्ट ने ‘वाइब्रेंट विदिशा’ के 15वें संस्करण का आयोजन किया; लखनऊ के गोमतीनगर क्षेत्र स्थित हुसड़िया चौराहे के पास एक पेट्रोल पंप पर पेट्रोल कम डालने के आरोप को लेकर विवाद हिंसक हो गया। बाराबंकी के सुबेहा थाना क्षेत्र में मोहर्रम का जुलूस देख रहे एक युवक पर पुरानी रंजिश के चलते चाकू से हमला किया गया। विश्व योग दिवस पर प्रेरणा वाटिका पार्क में हुआ भव्य योग कार्यक्रम।
अंतराष्ट्रीय

हाईकोर्ट का फैसला- अवैध गिरफ्तारी पर न्यायिक हिरासत भी अवैध:मजिस्ट्रेट बिना कारण गिरफ्तारी को न्यायिक हिरासत में नहीं भेज सकते

February 13, 2026 · admin · 1 मिनट पढ़ें

div class=”a88a1c42″

div
div class=”d1172d9b”
div class=”edd8d071″div
div
div class=”f3e032cb”div
div class=”f46ba790″div
div class=”fe1b7d06″div

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि यदि किसी अभियुक्त की गिरफ्तारी विधि के अनुसार नहीं की गई है, तो मजिस्ट्रेट द्वारा उसे न्यायिक हिरासत में लेने का आदेश भी वैध नहीं माना जाएगा। न्यायालय ने पॉक्सो के एक मामले में गिरफ्तार अभियुक्त की न्यायिक हिरासत को अवैध मानते हुए उसे तुरंत रिहा करने का आदेश दिया है।

div class=”

cf559a0e
b06c8b9b

div id=”Ad–28928716–Bhaskar–Article–M.DAB_AS_MID_300x250″ class=”fbad50ce”div
div

यह निर्णय न्यायमूर्ति अब्दुल मोईन और न्यायमूर्ति बबीता रानी की खंडपीठ ने प्रतापगढ़ निवासी याची की ओर से उसके भाई की दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को स्वीकार करते हुए पारित किया। याचिका में कहा गया था कि याची को दुराचार, पॉक्सो और अन्य आरोपों में अभियुक्त बनाते हुए प्रतापगढ़ के कंधई थाने में FIR दर्ज कराई गई थी।

बिना कारण बताए न्यायिक हिरासत में भेजा

आरोप था कि याची ( जिसे आरोपी बनाया गया) ने वादी की 17 वर्षीय पुत्री को बहला-फुसलाकर शारीरिक संबंध बनाए और ब्लैकमेल किया। न्यायालय को सुनवाई के दौरान बताया गया कि 28 जनवरी 2026 को याची को थाने पर बयान देने के लिए बुलाया गया था।

जब वह वहां पहुंचा, तो उससे अरेस्ट मेमो पर हस्ताक्षर करा लिए गए और उसे गिरफ्तार कर लिया गया। अगले दिन उसे संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया। मजिस्ट्रेट ने यह देखे बिना कि अरेस्ट मेमो में अभियुक्त की गिरफ्तारी के किसी कारण का उल्लेख नहीं किया गया है, उसे न्यायिक हिरासत में लेते हुए जेल भेज दिया।

याचिका का राज्य सरकार के अधिवक्ताओं शिवनाथ तिलहरी और अनुराग वर्मा ने विरोध किया। उन्होंने न्यायालय को बताया कि यदि गिरफ्तारी के बाद मजिस्ट्रेट ने रिमांड स्वीकार कर लिया है, तो गिरफ्तारी की प्रक्रिया में कोई त्रुटि रह भी गई है तो वह विलुप्त मान ली जाएगी। हालांकि, न्यायालय ने राज्य सरकार के अधिवक्ता के इस तर्क से असहमति व्यक्त की।

शेयर करें:

संबंधित खबरें

और खबरें