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भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) से जुड़े तीन सक्रिय सदस्यों को लखनऊ की विशेष अदालत ने गुरुवार को सजा सुनाई है। देश में आतंक फैलाने और सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश के मामले में अदालत ने तीनों आरोपियों को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास और आर्थिक दंड से दंडित किया है। वहीं 25-25 हजार का जुर्माना लगाया।
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यूपी STF ने 8 अक्टूबर 2010 को कानपुर के किदवई नगर थाना क्षेत्र से शिवराज सिंह बग्दावल, राजेंद्र कुमार उर्फ अरविंद और कृपाशंकर उर्फ मनोज को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के दौरान उनके पास से माओवादी विचारधारा से संबंधित भारी मात्रा में साहित्य, पंपलेट, सीडी, कैसेट और मैगजीन बरामद हुई थीं।
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div class=”f46ba790″भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) से जुड़े तीन सक्रिय सदस्यों को लखनऊ की विशेष अदालत ने गुरुवार को सजा सुनाई है।div
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देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप
जांच में सामने आया कि आरोपी उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों में गुप्त बैठकें कर रहे थे। इन बैठकों के जरिए वे लोगों को संगठन से जोड़ने, आतंक फैलाने और भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश रच रहे थे। इसी आधार पर कानपुर नगर के थाना किदवई नगर में मुकदमा दर्ज किया गया, जिसकी आगे की विवेचना एटीएस द्वारा की गई।
ATS की जांच और मजबूत पैरवी से मिली सजा
एटीएस ने विस्तृत जांच कर अदालत में ठोस साक्ष्य पेश किए। प्रभावी पैरवी के चलते एनआईए/एटीएस ने तीनों आरोपियों को दोषी करार दिया। लखनऊ कोर्ट ने अदालत ने माना कि आरोपी प्रतिबंधित संगठन के सक्रिय सदस्य थे और उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ साजिश रची थी।




