पटना: केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान को मिली कथित धमकी के मामले पर बिहार में सियासत गरमा गई है। बुधवार (2 सितंबर 2026) को जेडीयू नेता और मंत्री अशोक चौधरी ने इस घटना को गलत बताते हुए कहा कि चिराग पासवान दलितों की बड़ी आवाज हैं और सरकार को मामले की गंभीरता से जांच करनी चाहिए।
पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान अशोक चौधरी ने कहा कि किसी भी बड़े नेता को इस तरह की धमकी देना गलत है, उन्होंने चिराग पासवान का जिक्र करते हुए कहा कि आजादी के बाद देश में जिन प्रमुख दलित नेताओं का नाम लिया जाता है, उनमें बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर, जगजीवन राम, मायावती और रामविलास पासवान शामिल हैं।
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चिराग पासवान को मिली धमकी पर प्रतिक्रिया देते हुए अशोक चौधरी ने कहा कि यह गलत है, उन्होंने कहा कि चिराग पासवान दलितों की बड़ी आवाज हैं और अगर वह अपनी बात उठा रहे हैं तथा कोई उन्हें धमकी दे रहा है, तो सरकार को इस मामले को देखना चाहिए, उन्होंने आगे कहा, “मारना और जीना तो महादेव के हाथ में है। धरती पर कौन पैदा लिया है कि किसी को मार देगा… फिर भी इस तरह से धमकी देना तो गलत बात है।”
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान को मंगलवार को कथित तौर पर एक धमकी भरा पत्र मिला था, उनके कार्यालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, पत्र में उन्हें आतंकवादियों द्वारा जल्द हत्या किए जाने की धमकी दी गई, चिराग पासवान के कार्यालय ने इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय से गहन जांच कराने और उनकी सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने की मांग की है।
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चिराग पासवान के अतिरिक्त निजी सचिव आलोक कुमार सिंह ने गृह सचिव गोविंद मोहन को पत्र लिखकर मामले की जानकारी दी। पत्र के मुताबिक, मंत्रालय को एक बिना हस्ताक्षर वाला पत्र मिला, जिसमें दो मोबाइल नंबर भी दर्ज थे, कार्यालय के अनुसार, पत्र की सामग्री देखने के बाद उसमें खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान की जान को सीधे खतरे की बात सामने आई। संदेश में कथित तौर पर उनकी जल्द हत्या किए जाने की धमकी दी गई थी, मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई और जांच की मांग की गई है।
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान को फिलहाल Z श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त है। धमकी मिलने के बाद उनके कार्यालय ने सुरक्षा को लेकर भी चिंता जाहिर की है, इस मामले में अब जांच एजेंसियों की कार्रवाई और केंद्र सरकार की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर नजर है। वहीं, अशोक चौधरी के बयान के बाद यह मुद्दा बिहार की राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया है।
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Source: Filmitics

