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राम मंदिर ट्रस्ट को मिला पहला CEO, रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति तय –

September 2, 2026 · Ashish Bajpai · 1 मिनट पढ़ें

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को जल्द ही अपना पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मिलने जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, भारतीय वायुसेना के सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को इस पद के लिए चुना गया है। ट्रस्ट की आगामी प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनकी नियुक्ति की आधिकारिक घोषणा किए जाने की संभावना है।

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जितेंद्र मिश्रा नियुक्ति की तारीख से तीन साल तक CEO के पद पर कार्य करेंगे। वह इसी वर्ष अप्रैल में भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत्त हुए हैं। उन्होंने करीब 38 वर्षों तक वायुसेना में सेवाएं दीं और इस दौरान लड़ाकू विमान पायलट, कॉम्बैट इंस्ट्रक्टर तथा टेस्ट पायलट जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। मिश्रा को कारगिल युद्ध 1999 और पिछले वर्ष हुए ऑपरेशन सिंदूर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए भी जाना जाता है। उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित किया जा चुका है। उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले से ताल्लुक रखने वाले मिश्रा NDA खड़कवासला के पूर्व छात्र हैं। उनके पास 3,000 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव है।

राम मंदिर ट्रस्ट के CEO पद के लिए 5,500 से ज्यादा आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से 18 उम्मीदवारों को आगे की प्रक्रिया के लिए चुना गया। शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों से उनके खान-पान, जीवनशैली और हिंदू धर्म से जुड़ी मान्यताओं समेत कई महत्वपूर्ण विषयों पर सवाल किए गए थे।

CEO के चयन के लिए ट्रस्ट ने तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था। इसमें रिटायर्ड जस्टिस प्रमोद कोहली, विष्णुकांत चतुर्वेदी और सुरेश हावड़े शामिल थे।

राम मंदिर के CEO की प्रमुख जिम्मेदारी मंदिर के प्रशासनिक कामकाज को व्यवस्थित करना होगी। इसके साथ ही वित्तीय व्यवस्था, कानूनी मामलों और मंदिर से जुड़ी अन्य व्यवस्थाओं की निगरानी भी CEO के जिम्मे होगी। इस पद के जरिए मंदिर के संचालन को अधिक व्यवस्थित और पेशेवर बनाने की कोशिश की जा रही है। दरअसल, इस वर्ष जून-जुलाई के दौरान राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मामला सामने आया था। पुलिस ने इस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद ट्रस्ट की व्यवस्थाओं में बदलाव और प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने की मांग तेज हुई। राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष और पूर्व IAS अधिकारी नृपेंद्र मिश्रा पहले ही मंदिर के बेहतर संचालन के लिए CEO नियुक्त करने की जरूरत पर जोर दे चुके थे। हालांकि, ट्रस्ट के भीतर कुछ लोगों ने CEO पद बनाए जाने का विरोध भी किया था और मंदिर का संचालन संतों के हाथ में रखने की बात कही थी।

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Source: Filmitics

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