पूर्वांचल की राजनीति में देवरिया सदर विधानसभा सीट का अपना खास महत्व है। 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने यहां बड़ी जीत दर्ज कर अपनी मजबूत पकड़ का प्रदर्शन…
पूर्वांचल की राजनीति में देवरिया सदर विधानसभा सीट का अपना खास महत्व है। 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने यहां बड़ी जीत दर्ज कर अपनी मजबूत पकड़ का प्रदर्शन किया था। अब 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट के साथ एक बार फिर इस सीट पर सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं। एक तरफ मौजूदा विधायक शलभ मणि त्रिपाठी और बीजेपी का मजबूत संगठन है, तो दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी के खेमे में 2022 में दूसरे स्थान पर रहे अजय प्रताप सिंह उर्फ पिंटू का नाम प्रमुखता से चर्चा में है।सवाल सीधा है—क्या बीजेपी 2022 की बढ़त को दोहरा पाएगी या सपा इस बार मुकाबले को कांटे की टक्कर में बदलने की तैयारी कर रही है?
देवरिया सदर सीट पर 2022 का चुनाव बीजेपी के लिए बेहद मजबूत रहा था। बीजेपी उम्मीदवार शलभ मणि त्रिपाठी को 1,06,701 वोट मिले थे, जबकि समाजवादी पार्टी के अजय प्रताप सिंह उर्फ पिंटू को 66,046 वोट हासिल हुए थे। इस तरह शलभ मणि ने करीब 40 हजार से ज्यादा वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी।पिंटू दूसरे स्थान पर रहे थे। यही वजह है कि 2027 की संभावित लड़ाई में उनका नाम एक बार फिर चर्चा में है। हालांकि, अभी किसी भी राजनीतिक दल ने 2027 के लिए आधिकारिक उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है।
सपा के लिए अजय प्रताप सिंह उर्फ पिंटू का चेहरा नया नहीं है। 2022 में उन्होंने बीजेपी के सामने सीधी चुनौती पेश की थी। ऐसे में अगर पार्टी उन्हें दोबारा मैदान में उतारती है, तो मुकाबला सीधे 2022 के परिणामों की तुलना पर टिक सकता है।सपा को इस सीट पर अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए बूथ स्तर पर संगठन को सक्रिय करने और बीजेपी की बढ़त वाले इलाकों में सेंध लगाने की चुनौती होगी। वहीं संभावित INDIA गठबंधन की रणनीति भी चुनावी समीकरण को प्रभावित कर सकती है।
देवरिया सदर में तीसरे कोण को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। 2022 में बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार रामसरन को करीब 17,893 वोट मिले थे और वह तीसरे स्थान पर रहे थे।अगर 2027 में BSP मजबूत उम्मीदवार उतारती है और अपना वोट बैंक सक्रिय करने में सफल रहती है, तो उसका असर सीधे बीजेपी और सपा के बीच वोटों के गणित पर पड़ सकता है। यही वजह है कि चुनावी रणनीतिकारों की नजर बसपा की संभावित रणनीति पर भी रहेगी।
2027 में देवरिया सदर के चुनावी नतीजों पर स्थानीय मुद्दों की बड़ी भूमिका हो सकती है। रोजगार, किसानों की समस्याएं, कानून-व्यवस्था, सड़क और स्थानीय विकास, स्वास्थ्य सुविधाएं तथा गन्ना किसानों के बकाए जैसे मुद्दे विपक्ष के लिए सरकार को घेरने का आधार बन सकते हैं।दूसरी तरफ बीजेपी अपने मौजूदा विधायक के काम, योगी सरकार की उपलब्धियों, संगठन की मजबूती और केंद्र-राज्य सरकार की योजनाओं को चुनावी मुद्दा बना सकती है।
2022 में शलभ मणि त्रिपाठी ने पिंटू पर बड़ी बढ़त बनाई थी। लेकिन चुनावी राजनीति में पांच साल लंबा समय होता है। मतदाताओं की प्राथमिकताएं, उम्मीदवार, गठबंधन और स्थानीय मुद्दे बदल सकते हैं।इसलिए असली सवाल यही है—क्या देवरिया सदर में 2022 का आंकड़ा फिर दोहराया जाएगा, या 2027 में सपा अपने पुराने प्रदर्शन को बड़ी चुनौती में बदल पाएगी? फिलहाल मुकाबले की तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है, लेकिन देवरिया सदर की सीट पर सियासी पारा बढ़ना शुरू हो चुका है। अब नजर इस बात पर होगी कि चुनाव नजदीक आने के साथ बीजेपी, सपा और बसपा किस रणनीति के साथ मैदान में उतरती हैं।
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Source: Filmitics

