उन्नाव की विश्व प्रसिद्ध जरी-जरदोजी कारीगरी को अब नई पहचान मिलने जा रही है। योगी सरकार ने उन्नाव की पारंपरिक जरी-जरदोजी कला को ODOP यानी एक जिला एक उत्पाद योजन…
उन्नाव की विश्व प्रसिद्ध जरी-जरदोजी कारीगरी को अब नई पहचान मिलने जा रही है। योगी सरकार ने उन्नाव की पारंपरिक जरी-जरदोजी कला को ODOP यानी एक जिला एक उत्पाद योजना में शामिल किया है। सरकार के इस कदम से जिले के हजारों कारीगरों को स्थानीय बाजार के साथ-साथ देश-विदेश के बाजारों से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है।
कारीगरों को आधुनिक सुविधाएं और प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के लिए मियागंज में कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC) विकसित किया गया है। इस केंद्र के जरिए जरी-जरदोजी के काम को आधुनिक तकनीक, बेहतर डिजाइन और बाजार की मांग से जोड़ने की तैयारी है।
उन्नाव जिले के मोहान, मियागंज, सफीपुर और हसनगंज क्षेत्रों में करीब 1500 परिवार पीढ़ियों से जरी-जरदोजी के काम से जुड़े हैं। इन कारीगरों के हाथों से तैयार लहंगे, साड़ियां, शेरवानी और अन्य परिधान अपनी खास कढ़ाई के लिए पहचान रखते हैं।शादी-ब्याह और विशेष अवसरों के परिधानों में जरी-जरदोजी की मांग लंबे समय से बनी हुई है। अब इस पारंपरिक हुनर को ODOP योजना के जरिए बड़े और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की तैयारी है।
एक जिला एक उत्पाद (ODOP) योजना में शामिल होने के बाद उन्नाव की जरी-जरदोजी को बाजार, ब्रांडिंग और आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने का अवसर मिलेगा।इस पहल का उद्देश्य स्थानीय कारीगरों को उनके पारंपरिक हुनर के साथ आधुनिक कारोबारी व्यवस्था से जोड़ना है, ताकि वे केवल कारीगर न रहकर उद्यमी के रूप में भी आगे बढ़ सकें।
कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए जिले में दो कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC) तैयार किए जा रहे हैं।
मियागंज का CFC सेंटर जरी-जरदोजी से जुड़े कारीगरों के लिए आधुनिक सुविधाओं का महत्वपूर्ण केंद्र बनने की उम्मीद है।
CFC सेंटर की मदद से जरी-जरदोजी के काम से जुड़े लोगों को डिजाइनिंग से लेकर पैकेजिंग तक की सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराने की योजना है।इससे उत्पादों की डिजाइन और पैकेजिंग को आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने में मदद मिलेगी। बेहतर फिनिश और आकर्षक पैकेजिंग के जरिए उन्नाव के उत्पादों को बड़े बाजार में प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिलेगा।
इस परियोजना में महिला कारीगरों और स्वयं सहायता समूहों पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। करीब 250 स्वयं सहायता समूहों की 2500 महिलाओं को प्रशिक्षण देने की योजना है।जरी-जरदोजी के काम में करीब 60 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी बताई जा रही है। ऐसे में प्रशिक्षण, बाजार और आधुनिक सुविधाओं से जुड़ाव महिलाओं के लिए रोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता के नए अवसर पैदा कर सकता है।
उन्नाव की जरी-जरदोजी को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के लिए विदेशी कंपनियों से जुड़ने की तैयारी की जा रही है। कारीगरों को सीधे ऑर्डर मिलने से उनके उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।इससे स्थानीय स्तर पर काम करने वाले कारीगरों को अपने उत्पादों की बेहतर कीमत और कारोबार बढ़ाने के अवसर मिलने की उम्मीद है।
ODOP में शामिल होने और CFC सेंटर जैसी सुविधाओं के विकास से उन्नाव की पारंपरिक जरी-जरदोजी कला को नई पहचान मिलने की उम्मीद है।करीब 1500 परिवारों की पीढ़ियों पुरानी यह कारीगरी अब आधुनिक डिजाइन, प्रशिक्षण, पैकेजिंग और बड़े बाजार से जुड़ने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इससे रोजगार बढ़ने के साथ महिला सशक्तिकरण को भी मजबूती मिल सकती है।
उन्नाव की जरी-जरदोजी अब पारंपरिक हुनर से आगे बढ़कर कारोबार और उद्यमिता की नई कहानी लिखने की तैयारी में है। ODOP और CFC सेंटर के जरिए इस कला की चमक देश ही नहीं, बल्कि विदेशी बाजारों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
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Source: Filmitics

