नगीना: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच बिजनौर जिले की नगीना विधानसभा सीट एक बार फिर चर्चा में है। 2022 के चुनाव में समाजवादी पार्टी ने यहा…
नगीना: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच बिजनौर जिले की नगीना विधानसभा सीट एक बार फिर चर्चा में है। 2022 के चुनाव में समाजवादी पार्टी ने यहां जीत दर्ज की थी, लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने भी मजबूत चुनौती पेश की थी। अब सवाल यही है कि क्या 2027 में नगीना का सियासी समीकरण बदल सकता है या समाजवादी पार्टी एक बार फिर अपनी बढ़त कायम रखने में सफल होगी?
नगीना उत्तर प्रदेश की विधानसभा सीट संख्या 18 है। 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के मनोज कुमार पारस ने 97,155 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी। उनके सामने बीजेपी के यशवंत सिंह थे, जिन्हें 70,704 वोट मिले। इस तरह दोनों उम्मीदवारों के बीच 26,451 वोटों का अंतर रहा।हालांकि, इस चुनाव की सबसे खास बात यह रही कि मुकाबला सिर्फ दो दलों तक सीमित नहीं था। बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार ब्रजपाल को करीब 40,164 वोट मिले, जबकि AIMIM की ललिता को लगभग 9,515 वोट हासिल हुए। इन आंकड़ों से साफ है कि नगीना में तीसरे दलों को मिलने वाला समर्थन भी चुनावी गणित पर असर डाल सकता है।
2027 के विधानसभा चुनाव में नगीना का मुकाबला किन उम्मीदवारों के बीच होगा, यह तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं है। ऐसे में मौजूदा चुनावी आंकड़ों के आधार पर संभावित समीकरणों का आकलन ही किया जा सकता है।नगीना की राजनीति में दलित, मुस्लिम, पिछड़ा वर्ग और अन्य सामाजिक समूहों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। लेकिन किसी एक समुदाय के समर्थन से चुनाव जीतना तय नहीं माना जा सकता। उम्मीदवार की लोकप्रियता, पार्टी का संगठन, स्थानीय मुद्दे और चुनावी माहौल भी नतीजे को प्रभावित कर सकते हैं।समाजवादी पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती 2022 में मिले समर्थन को बरकरार रखने की होगी। वहीं बीजेपी की कोशिश अपने संगठन को मजबूत करने के साथ अलग-अलग सामाजिक वर्गों में समर्थन बढ़ाने की होगी। पार्टी गैर-यादव पिछड़े, दलित और अन्य वर्गों के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने पर जोर दे सकती है।
अगर 2027 में बहुजन समाज पार्टी मजबूत उम्मीदवार के साथ मैदान में उतरती है और उसे अच्छा समर्थन मिलता है, तो मुकाबले में वोटों का बंटवारा देखने को मिल सकता है। 2022 में BSP के करीब 40 हजार वोट इस बात की ओर इशारा करते हैं कि पार्टी का प्रदर्शन नगीना के चुनावी गणित को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।इसी तरह AIMIM या कोई अन्य दल मैदान में मजबूत स्थिति बनाता है तो कुछ क्षेत्रों में वोटों का विभाजन मुकाबले को और दिलचस्प बना सकता है। हालांकि, 2027 के नतीजों को लेकर अभी किसी निश्चित निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
जातीय और सामाजिक समीकरणों के साथ रोजगार, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, किसान, बिजली-पानी और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे भी मतदाताओं के फैसले को प्रभावित कर सकते हैं। चुनाव के दौरान उम्मीदवारों की स्थानीय पकड़ और बूथ स्तर का संगठन भी बेहद महत्वपूर्ण होगा।2022 में सपा ने 26 हजार से ज्यादा वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी। अब 2027 में देखना होगा कि क्या बीजेपी इस अंतर को कम या खत्म कर पाती है, या सपा एक बार फिर नगीना में अपना प्रभाव बनाए रखती है। बसपा और अन्य दलों की भूमिका भी इस मुकाबले को त्रिकोणीय रंग दे सकती है।
यही वजह है कि नगीना की लड़ाई सिर्फ पुराने आंकड़ों की नहीं, बल्कि उम्मीदवार, संगठन, स्थानीय मुद्दों और बदलते सामाजिक समीकरणों की लड़ाई होगी। अब सबकी नजर इस बात पर है कि 2027 में नगीना अपना 2022 का फैसला दोहराता है या फिर यहां से उत्तर प्रदेश की सियासत को कोई नया संदेश मिलता है।
रश्मि सिंह एक अनुभवी पत्रकार और डिजिटल कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें हिंदी पत्रकारिता, न्यूज़ रिपोर्टिंग और डिजिटल मीडिया का व्यापक अनुभव है। उन्होंने मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है और अपने पत्रकारिता करियर में कई बड़े मीडिया संस्थानों और न्यूज़ चैनलों के साथ काम किया है।राजनीति, जनसरोकार, उत्तर प्रदेश की सियासत और समसामयिक मुद्दों पर उनकी विशेष पकड़ है। खबरों को सरल, तथ्यपरक और पाठकों के लिए रोचक अंदाज में प्रस्तुत करना उनकी लेखन शैली की खासियत है। डिजिटल पत्रकारिता के बदलते दौर में रश्मि सिंह का प्रयास है कि पाठकों तक तेज, विश्वसनीय और आसान भाषा में तथ्य आधारित खबरें पहुंचें।
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Source: Filmitics







