मछलीशहर: उत्तर प्रदेश की विधानसभा सीट नंबर 369 मछलीशहर भले ही अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो, लेकिन यहां की चुनावी राजनीति किसी भी लिहाज से आसान नहीं रही है।…
मछलीशहर: उत्तर प्रदेश की विधानसभा सीट नंबर 369 मछलीशहर भले ही अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो, लेकिन यहां की चुनावी राजनीति किसी भी लिहाज से आसान नहीं रही है। पिछले तीन विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी ने लगातार जीत दर्ज की है। हालांकि हर चुनाव में मुकाबले का अंतर अलग रहा और 2022 में भी सपा को जीत तो मिली, लेकिन बीजेपी ने मुकाबले को काफी हद तक चुनौतीपूर्ण बनाए रखा।अब 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या मछलीशहर में सपा अपना लगातार जीत का सिलसिला जारी रख पाएगी या बीजेपी इस बार चुनावी समीकरण बदलने में कामयाब होगी?
मछलीशहर में पिछले तीन विधानसभा चुनावों के नतीजे देखें तो सपा की पकड़ साफ नजर आती है। 2012 में सपा के जगदीश सोनकर ने बसपा के रामफेर गौतम को 24,425 वोटों के अंतर से हराया था।इसके बाद 2017 में मुकाबला काफी करीबी हो गया। जगदीश सोनकर ने बीजेपी की अनीता रावत को महज 4,179 वोटों से मात दी। यानी जीत बरकरार रही, लेकिन दोनों दलों के बीच अंतर काफी कम हो गया।2022 में सपा ने उम्मीदवार बदला और डॉ. रागिनी सोनकर को मैदान में उतारा। रागिनी सोनकर ने बीजेपी के मेहीलाल गौतम को 8,484 वोटों से हराकर सीट पर सपा का कब्जा बरकरार रखा।यानी तीन चुनावों में सपा की जीत जरूर हुई, लेकिन वोटों का अंतर यह भी बताता है कि मुकाबला हर बार एक जैसा नहीं रहा।
अब 2027 की कहानी में सबसे अहम मोड़ 2024 के लोकसभा चुनाव से जुड़ता है। मछलीशहर लोकसभा सीट से सपा की प्रिया सरोज ने बीजेपी के भोलानाथ को 35,850 वोटों से हराया।
यह नतीजा विधानसभा चुनाव से अलग चुनावी संदर्भ में आया था। लोकसभा और विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार, मुद्दे और मतदान का पैटर्न अलग हो सकता है। इसलिए 2024 के लोकसभा परिणाम को 2027 विधानसभा चुनाव का सीधा संकेत मानना उचित नहीं होगा। फिर भी स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को समझने के लिए यह परिणाम चर्चा का विषय जरूर बन सकता है।
मछलीशहर विधानसभा सीट SC आरक्षित है। ऐसे में अनुसूचित जाति के मतदाताओं की भूमिका चुनावी समीकरण में महत्वपूर्ण रहती है। इसके अलावा यादव, मुस्लिम और विभिन्न OBC समूहों का समर्थन भी चुनावी मुकाबले को प्रभावित कर सकता है।
बीजेपी के लिए गैर-यादव OBC, सवर्ण और अन्य सामाजिक समूहों के बीच समर्थन मजबूत करना महत्वपूर्ण हो सकता है, जबकि सपा के सामने अपने मौजूदा सामाजिक आधार को बनाए रखने के साथ-साथ व्यापक समर्थन जुटाने की चुनौती होगी। बसपा की भूमिका भी नजरअंदाज नहीं की जा सकती, क्योंकि उसके प्रदर्शन में बदलाव किसी भी करीबी मुकाबले के वोट गणित को प्रभावित कर सकता है।
2027 में सबसे बड़ा सवाल उम्मीदवारों को लेकर भी होगा। क्या सपा एक बार फिर रागिनी सोनकर पर भरोसा करेगी? क्या बीजेपी 2022 के 8,484 वोटों के अंतर को पाटने के लिए नया चेहरा या नई रणनीति सामने लाएगी? और अगर मुकाबला करीबी रहा तो बसपा का प्रदर्शन कितना महत्वपूर्ण होगा?
इसके अलावा रोजगार, सड़क, किसान, स्थानीय विकास, कानून-व्यवस्था और सरकारी योजनाओं का जमीनी असर भी मतदाताओं के रुख को प्रभावित करने वाले मुद्दे हो सकते हैं।
यानी मछलीशहर में 2027 की लड़ाई सिर्फ पार्टियों की नहीं होगी। यहां उम्मीदवार की स्थानीय पकड़, सामाजिक समीकरण, पिछले चुनावों का वोट गणित और स्थानीय मुद्दे—इन सभी की परीक्षा होगी। 2024 ने सियासी तस्वीर में एक नया आंकड़ा जरूर जोड़ दिया है, लेकिन 2027 का अंतिम चुनावी मुकाबला उम्मीदवारों और उस समय के मुद्दों पर निर्भर करेगा।
रश्मि सिंह एक अनुभवी पत्रकार और डिजिटल कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें हिंदी पत्रकारिता, न्यूज़ रिपोर्टिंग और डिजिटल मीडिया का व्यापक अनुभव है। उन्होंने मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है और अपने पत्रकारिता करियर में कई बड़े मीडिया संस्थानों और न्यूज़ चैनलों के साथ काम किया है।राजनीति, जनसरोकार, उत्तर प्रदेश की सियासत और समसामयिक मुद्दों पर उनकी विशेष पकड़ है। खबरों को सरल, तथ्यपरक और पाठकों के लिए रोचक अंदाज में प्रस्तुत करना उनकी लेखन शैली की खासियत है। डिजिटल पत्रकारिता के बदलते दौर में रश्मि सिंह का प्रयास है कि पाठकों तक तेज, विश्वसनीय और आसान भाषा में तथ्य आधारित खबरें पहुंचें।
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Source: Filmitics







