दुनिया की दो सबसे बड़ी महाशक्तियों के बीच जारी राजनीतिक और आर्थिक खिंचाव के बावजूद एक ऐतिहासिक कूटनीतिक हलचल देखने को मिली है. चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अपन…
दुनिया की दो सबसे बड़ी महाशक्तियों के बीच जारी राजनीतिक और आर्थिक खिंचाव के बावजूद एक ऐतिहासिक कूटनीतिक हलचल देखने को मिली है. चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अपनी पत्नी पेंग लियुइन के साथ अमेरिका के तीन दिनों के आधिकारिक दौरे पर हैं. इस दौरे की शुरुआत में ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पारंपरिक राजनयिक नियमों से हटकर हर किसी को हैरान कर दिया.आमतौर पर विदेशी राष्ट्राध्यक्षों का स्वागत व्हाइट हाउस में किया जाता है, लेकिन ट्रंप अपनी पत्नी मेलानिया ट्रंप के साथ खुद एंड्रयूज एयर फोर्स बेस पहुंचे और चीनी राष्ट्रपति का अगवानी में स्वागत किया. एक दशक से भी लंबे अंतराल के बाद किसी चीनी शीर्ष नेता का यह पहला अमेरिका दौरा है
इस तीन दिवसीय दौरे के तय कार्यक्रम के अनुसार, गुरुवार को व्हाइट हाउस के प्रांगण में शी जिनपिंग का औपचारिक और सैन्य सम्मान के साथ स्वागत किया जाएगा. इसके तुरंत बाद दोनों राष्ट्र प्रमुखों के बीच एक बंद कमरे में उच्चस्तरीय बैठक होगी, जिसमें द्विपक्षीय व्यापार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के नियमन, ताइवान के मुद्दे और मध्य पूर्व में जारी तनाव जैसे ज्वलंत विषयों पर आमने-सामने बातचीत की उम्मीद है. शुक्रवार को दोनों नेता नेशनल आर्काइव्स का दौरा करेंगे. इस यात्रा का एक मुख्य आकर्षण व्हाइट हाउस में आयोजित होने वाला भव्य ‘स्टेट डिनर’ है, जिसमें सिलिकॉन वैली और वैश्विक व्यापार जगत की कई बड़ी हस्तियों को आमंत्रित किया गया है. राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार, इस भोज में एनवीडिया के जेन्सेन हुआंग और स्पेसएक्स के एलन मस्क जैसे दिग्गज शामिल होंगे
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एयर बेस पर चीनी प्रतिनिधिमंडल की अगवानी के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने इस मुलाकात को अमेरिका के बढ़ते वैश्विक प्रभाव से जोड़ा. उन्होंने स्पष्ट किया कि वे वार्ता के दौरान ईरान समेत कई वैश्विक सुरक्षा चिंताओं पर खुलकर बात करेंगे. ट्रंप ने अमेरिका की मजबूत होती स्थिति का दावा करते हुए कहा कि आज उनका देश दुनिया भर में सबसे अधिक सम्मानित राष्ट्र के रूप में उभर चुका है. इसके साथ ही उन्होंने अपनी चिरपरिचित शैली में नए बने हेलीपैड का जिक्र करते हुए कहा कि वे चीनी राष्ट्रपति को अमेरिकी इंफ्रास्ट्रक्चर की खूबसूरती से प्रभावित करना चाहते थे. प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप ने भी इस भव्य स्वागत का समर्थन करते हुए इसे दो बड़े देशों के बीच की औपचारिक कूटनीति का हिस्सा बताया
हालांकि, शी जिनपिंग का यह भव्य स्वागत अमेरिकी राजनीति में हर किसी को रास नहीं आ रहा है और ट्रंप प्रशासन को अपने ही देश में तीखी आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है. सीनेट की सशस्त्र सेवा समिति के अध्यक्ष रोजर विकर जैसे शीर्ष नेताओं ने इस दौरे की टाइमिंग और भव्यता पर गंभीर सवाल उठाए हैं. विपक्षी और आलोचक नेताओं का मानना है कि चीन द्वारा किए जा रहे सैन्य विस्तार और ईरान को मिल रहे उसके परोक्ष समर्थन को देखते हुए इस तरह के रेड-कार्पेट स्वागत से बचना चाहिए था. इन आलोचनाओं के जवाब में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सरकार के फैसले का बचाव किया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि चूंकि दोनों देश दुनिया के सबसे बड़े आर्थिक और सैन्य केंद्र हैं, इसलिए वैश्विक स्थिरता बनाए रखने के लिए शीर्ष स्तर पर बातचीत के रास्ते खुले रखना बेहद अनिवार्य है
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Source: NewsNationTV







