Pitru Paksha 2026: आज यानी 28 सितंबर 2026 को पितृ पक्ष का द्वितीया श्राद्ध है. पितृ पक्ष में लोग अपने पूर्वजों का तर्पण और पिंडदान कर्म करते हैं. ऐसा करने से प…
Pitru Paksha 2026: आज यानी 28 सितंबर 2026 को पितृ पक्ष का द्वितीया श्राद्ध है. पितृ पक्ष में लोग अपने पूर्वजों का तर्पण और पिंडदान कर्म करते हैं. ऐसा करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और आशीर्वाद मिलता है. पिंडदान जैसे धार्मिक कार्यों को करना हिंदू धर्म में अत्यंत खास माना जाता है. पंचांग के अनुसार, पितृ पक्ष की शुरुआत 26 सितंबर से हो चुकी है और इसका समापन 10 अक्टूबर को हो रहा है. इस दिन सर्वपितृ अमावस्या मनाई जाएगी. पितृपक्ष में दिवंगत परिवार के सदस्यों के लिए तर्पण करने के साथ-साथ हमें दान भी करना चाहिए. मगर कुछ चीजों का दान बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से पितृ नाराज हो सकते हैं
धार्मिक मान्यता है कि इस दौरान जरूरतमंदों, ब्राह्मणों और योग्य लोगों को अपने सामर्थ्यनुसार भोजन, वस्त्र और उपयोगी चीजों का दान करना चाहिए. हालांकि, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हर वस्तु का दान इस दौरान करना उचित नहीं माना जाता है. कुछ चीजों को पितृ पक्ष के दौरान दान करने से बचने की सलाह भी दी जाती है. आइए जानते हैं इन चीजों के बारे में
पितृ पक्ष में हमें किसी भी जरूरतमंद या ब्राह्मण को कभी भी बासी, झूठा या खराब भोजन का दान नहीं करना चाहिए. श्राद्ध में खिलाया जाने वाला भोजन हमेशा ताजा और सात्विक होना चाहिए. बासी भोजन परोसने से पितृ दोष लग सकता है और जीवन में परेशानियां बढ़ सकती है. मान्यता है कि श्राद्ध भोजन में ऐसी चीजों को शामिल करना चाहिए, जो दिवंगत को पसंद हों
लोहे की वस्तुओं तथा बर्तनों का दान करना भी अशुभ माना जाता है. इनका दान करने से शनि का प्रभाव भी बढ़ता है. इस वजह से घर में अशांति फैल सकती है और पितृ दोष लग सकता है
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष में हमें जूते-चप्पलों का भी दान नहीं करना चाहिए. इन चीजों का दान करने से राहु का प्रभाव बढ़ता है. ये घर में अशांति का कारण भी बनता है. इन चीजों का दान करने से पितृ दोष लग सकता है. दरअसल, यह समय उत्सव, सजने-संवरने या उपभोग का नहीं बल्कि सादगी, शोक और पूर्वजों के प्रति सम्मान प्रकट करने का होता है. इसलिए, इन चीजों का दान निषेध है
पितृ पक्ष श्राद्ध में हमें हमेशा दान में साफ-सुथरे और नए वस्त्र ही देने चाहिए. फटे या पुराने कपड़ों का दान करने से पुण्य की प्राप्ति नहीं होती है. धार्मिक मान्यता है कि पितृ पक्ष में पूर्वजों की संतुष्टि और पुण्य प्राप्ति के लिए जरूरतमंदों को नए वस्त्रों का दान करना चाहिए. ऐसा माना जाता है कि अनुपयोगी और गंदे वस्त्र का दान नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है. शास्त्रों में कहा जाता है कि जो वस्तुएं स्वयं के उपयोग के काबिल न हो तो दान में उन्हें देना किसी भी प्रकार से सही नहीं होता है
बता दें कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, झाड़ू माता लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है. धनतेरस और दीपावली के शुभ अवसर पर इन्हें खरीदना शुभ माना जाता है. मगर पितृ पक्ष में झाड़ू का दान करना आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है. हालांकि, सनातन धर्म में झाड़ू का दान कभी भी नहीं करने का नियम है. मान्यता है कि इसका दान करने से घर की सुख-समृद्धि और लक्ष्मी दूसरे के पास जा सकती है
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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Source: NewsNation TV







