3…
3
बिहार में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सम्राट कैबिनेट ने 30 सितंबर को हुई बैठक में 30 वाटर कैनन और 86 वज्र वाहनों की खरीद को मंजूरी दी है, इस खरीद पर कुल 62.52 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, सरकार के इस फैसले का उद्देश्य प्रदर्शनों, आंदोलनों, दंगों और अन्य आपात स्थितियों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस की क्षमता बढ़ाना है हालांकि, इस निर्णय को लेकर छात्र संगठनों और कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं, जबकि बीजेपी ने इसे आम लोगों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बताया है।
बिहार सरकार के इस फैसले के तहत पुलिस बल को 30 वाटर कैनन और 86 वज्र वाहन उपलब्ध कराए जाएंगे, इनका इस्तेमाल भीड़ नियंत्रण, विरोध प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने और संवेदनशील परिस्थितियों से निपटने में किया जा सकेगा, इसके अलावा, त्योहारों, मेलों और अन्य बड़े आयोजनों के दौरान भी इन वाहनों की मदद ली जा सकती है, प्रदेश में विभिन्न मांगों को लेकर छात्र संगठनों और अन्य समूहों की ओर से प्रदर्शन किए जाते रहे हैं, ऐसे आयोजनों में कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण चुनौती होती है, सरकार के इस निर्णय को इसी दिशा में पुलिस की तैयारियों को मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
– यूपीआईटीएस-2026 ने दुनिया के सामने रखी उत्तर प्रदेश की नई आर्थिक तस्वीर
कैबिनेट के फैसले के बाद बिहार के छात्र संगठनों ने विरोध जताया है, बिहार स्टूडेंट यूनियन (BSU) के अध्यक्ष दिलीप कुमार ने आरोप लगाया कि सरकार छात्र आंदोलनों को नियंत्रित करने और उनकी आवाज दबाने के लिए इतनी बड़ी राशि खर्च कर रही है, दिलीप कुमार ने कहा कि सरकार को आंदोलनकारियों की मांगों पर बातचीत करनी चाहिए और उनकी जायज समस्याओं का समाधान निकालना चाहिए, उन्होंने भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं को रोकने की जरूरत पर भी जोर दिया। उनके मुताबिक, वाहनों की खरीद से छात्र आंदोलन समाप्त नहीं होंगे।
ऑल बिहार स्टूडेंट यूनियन (ABSU) के अध्यक्ष सौरव कुमार ने भी इस फैसले की आलोचना की, उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्र-युवाओं के आंदोलनों को दबाना चाहती है, सौरव कुमार के अनुसार, सरकार को प्रदर्शनकारियों को डराने के बजाय उनकी समस्याओं को सुनना चाहिए और बातचीत के जरिए समाधान निकालना चाहिए, उन्होंने भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को रोकने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग भी उठाई।
– सीएम योगी आज 87 इंटरसेप्टर वाहनों को दिखाएंगे हरी झंडी
बिहार कांग्रेस के प्रवक्ता असित नाथ तिवारी ने भी इस फैसले पर सवाल उठाए, उन्होंने कहा कि सरकार को जनता के सवालों और विरोध प्रदर्शनों का सामना लोकतांत्रिक तरीके से करना चाहिए उनके मुताबिक, जनता की समस्याओं को दूर करना और उठ रहे सवालों का जवाब देना सरकार की जिम्मेदारी है, कांग्रेस की ओर से की गई इस आलोचना के केंद्र में सरकार की कानून-व्यवस्था संबंधी प्राथमिकताएं और विरोध प्रदर्शनों के प्रति उसका रवैया रहा, दूसरी ओर, बिहार बीजेपी के प्रवक्ता नीरज कुमार ने सरकार के फैसले का स्वागत किया, उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन करना सभी का अधिकार है, लेकिन इसके नाम पर तोड़फोड़, हिंसा और आगजनी को स्वीकार नहीं किया जा सकता, नीरज कुमार के मुताबिक, वाटर कैनन और वज्र वाहनों की खरीद केवल प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इनका इस्तेमाल अन्य आपात परिस्थितियों में आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए भी किया जा सकता है, उन्होंने विपक्ष की आलोचना को अनुचित बताते हुए इस कदम को सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की पहल करार दिया।
बिहार कैबिनेट के इस फैसले ने कानून-व्यवस्था और लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार को लेकर बहस तेज कर दी है, सरकार की ओर से वाहनों की खरीद को पुलिस की तैयारियों और सार्वजनिक सुरक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है, जबकि छात्र संगठनों और कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि सरकार को आंदोलनों के पीछे मौजूद समस्याओं के समाधान पर भी ध्यान देना चाहिए, अब इस फैसले के क्रियान्वयन और नए वाहनों के इस्तेमाल पर नजर रहेगी साथ ही, यह भी महत्वपूर्ण होगा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा किस तरह सुनिश्चित की जाती है।
Forgot your password? Get help
div
Source: Filmitics







