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दिल्ली में एक बार फिर भीषण प्रदर्शनहो रहा हैं… हजारों लोग दिल्ली में एकत्रित हैं, पुलिस चप्पे चप्पे पर सुरक्षा को बढ़ा दी है जी हां जंतर-मंतर पर आज जो ड्रामा चल रहा है, उसे देखकर दिल्ली की जनता त्रस्त है और देश का आम नागरिक हैरान है। जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के नाम पर पूरी दिल्ली को बंधक बना लिया गया है। आम जनता परेशान है, 11 मेट्रो स्टेशनों को सुरक्षा के नाम पर बंद करना पड़ा है। लेकिन यहाँ सबसे बड़ा सवाल दिल्ली पुलिस की कार्रवाई और इस दोहरे मापदंड पर उठ रहा है।
जनता सोशल मीडिया पर पूछ रही है कि आखिर इन प्रदर्शनकारियों पर इतनी मेहरबानी क्यों? लोगों को याद है वो दिन, जब इसी दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपनी मांगों को लेकर सवर्ण समाज, यानी ब्राह्मण और ठाकुर समाज के लोग शांतिपूर्ण आंदोलन करने पहुंचे थे। सूत्रों और मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, तब दिल्ली पुलिस ने उन्हें प्रदर्शन की अनुमति तो दूर, कुछ ही घंटों के भीतर भारी पुलिस बल का प्रयोग करके, लाठियां भांजकर वहां से खदेड़ दिया था। कानून का डंडा तब इतनी तेजी से चला था कि कुछ ही देर में पूरा मैदान खाली करा लिया गया था।” लेकिन आज कानून-व्यवस्था के पैमानों को क्या हो गया है? जब पुलिस ने आज के प्रदर्शन की भी लिखित अनुमति नहीं दी है, पूरे नई दिल्ली में धारा 163 लागू है, तो फिर इन प्रदर्शनकारियों को अब तक वहां से पूरी तरह हटाया क्यों नहीं जा सका है? क्यों पुलिस अभी भी केवल बैरिकेड लगाकर खड़ी है?”सोशल मीडिया और विभिन्न आलोचकों द्वारा यह दावा भी किया जा रहा है कि इस भीड़ में कई ऐसे तत्व शामिल हैं जिनका पुराना ट्रैक रिकॉर्ड बेहद विवादित रहा है। दावों के अनुसार, यह वही चेहरा हैं जिन पर पहले भारत विरोधी नारे लगाने, देश के प्रधानमंत्री की माता जी के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने और कथित तौर पर देश को बांग्लादेश या नेपाल जैसे हालातों में झोंकने की बातें कहने के गंभीर आरोप लगे हैं। इतना ही नहीं, सोशल मीडिया पर लोग यह भी आरोप लगा रहे हैं कि पूर्व में सवर्ण समाज, विशेषकर ब्राह्मणों और ठाकुरों के खिलाफ भी अभद्र टिप्पणियां इन्हीं के मंचों से सुनी गई थीं।”ऐसे में जनता का यह सवाल उठाना बिल्कुल जायज है कि जो कानून सवर्ण समाज के प्रदर्शनकारियों पर चंद घंटों में लागू हो गया था, वो इन विवादित पृष्ठभूमि वाले प्रदर्शनकारियों पर इतनी नरमी से क्यों लागू हो रहा है? क्या दिल्ली की कानून-व्यवस्था केवल आम और सीधे नागरिकों के लिए है, या फिर सड़कों पर हुड़दंग मचाने वालों के आगे व्यवस्था सचमुच बेबस हो चुकी है? इस पूरे मामले पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट सेक्शन में जरूर बताएं। देखते रहिए…”
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Source: Filmitics





