राजधानी लखनऊ में अखिल विश्व गायत्री परिवार के शताब्दी वर्ष के तहत प्रांतीय शिक्षक गरिमा कार्यशाला का आयोजन किया गया। राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्य…
राजधानी लखनऊ में अखिल विश्व गायत्री परिवार के शताब्दी वर्ष के तहत प्रांतीय शिक्षक गरिमा कार्यशाला का आयोजन किया गया। राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शामिल हुए। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यशाला का शुभारंभ किया और भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा में प्रदेश के टॉप-10 विद्यालयों को सम्मानित किया। कार्यक्रम में शिक्षकों की भूमिका, नई पीढ़ी में संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे विषयों पर चर्चा हुई।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज का युवा भारत का भाग्य विधाता बनने वाला है। हमें बिखरा हुआ और जातीय खेमों में लड़ता भारत नहीं चाहिए, बल्कि ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के निर्माण के लिए काम करना है।
उन्होंने कहा कि जाति, क्षेत्र और भाषा के नाम पर समाज को बांटने वाली प्रवृत्तियों से सावधान रहने की जरूरत है और शिक्षकों की जिम्मेदारी है कि वे नई पीढ़ी को एकता और सामाजिक समरसता का संदेश दें।सीएम योगी ने कहा कि शिक्षक केवल विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम पढ़ाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे समाज की चेतना और नई पीढ़ी के चरित्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिक्षक अगर जागरूक होकर अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करें तो भारत को विश्वगुरु बनने में देर नहीं लगेगी। उन्होंने तक्षशिला, नालंदा और भारत की गुरु-शिष्य परंपरा का उल्लेख करते हुए शिक्षकों से संस्कार और मूल्यों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री ने अखिल विश्व गायत्री परिवार के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि 1926 में स्थापित इस संस्था ने यज्ञ और सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से समाज को जोड़ने का काम किया। उन्होंने 1923 में गीताप्रेस, 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और 1926 में गायत्री परिवार की स्थापना का जिक्र करते हुए कहा कि अलग-अलग रास्तों के बावजूद इन संस्थाओं ने भारतीय समाज में जनचेतना और सनातन मूल्यों को मजबूत करने का काम किया।सीएम योगी ने कहा कि पहले संयुक्त परिवार समाज की बड़ी ताकत हुआ करते थे। संसाधन सीमित होने के बावजूद परिवार के लोग संकट का सामना मिलकर करते थे, लेकिन आज परिवारों में बिखराव बढ़ रहा है। ऐसे समय में सामाजिक और पारिवारिक एकता को मजबूत करने के लिए संस्थाओं की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है।
उन्होंने गायत्री परिवार से समाज में बढ़ते बिखराव को रोकने और नई पीढ़ी को भारतीय मूल्यों से जोड़ने की दिशा में काम करने की अपील की।मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा से 11 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं का जुड़ना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि युवाओं को सही दिशा और संस्कार मिलें तो यही पीढ़ी भारत के भविष्य को मजबूत करेगी। कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के प्रदेश के शीर्ष-10 विद्यालयों को सम्मानित किया गया।मुख्यमंत्री ने पर्यावरण और नदियों के संरक्षण का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में 2017 से 2026 तक 275 करोड़ पौधे लगाए गए हैं और इस वर्ष 35 करोड़ पौधरोपण किया गया है। नदियों को मानव शरीर की धमनियों के समान बताते हुए उन्होंने कहा कि जीवनदायिनी नदियों को बचाना और उन्हें अविरल-निर्मल रखना जरूरी है।उन्होंने कहा कि 2047 के भारत के लिए गुलामी की मानसिकता से मुक्ति, अपनी विरासत पर गर्व, सामाजिक समता, विकसित भारत और नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता जरूरी है। हर नागरिक अगर अपने कर्तव्य के प्रति ईमानदार हो जाए तो भारत दुनिया का नेतृत्व करने की क्षमता रखता है।
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Source: Filmitics







