उत्तर प्रदेश की योगी सरकार शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और समावेशी बनाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को बेहतर शिक…
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और समावेशी बनाने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को बेहतर शिक्षा और उनकी जरूरतों के अनुरूप सहयोग उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई प्रशस्त 2.0 पहल को प्रदेश में व्यापक स्तर पर अपनाया जा रहा है। इस डिजिटल पहल से अब तक 9.20 लाख से अधिक शिक्षक जुड़ चुके हैं, जबकि 8.15 लाख से अधिक शिक्षकों ने प्रशिक्षण से जुड़े सभी वीडियो देख लिए हैं। प्रदेश के सभी 75 जिलों में संचालित यह पहल शिक्षकों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के साथ-साथ बच्चों की विशेष शैक्षिक जरूरतों के प्रति संवेदनशील बनाने पर केंद्रित है।योगी सरकार का उद्देश्य ऐसी शिक्षा व्यवस्था विकसित करना है, जिसमें कोई भी बच्चा अपनी शारीरिक, मानसिक या अन्य विशेष आवश्यकताओं के कारण शिक्षा के अवसरों से वंचित न रह जाए। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए प्रशस्त 2.0 के माध्यम से शिक्षकों को डिजिटल प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे विद्यालयों में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की समय रहते पहचान कर सकें और उनकी जरूरतों के अनुसार शैक्षिक सहयोग प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें।
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में कुल 16 लाख 29 हजार 945 शिक्षकों में से 9 लाख 20 हजार 169 शिक्षक प्रशस्त 2.0 प्लेटफॉर्म पर ऑनबोर्ड हो चुके हैं। इनमें से 8 लाख 15 हजार 309 शिक्षकों ने प्रशिक्षण से संबंधित सभी वीडियो देख लिए हैं। इस तरह प्रदेश के कुल शिक्षकों में से 56.5 प्रतिशत डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ चुके हैं, जबकि लगभग 50 प्रतिशत शिक्षक सभी प्रशिक्षण वीडियो देख चुके हैं। ये आंकड़े प्रदेश में डिजिटल माध्यम से शिक्षक प्रशिक्षण के विस्तार को दर्शाते हैं।प्रशस्त 2.0 के क्रियान्वयन में कई जिलों ने बेहतर प्रदर्शन किया है। रामपुर 90.5 प्रतिशत शिक्षकों की ऑनबोर्डिंग के साथ प्रमुख जिलों में शामिल है। वहीं, पीलीभीत में 88.7 प्रतिशत और लखीमपुर खीरी में 86.3 प्रतिशत शिक्षक इस डिजिटल पहल से जुड़ चुके हैं।
प्रशिक्षण से जुड़े सभी वीडियो देखने के मामले में भी रामपुर ने 88.3 प्रतिशत के साथ बेहतर प्रदर्शन किया है। पीलीभीत में 84.6 प्रतिशत और लखीमपुर खीरी में 82.5 प्रतिशत शिक्षकों ने सभी प्रशिक्षण वीडियो देख लिए हैं।सरकार का विशेष जोर इस बात पर है कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने तक सीमित न रहें, बल्कि कक्षा में पढ़ने वाले प्रत्येक बच्चे की क्षमता, व्यवहार और सीखने की जरूरतों को भी समझें। प्रशस्त 2.0 के माध्यम से शिक्षकों को विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान, उनकी शैक्षिक चुनौतियों और आवश्यक सहयोग से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। इससे शिक्षकों को ऐसे बच्चों के लिए अधिक अनुकूल और सहयोगात्मक शिक्षण वातावरण विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।विशेषज्ञों के अनुसार, समावेशी शिक्षा की सफलता में शिक्षकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। विद्यालय में शिक्षक ही बच्चों के साथ सबसे अधिक समय बिताते हैं और उनकी सीखने की प्रक्रिया को करीब से समझते हैं। ऐसे में यदि शिक्षक विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की जरूरतों के प्रति जागरूक और प्रशिक्षित हों, तो बच्चों को बेहतर शैक्षिक अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
प्रशस्त 2.0 की एक महत्वपूर्ण विशेषता इसका डिजिटल स्वरूप है। इसके माध्यम से प्रदेश के अलग-अलग जिलों में कार्यरत शिक्षकों तक प्रशिक्षण सामग्री पहुंचाई जा रही है। एप और प्रशिक्षण वीडियो के जरिए शिक्षक अपनी सुविधा के अनुसार समावेशी शिक्षा से संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इससे बड़े स्तर पर शिक्षकों को एक समान प्रशिक्षण सामग्री उपलब्ध कराने में भी मदद मिल रही है।प्रदेश सरकार का मानना है कि शिक्षा की गुणवत्ता केवल आधुनिक संसाधनों और बेहतर बुनियादी सुविधाओं से ही नहीं, बल्कि शिक्षकों की दक्षता और संवेदनशीलता से भी तय होती है। इसी कारण डिजिटल प्रशिक्षण के माध्यम से शिक्षकों की क्षमता विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रशस्त 2.0 को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि योगी सरकार समावेशी शिक्षा को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रशस्त 2.0 के माध्यम से शिक्षकों की क्षमता विकसित कर प्रत्येक बच्चे की शैक्षिक आवश्यकताओं के अनुरूप सहयोग सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है। वहीं, स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी ने बताया कि प्रशस्त 2.0 के अंतर्गत शिक्षकों को डिजिटल प्रशिक्षण से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान करने और उनकी शैक्षिक जरूरतों के अनुरूप सहयोग प्रदान करने के लिए सक्षम बनाना है।कुल मिलाकर, प्रशस्त 2.0 के जरिए उत्तर प्रदेश में समावेशी शिक्षा को मजबूत आधार देने की कोशिश की जा रही है। लाखों शिक्षकों की डिजिटल सहभागिता इस पहल के बढ़ते दायरे को दर्शाती है। हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि प्रशिक्षण से प्राप्त जानकारी को विद्यालयों में बच्चों की जरूरतों के अनुसार कितनी प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है। सरकार का लक्ष्य तकनीक, शिक्षक प्रशिक्षण और संवेदनशील दृष्टिकोण के जरिए ऐसी शिक्षा व्यवस्था विकसित करना है, जिसमें हर बच्चे को सीखने और आगे बढ़ने का समान अवसर मिल सके।
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Source: Filmitics







