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लखनऊ

केजीएमयू के माइक्रोबायोलॉजी विभाग द्वारा विशेष संचारी रोग नियंत्रण एवं जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

August 2, 2026 · Ashish Bajpai · 1 मिनट पढ़ें

लखनऊ: 01 अगस्त, 2026

किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू), लखनऊ के माइक्रोबायोलॉजी विभाग द्वारा उत्तर प्रदेश शासन के विशेष संचारी रोग नियंत्रण एवं दस्तक अभियान के अंतर्गत “मानसून सुरक्षा आपकी जिम्मेदारी – संचारी रोगों से बचाव हमारी प्राथमिकता” विषय पर एक विशेष जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य मानसून के दौरान होने वाले संचारी रोगों की रोकथाम एवं नियंत्रण के प्रति जनसामान्य में जागरूकता बढ़ाना था।
कार्यक्रम का शुभारम्भ माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. विमला वेंकटेश द्वारा किया गया। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि संचारी रोगों की रोकथाम में सामुदायिक सहभागिता सबसे महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने एक महत्वपूर्ण तथ्य साझा करते हुए बताया कि डेंगू फैलाने वाला एडीज़ मच्छर गंदे नहीं, बल्कि स्वच्छ रुके हुए पानी में पनपता है, जबकि अधिकांश लोग इसके विपरीत मानते हैं। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे प्रत्येक सप्ताह अपने घरों एवं आसपास कूलर, गमलों, बाल्टियों, ओवरहेड टैंकों, पुराने टायरों तथा अन्य जल-संग्रहण स्थलों की नियमित जाँच कर जमा पानी को हटाएँ। उन्होंने कहा कि “सप्ताह में केवल दस मिनट का निरीक्षण मच्छरों के प्रजनन को काफी हद तक रोक सकता है और पूरे परिवार को डेंगू जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षित रख सकता है।”
कार्यक्रम में विभाग के एम.डी. रेज़िडेंट्स द्वारा संचारी रोगों की रोकथाम एवं नियंत्रण विषय पर पोस्टर प्रस्तुति दी गई। इसके उपरांत हाथों की सही स्वच्छता, ओआरएस (व्त्ै) बनाने की विधि, मच्छरों के प्रजनन स्थलों की रोकथाम तथा मच्छररोधी उपायों के सही उपयोग का लाइव प्रदर्शन किया गया। साथ ही इंटरएक्टिव क्विज़, “मिथक बनाम तथ्य” सत्र तथा विशेषज्ञ परिचर्चा के माध्यम से संचारी रोगों से संबंधित भ्रांतियों का निराकरण किया गया तथा प्रतिभागियों को वैज्ञानिक तथ्यों से अवगत कराया गया।
विशेषज्ञ परिचर्चा के दौरान मानसून में होने वाले सामान्य संक्रमणों की शीघ्र पहचान, समय पर चिकित्सकीय परामर्श, एंटीबायोटिक दवाओं के विवेकपूर्ण उपयोग, एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस तथा परिवार एवं समुदाय स्तर पर अपनाए जाने वाले सरल निवारक उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई।
समापन संबोधन में डॉ. शीतल वर्मा, अतिरिक्त प्रोफेसर, माइक्रोबायोलॉजी विभाग ने कहा कि मानसून के दौरान बुखार के पहले 24 घंटे अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। उन्होंने आमजन से अपील की कि लगातार रहने वाले बुखार को नज़रअंदाज़ न करें तथा स्वयं दवा लेने से बचें। उन्होंने पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेने, अनावश्यक एंटीबायोटिक के प्रयोग से बचने तथा समय पर चिकित्सकीय जाँच कराने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि समय पर जाँच से डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड, लेप्टोस्पायरोसिस तथा वायरल संक्रमणों के बीच सही पहचान संभव होती है, जिससे उचित उपचार समय पर शुरू किया जा सकता है और गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।
कार्यक्रम में प्रो. आर. के. कल्याण, प्रो. प्रशांत गुप्ता, डॉ. पारुल जैन, डॉ. सुरुचि शुक्ला, डॉ. वसुधा केसरवानी, डॉ. सर्वाेदय त्रिपाठी सहित विभाग के संकाय सदस्य, रेज़िडेंट डॉक्टर, छात्र-छात्राएँ, वैज्ञानिक, शोधार्थी एवं कर्मचारीगण उपस्थित रहे। सभी प्रतिभागियों की सक्रिय सहभागिता से कार्यक्रम सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम के अंत में माइक्रोबायोलॉजी विभाग ने आमजन से अपील की कि वे मानसून के दौरान घर एवं आसपास जमा पानी को हटाने, हाथों की स्वच्छता बनाए रखने, सुरक्षित भोजन एवं स्वच्छ पेयजल का उपयोग करने, स्वयं दवा लेने से बचने तथा बुखार एवं अन्य चेतावनी लक्षणों की स्थिति में समय पर चिकित्सकीय परामर्श लेने जैसी सरल लेकिन प्रभावी आदतों को अपनाएँ।
कार्यक्रम का समापन एक स्वस्थ, सुरक्षित एवं जागरूक समाज के निर्माण हेतु सामूहिक संकल्प के साथ हुआ। “मानसून सुरक्षा आपकी जिम्मेदारी – संचारी रोगों से बचाव हमारी प्राथमिकता।”

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