पश्चिमी एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका के बीच सोमवार को घरेलू शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ। बाजार मे…
पश्चिमी एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका के बीच सोमवार को घरेलू शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ। बाजार में बिकवाली का दबाव खासतौर पर यूटिलिटीज, आईटी और एफएमसीजी शेयरों पर देखने को मिला।
निवेशकों की धारणा कमजोर रहने और विदेशी फंड की निकासी के बीच बीएसई सेंसेक्स 307.24 अंक गिरकर 76,957.27 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 95.25 अंक की गिरावट के साथ 24,080.40 पर बंद हुआ।
सोमवार के कारोबार में सेंसेक्स शुरुआत से ही दबाव में रहा। दिनभर के कारोबार के दौरान सेंसेक्स 513.19 अंक तक गिरकर 76,751.32 के निचले स्तर पर पहुंच गया।
हालांकि, कारोबार के अंतिम चरण में कुछ सुधार देखने को मिला और सेंसेक्स 307.24 अंक की गिरावट के साथ 76,957.27 पर बंद हुआ।
इसी तरह निफ्टी भी दबाव में रहा और कारोबार के अंत में 95.25 अंक टूटकर 24,080.40 पर बंद हुआ।
बाजार में गिरावट की प्रमुख वजहों में पश्चिमी एशिया में बढ़ता तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी को माना जा रहा है। वैश्विक तेल बाजार में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ सकती हैं, जिसका असर महंगाई और ब्याज दरों की संभावनाओं पर पड़ सकता है।
ब्रेंट क्रूड की कीमत 3.63 प्रतिशत बढ़कर 91.30 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई। कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी भारतीय अर्थव्यवस्था और कंपनियों की लागत पर भी दबाव डाल सकती है।
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, घरेलू शेयर बाजार में कमजोरी और विदेशी फंड की निकासी ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है।
वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ने के बीच निवेशक जोखिम वाली परिसंपत्तियों में सतर्क रुख अपना रहे हैं। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की आशंका ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया।
सेंसेक्स में शामिल कंपनियों में अदानी पोर्ट्स के शेयर में सबसे अधिक 4.11 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
इसके अलावा एचडीएफसी बैंक, आईटीसी, भारती एयरटेल, इंफोसिस, कोटक महिंद्रा बैंक, ट्रेंट, हिंदुस्तान यूनिलीवर और टाइटन के शेयर भी गिरावट के साथ बंद हुए।
आईटी और एफएमसीजी समेत कई प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली का दबाव देखने को मिला।
बाजार की अगली दिशा काफी हद तक वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेश के प्रवाह और ब्याज दरों से जुड़े संकेतों पर निर्भर करेगी।
पश्चिमी एशिया में तनाव यदि आगे भी बढ़ता है और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी रहती है, तो इससे भारतीय शेयर बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। ऐसे माहौल में निवेशकों की नजर वैश्विक बाजारों के रुख और घरेलू आर्थिक आंकड़ों पर रहेगी।
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Source: Filmitics

