Kanpur Sisamau Election 2027: उत्तर प्रदेश की राजनीति में कानपुर की सीसामऊ विधानसभा सीट नंबर 213 एक बार फिर सुर्खियों में है। 2027 के विधानसभा चुनाव में यहां म…
Kanpur Sisamau Election 2027: उत्तर प्रदेश की राजनीति में कानपुर की सीसामऊ विधानसभा सीट नंबर 213 एक बार फिर सुर्खियों में है। 2027 के विधानसभा चुनाव में यहां मुकाबला सिर्फ दो राजनीतिक दलों के बीच नहीं, बल्कि समाजवादी पार्टी के मजबूत गढ़ और भारतीय जनता पार्टी की लगातार बढ़ती चुनौती के बीच माना जा रहा है। सपा जहां अपने पुराने किले को बचाने की कोशिश करेगी, वहीं बीजेपी की नजर इस सीट के ऐसे सामाजिक समीकरण पर है, जिसके जरिए वह पहली बार यहां बड़ा उलटफेर करने की कोशिश कर सकती है।
सीसामऊ विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं को लंबे समय से चुनावी समीकरण का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता रहा है। अलग-अलग राजनीतिक अनुमानों में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या करीब 72 से 80 हजार के बीच बताई जाती है। यही वोट बैंक समाजवादी पार्टी की बड़ी ताकत माना जाता है।
हालांकि, सीसामऊ का चुनावी गणित सिर्फ मुस्लिम मतदाताओं तक सीमित नहीं है। ब्राह्मण, दलित, कायस्थ, वैश्य, यादव, कुर्मी और पाल समुदाय के मतदाता भी चुनावी नतीजे पर महत्वपूर्ण असर डाल सकते हैं। यही वजह है कि 2027 से पहले दोनों प्रमुख दल इन वर्गों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में जुट सकते हैं।
सीसामऊ में 2024 का उपचुनाव मुकाबले को और दिलचस्प बना चुका है। इस चुनाव में समाजवादी पार्टी की नसीम सोलंकी ने बीजेपी के सुरेश अवस्थी को 8,564 वोटों के अंतर से हराया था। इससे पहले 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा की जीत का अंतर 12,266 वोट था।यानी आंकड़ों पर नजर डालें तो सपा ने सीट जरूर बचाई, लेकिन बीजेपी ने मुकाबले को काफी हद तक करीबी बना दिया। यही वजह है कि 2027 के चुनाव को लेकर बीजेपी के भीतर उम्मीद बढ़ी है।
2027 में बीजेपी की रणनीति सिर्फ अपने पारंपरिक सवर्ण वोट बैंक तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। पार्टी की नजर ब्राह्मण, वैश्य और कायस्थ वोटरों के साथ दलित तथा गैर-यादव ओबीसी मतदाताओं पर भी हो सकती है।बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चुनौती इन वर्गों को एक साथ साधने की होगी। बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करना, स्थानीय मुद्दों को उठाना और मतदाताओं के बीच लगातार संपर्क बनाए रखना पार्टी की रणनीति का अहम हिस्सा हो सकता है।
दूसरी तरफ सपा के सामने अपने मजबूत मुस्लिम वोट बैंक को बरकरार रखने के साथ-साथ दलित, पिछड़े और अन्य सामाजिक समूहों को भी अपने साथ जोड़े रखने की चुनौती होगी।
सीसामऊ में सपा की ओर से सोलंकी परिवार का राजनीतिक प्रभाव अहम माना जाता है। वहीं बीजेपी में सुरेश अवस्थी के अलावा अनूप अवस्थी और राकेश सोनकर जैसे स्थानीय नेताओं के नाम संभावित दावेदारों के तौर पर चर्चा में हैं। हालांकि, 2027 के लिए अंतिम उम्मीदवारों का फैसला राजनीतिक दलों की ओर से किया जाना बाकी है।इसलिए इस बार मुकाबला सिर्फ उम्मीदवारों के बीच नहीं होगा। संगठन, बूथ मैनेजमेंट, सामाजिक समीकरण और स्थानीय मुद्दे चुनावी नतीजे तय करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
सीसामऊ में सपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने पारंपरिक गढ़ को बचाए रखने की है, जबकि बीजेपी के पास इस सीट पर इतिहास बदलने का मौका है। मुस्लिम और दलित मतदाताओं का रुख, गैर-यादव ओबीसी की पसंद और शहरी मतदाताओं की वोटिंग रणनीति इस चुनाव में निर्णायक हो सकती है।
अब बड़ा सवाल यही है कि 2027 में सोलंकी परिवार का प्रभाव एक बार फिर सपा को जीत दिलाएगा या बीजेपी की रणनीति सीसामऊ का सियासी नक्शा बदल देगी? जवाब चुनावी मैदान में उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों की रणनीति सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
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Source: Filmitics

