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September 4, 2026
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साहिबाबाद में 3.24 लाख वोट कम होने से बदले समीकरण, 2027 में BJP के सामने बड़ी चुनौती या अब भी मजबूत है किला? –

September 4, 2026 · Ashish Bajpai · 1 मिनट पढ़ें

गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश की साहिबाबाद विधानसभा सीट को बीजेपी का मजबूत गढ़ माना जाता है। विधानसभा संख्या 55 वाली यह सीट अपने बड़े मतदाता आधार और देश के अलग-अलग ह…

गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश की साहिबाबाद विधानसभा सीट को बीजेपी का मजबूत गढ़ माना जाता है। विधानसभा संख्या 55 वाली यह सीट अपने बड़े मतदाता आधार और देश के अलग-अलग हिस्सों से आकर बसे लोगों के कारण प्रवासी विधानसभा के तौर पर भी चर्चित है। लेकिन 2027 विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची में हुई बड़ी कमी ने यहां के राजनीतिक समीकरणों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान साहिबाबाद विधानसभा क्षेत्र में करीब 10.54 लाख मतदाता बताए गए थे। वहीं एसआईआर के बाद मतदाताओं की संख्या घटकर 7,29,899 रह गई है। यानी करीब 3.24 लाख मतदाताओं की कमी दर्ज हुई है। इतनी बड़ी संख्या में वोटरों का कम होना 2027 के चुनाव में राजनीतिक दलों के लिए अहम मुद्दा बन सकता है।

साहिबाबाद में बीजेपी का संगठन लंबे समय से मजबूत माना जाता है। पार्टी के पास मजबूत बूथ नेटवर्क, बड़ा समर्थक वर्ग और पिछले दो विधानसभा चुनावों का शानदार रिकॉर्ड है। ऐसे में 2027 में बीजेपी की सबसे बड़ी चुनौती विपक्ष से मुकाबले के साथ-साथ अपने समर्थक मतदाताओं को मतदान केंद्र तक पहुंचाने की भी होगी।

साहिबाबाद का राजनीतिक इतिहास भी काफी दिलचस्प रहा है। 2008 के परिसीमन के बाद यह विधानसभा सीट अस्तित्व में आई। 2012 के चुनाव में बहुजन समाज पार्टी के अमरपाल शर्मा ने जीत दर्ज की थी। इसके बाद 2017 और 2022 में बीजेपी ने यहां अपना दबदबा कायम किया।

2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के सुनील शर्मा ने समाजवादी पार्टी के अमरपाल शर्मा को बड़े अंतर से हराया था। बीजेपी को इस चुनाव में 67 फीसदी से अधिक वोट मिले थे। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी ने साहिबाबाद क्षेत्र में अपनी बढ़त बरकरार रखी।

मतदाता सूची में बड़े बदलाव के बाद समाजवादी पार्टी को साहिबाबाद में मुकाबला मजबूत होने की उम्मीद जरूर दिखाई दे सकती है। हालांकि सिर्फ मतदाताओं की संख्या घटने से चुनावी नतीजे बदल जाएंगे, ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। असली लड़ाई इस बात पर निर्भर करेगी कि कौन सा दल नए मतदाता समीकरण को बेहतर तरीके से समझकर बूथ स्तर पर अपनी रणनीति तैयार करता है।

साहिबाबाद में ब्राह्मण, वैश्य, पंजाबी, त्यागी, क्षत्रिय, गुर्जर, पाल और एससी वर्ग को बीजेपी के मजबूत सामाजिक आधार के तौर पर देखा जाता है। वहीं मुस्लिम और यादव मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा परंपरागत रूप से समाजवादी पार्टी के साथ रहा है। इसके अलावा हाईराइज सोसायटियों में रहने वाले शहरी मतदाता भी यहां चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

साहिबाबाद जैसे बड़े शहरी विधानसभा क्षेत्र में चुनाव सिर्फ जातीय समीकरण या पुराने रिकॉर्ड से तय नहीं होगा। यहां बूथ मैनेजमेंट, मतदाता संपर्क और मतदान प्रतिशत बेहद अहम भूमिका निभा सकते हैं।

बीजेपी के पास मजबूत संगठन और लगातार दो विधानसभा चुनावों की जीत का मनोवैज्ञानिक लाभ है। दूसरी ओर, एसआईआर के बाद बदली मतदाता संख्या विपक्ष को नई रणनीति बनाने का मौका दे सकती है।

ऐसे में 2027 का सबसे बड़ा सवाल यही है कि करीब 3.24 लाख वोटरों की कमी के बाद कौन अपने समर्थकों को बेहतर तरीके से बूथ तक पहुंचा पाएगा? साहिबाबाद में मुकाबला सिर्फ बीजेपी बनाम सपा का नहीं, बल्कि संगठन, वोटर संपर्क और बूथ मैनेजमेंट की असली परीक्षा भी होगा। अब देखना होगा कि 2027 में साहिबाबाद का यह विशाल सियासी किला बीजेपी के साथ मजबूती से खड़ा रहता है या समाजवादी पार्टी इस मजबूत गढ़ में सेंध लगाने में कामयाब होती है।

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Source: Filmitics

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