जंतर-मंतर विवाद: स्वतंत्र भारद्वाज पर कार्रवाई की मांग, मामले में सामने आया दूसरा पक्ष
दिल्ली का जंतर-मंतर एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में है। यहां एक पुराने विवाद को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष से जुड़े नेताओं और संगठनों की ओर से स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई और गिरफ्तारी की मांग उठाई जा रही है। वहीं, स्वतंत्र भारद्वाज के समर्थक पूरे मामले को राजनीतिक साजिश बताते हुए इसे आत्मरक्षा का मामला करार दे रहे हैं। आखिर जंतर-मंतर पर उस दिन क्या हुआ था? क्या यह एक परिवार पर हमला था या फिर भीड़ के बीच हुई झड़प में आत्मरक्षा का मामला? आइए जानते हैं पूरे विवाद की कहानी।
मामले की शुरुआत सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक पॉडकास्ट क्लिप और वीडियो से हुई। दावा किया जा रहा है कि जून में जंतर-मंतर पर छात्र और पेपर लीक से जुड़े प्रदर्शन के दौरान 14 वर्षीय सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर निशु आजाद के पिता के साथ मारपीट हुई थी।
परिवार की ओर से आरोप लगाया गया कि इस घटना में उनके सिर पर चोट आई थी। इसके बाद एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें स्वतंत्र भारद्वाज कथित तौर पर घटना में अपनी भूमिका के बारे में बात करते नजर आए।
वीडियो सामने आने के बाद निशु आजाद ने न्याय की मांग की और मामले को लेकर राजनीतिक नेताओं से हस्तक्षेप की अपील की।
विपक्ष और प्रदर्शन से जुड़े कुछ लोगों की ओर से आरोप लगाया गया कि पीड़ित परिवार के साथ अन्याय हुआ है और आरोपी को राजनीतिक या प्रभावशाली लोगों का संरक्षण प्राप्त है।मामले में हत्या के प्रयास की धारा और SC-ST एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग भी उठाई गई। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।
स्वतंत्र भारद्वाज का क्या कहना है?
वहीं स्वतंत्र भारद्वाज और उनके समर्थकों ने घटना का अलग पक्ष सामने रखा है।
उनका दावा है कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को उसके पूरे संदर्भ से अलग करके पेश किया जा रहा है।भारद्वाज के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों की ओर से प्रधानमंत्री और सनातन धर्म के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा था। उनका कहना है कि विरोध करने के बाद कुछ लोगों ने उन्हें घेर लिया और उन पर हमला करने की कोशिश की।
भारद्वाज का दावा है कि उन्होंने अपनी सुरक्षा के लिए प्रतिक्रिया दी और इसी दौरान उनके हाथ में पहना कड़ा दूसरे व्यक्ति को लग गया। उनके समर्थक इसे जानबूझकर किया गया हमला नहीं, बल्कि भीड़ के बीच हुई झड़प और आत्मरक्षा की घटना बता रहे हैं।
इस पूरे विवाद में दिल्ली पुलिस का पक्ष भी सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, घटना के समय ही एफआईआर दर्ज की गई थी और मामले में आवश्यक कार्रवाई की गई। पुलिस की ओर से यह भी कहा गया कि मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार पीड़ित को लगी चोट को साधारण चोट की श्रेणी में रखा गया है। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले में कानून के मुताबिक कार्रवाई की जा रही है और जांच पूरी होने के बाद अदालत में चार्जशीट दाखिल की जाएगी।
अब बड़ा सवाल एक ही घटना को लेकर दो अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं।पीड़ित परिवार इसे हमले और न्याय की लड़ाई बता रहा है, जबकि स्वतंत्र भारद्वाज का पक्ष इसे आत्मरक्षा में हुई घटना बता रहा है। फिलहाल मामले की सच्चाई जांच और न्यायिक प्रक्रिया से ही स्पष्ट होगी। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो या दावों के आधार पर अंतिम निष्कर्ष निकालने के बजाय आधिकारिक जांच के परिणाम का इंतजार करना जरूरी है।
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Source: Filmitics

