कलेक्ट्रेट परिसर में अवैध घोषित की गई मस्जिद के ध्वस्तीकरण के करीब 24 घंटे बाद मलबा हटाने के दौरान एक कुआं मिलने से मौके पर मौजूद लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई…
कलेक्ट्रेट परिसर में अवैध घोषित की गई मस्जिद के ध्वस्तीकरण के करीब 24 घंटे बाद मलबा हटाने के दौरान एक कुआं मिलने से मौके पर मौजूद लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई है। रविवार सुबह मलबा हटाने पहुंची टीम को मस्जिद के नीचे करीब 15 फीट गहरा कुआं मिला। बताया जा रहा है कि कुएं की चौड़ाई करीब डेढ़ मीटर है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि कुआं कब बनाया गया था और यह कितना पुराना है।
मलबे के नीचे मिले इस कुएं को एक भारी स्लैब से ढका गया था। मलबा हटाने के दौरान जब पोकलेन मशीन से स्लैब को हटाने की कोशिश की गई तो वह नहीं टूटा। इसके बाद मशीन से काम संभव नहीं होने पर स्लैब को कटर की मदद से काटकर हटाया गया। स्लैब हटते ही उसके नीचे कुआं दिखाई दिया। अब प्रशासन के सामने यह सवाल है कि यह कुआं किस समय और किस उद्देश्य से बनाया गया था। हालांकि, इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
कलेक्ट्रेट परिसर में सरकारी जमीन पर बनी दो मंजिला मस्जिद को पुलिस और प्रशासन ने शनिवार को बुलडोजर कार्रवाई के जरिए ध्वस्त कराया था। यह कार्रवाई जिला जज न्यायालय के आदेश के बाद की गई। इसके लिए प्रशासन ने पहले से सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी थी और मौके पर पुलिस बल तैनात किया गया था।
मामले की शुरुआत सिटी मजिस्ट्रेट न्यायालय के आदेश से हुई थी। 16 जुलाई 2026 के आदेश में मस्जिद के निर्माण को सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे से जुड़ा माना गया था। इसके खिलाफ मस्जिद पक्ष ने जिला जज न्यायालय में अपील दाखिल की थी। करीब डेढ़ महीने तक दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद 2 सितंबर को जिला जज न्यायालय ने अपील खारिज करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा।
मामले में बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी की शिकायत का भी उल्लेख सामने आया है। उन्होंने जनवरी 2025 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को शिकायत भेजकर आरोप लगाया था कि कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद का निर्माण सरकारी भूमि पर कब्जा करके किया गया है।
शिकायत की जांच के बाद 24 मार्च 2025 को उत्तर प्रदेश लोक परिसर (अनधिकृत अध्यासियों की बेदखली) अधिनियम-1972 के तहत सिटी मजिस्ट्रेट न्यायालय में वाद दाखिल किया गया। सुनवाई के बाद 16 जुलाई 2026 के आदेश में न्यायालय ने कहा कि प्रदेश सरकार की 315 वर्ग मीटर भूमि पर कब्जा करके मस्जिद का निर्माण किया गया था।
न्यायालय के रिकॉर्ड के मुताबिक संबंधित भूमि को पुराने फसली वर्षों 1324 और 1359 में कचहरी-कलेक्ट्रेट के रूप में दर्ज पाया गया। इसी आधार पर न्यायालय ने निर्माण को अवैध घोषित करते हुए बेदखली का आदेश दिया था। साथ ही कब्जाधारी से 6 करोड़ 41 लाख 65 हजार 500 रुपये की क्षतिपूर्ति वसूलने का आदेश भी दिया गया।
अब मस्जिद के मलबे के नीचे कुआं मिलने के बाद मामले में एक नया तथ्य सामने आया है। हालांकि, कुएं की उम्र, निर्माण और उसके इतिहास को लेकर फिलहाल प्रशासन की ओर से कोई विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए इसके संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक जांच या रिकॉर्ड का इंतजार करना जरूरी होगा।
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Source: Filmitics

