DGP राजीव कृष्ण ने कहा- दुर्घटनाओं को महज हादसा नहीं, बल्कि कारणों की पहचान कर रोकने की जरूरत
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं और उनमें होने वाली जनहानि को न्यूनतम करने के उद्देश्य से Zero Fatality District (ZFD) कार्यक्रम के तृतीय एवं चतुर्थ चरण के तहत क्रिटिकल कॉरिडोर टीम प्रभारियों की एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का आयोजन 7 सितंबर 2026 को पुलिस मुख्यालय, लखनऊ स्थित अमर शहीद चन्द्रशेखर आजाद प्रेक्षागृह में यातायात निदेशालय, उत्तर प्रदेश द्वारा किया गया।कार्यशाला में प्रदेश के 59 जनपदों के 213 दुर्घटना बाहुल्य स्थलों पर गठित 228 क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों के प्रभारी अधिकारियों और ZFD नोडल अधिकारियों ने प्रतिभाग किया।
DGP राजीव कृष्ण ने दिए सड़क सुरक्षा के निर्देश
पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश राजीव कृष्ण ने कार्यशाला में सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम और सड़क सुरक्षा को लेकर अधिकारियों को महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं को केवल आकस्मिक घटना मानकर नहीं चलना चाहिए, बल्कि उनके पीछे मौजूद मूल कारणों की वैज्ञानिक पहचान कर उन्हें दूर करना जरूरी है।उन्होंने संबंधित विभागों के साथ समन्वय और लगातार अनुश्रवण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों का प्रभावी तरीके से समाधान किया जा सके।
जहां दुर्घटनाएं अधिक, वहां कार्रवाई अधिक पर फोकस
DGP ने क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों को अपने-अपने Area of Responsibility (AOR) में दुर्घटना संभावित स्थानों और वहां दुर्घटनाओं के कारणों की पहचान करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि रोकथाम और प्रवर्तन की कार्रवाई मिशन मोड में की जाए।उन्होंने स्पष्ट किया कि क्रिटिकल कॉरिडोर टीम की जिम्मेदारी सिर्फ दुर्घटना के बाद कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि दुर्घटनाओं को रोकना भी उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।
हर दुर्घटना के बाद कारणों की समीक्षा के निर्देश
पुलिस महानिदेशक ने कहा कि प्रत्येक दुर्घटना के बाद यह समीक्षा की जानी चाहिए कि व्यवस्था में कौन-सी कमी के कारण हादसा हुआ और भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए क्या सुधार जरूरी हैं।उन्होंने सड़क सुरक्षा उपायों, प्रभावी प्रवर्तन और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। संबंधित विभागों से अपेक्षित सुधारात्मक कार्यों के लिए निरंतर फॉलोअप और जरूरत पड़ने पर उच्च स्तर पर एस्केलेशन करने के निर्देश दिए गए।
ZFD टीमों को विशेषज्ञ पुलिसिंग के रूप में विकसित करने पर जोर
राजीव कृष्ण ने दुर्घटना रोकथाम और दुर्घटना विवेचना को विशेषज्ञता वाले कार्य बताते हुए तकनीकी एवं व्यावहारिक जानकारी के प्रभावी इस्तेमाल पर जोर दिया।उन्होंने कहा कि क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों को सड़क दुर्घटनाओं से संबंधित Prevention और Investigation में विशेषज्ञता विकसित करनी होगी। इसके लिए आवश्यक प्रशिक्षण, तकनीकी जानकारी और उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग जरूरी है।उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों के कार्य और उनके परिणामों को पुलिस अधिकारियों की कार्यक्षमता तथा करियर प्रोग्रेशन के महत्वपूर्ण घटक के रूप में विकसित किया जाएगा।
सड़क सुरक्षा से लेकर CPR तक दिया गया प्रशिक्षण
कार्यशाला के विभिन्न सत्रों में विशेषज्ञों द्वारा सड़क सुरक्षा और दुर्घटना रोकथाम से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया।
सड़क सुरक्षा और मोटर वाहन अधिनियमप्रवर्तन उपकरणों का प्रभावी उपयोगAccident InvestigationBlack Spot की पहचानiRAD/eDARपीएम राहत योजना और Victim/Patient IDFirst Aid और CPRदुर्घटना विश्लेषण और Case Studyनिदेशक/अपर पुलिस महानिदेशक यातायात एवं सड़क सुरक्षा ए. सतीश गणेश ने ZFD कार्यक्रम और इंटरसेप्टर के प्रभावी एवं युक्तिसंगत इस्तेमाल को लेकर प्रस्तुतीकरण दिया।वहीं GTO/PTO बरेली रमेश चन्द्र प्रजापति ने प्रवर्तन उपकरणों और मोटर वाहन अधिनियम की धाराओं की जानकारी दी। मेदांता हॉस्पिटल के डॉ. लोकेन्द्र गुप्ता ने CPR और First Aid का प्रशिक्षण दिया। NIC के शिजान ने iRAD/eDAR, पीएम राहत योजना और Victim/Patient ID से संबंधित जानकारी दी।
ZFD योजना से हादसों में 6.97 फीसदी की कमी
Zero Fatality District योजना के तहत प्रदेश के कमिश्नरेट और जनपदों के सर्वाधिक दुर्घटना बाहुल्य 700 स्थानों को चिन्हित कर लक्षित कार्रवाई की जा रही है।जनवरी से अगस्त 2026 तक ZFD से आच्छादित स्थानों पर पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में-सड़क दुर्घटनाओं में 6.97 फीसदी कमीमृतकों की संख्या में 8.03 फीसदी कमीघायलों की संख्या में 6.11 फीसदी कमीदर्ज की गई।इस अवधि में सड़क दुर्घटनाओं में 1,255 की कमी दर्ज हुई, यानी औसतन प्रतिदिन करीब 7 दुर्घटनाएं कम हुईं। वहीं 1,107 अमूल्य मानव जीवन बचाने में सफलता मिली, यानी औसतन करीब 5 लोगों की जान प्रतिदिन बचाई गई।
वैज्ञानिक विश्लेषण और लक्षित कार्रवाई पर जोर
ZFD योजना Core Strategy–Focused Intervention पर आधारित है। इसके तहत ‘जहां दुर्घटनाएं अधिक, वहां कार्रवाई अधिक’ के सिद्धांत को अपनाया गया है।वैज्ञानिक विश्लेषण के आधार पर ऐसे स्थानों की लगातार पहचान की जा रही है, जहां दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए अतिरिक्त और लक्षित हस्तक्षेप की आवश्यकता है।योजना के तहत दुर्घटना रोकथाम के लिए वैज्ञानिक विश्लेषण, लक्षित प्रवर्तन, संसाधनों के प्रभावी इस्तेमाल, सड़क अभियांत्रिकी की कमियों को दूर करने और अंतरविभागीय समन्वय पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
उत्कृष्ट कार्य करने वाली टीमों को किया गया सम्मानित
कार्यशाला के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाली क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों के प्रभारी अधिकारियों और सदस्यों को पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश द्वारा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
कमिश्नरेट कानपुर के थाना विधनूजनपद बाराबंकी के थाना कोतवाली नगरजनपद सुल्तानपुर के थाना कोतवाली नगरकी क्रिटिकल कॉरिडोर टीमें शामिल रहीं।
कार्यक्रम में मयंक ज्योति, अपर परिवहन आयुक्त, उत्तर प्रदेश और के.एस. इमैन्युअल, पुलिस महानिरीक्षक/पुलिस महानिदेशक के जीएसओ सहित यातायात निदेशालय और अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
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Source: Filmitics

