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September 9, 2026
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गोरखपुर शहर में 2027 की महाजंग! योगी के गढ़ में फिर खिलेगा कमल या बदलेगा सियासी गणित? –

September 9, 2026 · Ashish Bajpai · 1 मिनट पढ़ें

गोरखपुर… मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कर्मक्षेत्र और पूर्वांचल की राजनीति का एक बेहद अहम केंद्र। गोरखनाथ मंदिर से लेकर विधानसभा चुनाव तक, गोरखपुर की सियासत पर…

गोरखपुर… मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कर्मक्षेत्र और पूर्वांचल की राजनीति का एक बेहद अहम केंद्र। गोरखनाथ मंदिर से लेकर विधानसभा चुनाव तक, गोरखपुर की सियासत पर सिर्फ पूर्वांचल ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश की नजर रहती है। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट के साथ गोरखपुर शहर सीट पर भी सियासी हलचल तेज होने लगी है। सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या 2022 जैसी बड़ी जीत एक बार फिर दोहराई जाएगी या इस बार विपक्ष कोई नया समीकरण तैयार करेगा?

गोरखपुर शहर विधानसभा सीट उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में सीट नंबर 322 है। 2022 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर योगी आदित्यनाथ ने यहां से शानदार जीत दर्ज की थी। उन्हें कुल 1,65,499 वोट मिले थे, जबकि समाजवादी पार्टी की सुभावती उपेंद्र दत्त शुक्ला को 62,109 वोट मिले। इस तरह योगी आदित्यनाथ ने करीब 1,03,390 वोटों के बड़े अंतर से जीत हासिल की थी।बहुजन समाज पार्टी के ख्वाजा शम्सुद्दीन करीब 8 हजार वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे, जबकि आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के हम्मद इस्लाम को करीब 7.6 हजार वोट मिले थे। नतीजों ने इस सीट पर बीजेपी की मजबूत पकड़ का संकेत दिया था।

लेकिन 2027 का चुनाव सिर्फ 2022 के आंकड़ों की कहानी नहीं होगा। इस बार सबसे ज्यादा चर्चा बीजेपी के संभावित उम्मीदवार को लेकर हो सकती है। गोरखपुर की विधानसभा सीटों पर संभावित प्रत्याशी बदलाव की चर्चाओं के बीच यह सवाल अहम हो गया है कि गोरखपुर शहर से बीजेपी किस चेहरे पर भरोसा करेगी।अगर टिकट में बदलाव होता है तो क्या पार्टी के लिए योगी फैक्टर उतना ही प्रभावी रहेगा? या फिर नया चेहरा अपने दम पर चुनावी मैदान में उतरेगा? फिलहाल इन सवालों पर अंतिम तस्वीर साफ नहीं है।

गोरखपुर में बीजेपी के लिए विकास का मुद्दा भी बड़ा हथियार हो सकता है। शहर में सड़क, फ्लाईओवर, फोरलेन, स्वास्थ्य सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कामों को पार्टी अपनी उपलब्धियों के तौर पर पेश कर सकती है। एम्स और बीआरडी मेडिकल कॉलेज जैसी स्वास्थ्य सुविधाएं भी चुनावी चर्चा का हिस्सा बन सकती हैं।दूसरी ओर विपक्ष महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य, भ्रष्टाचार और स्थानीय समस्याओं को लेकर बीजेपी को घेरने की कोशिश कर सकता है। ऐसे में चुनावी मुकाबला सिर्फ बड़े राजनीतिक नारों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि स्थानीय मतदाताओं के मुद्दे भी अहम भूमिका निभा सकते हैं।

गोरखपुर की राजनीति में निषाद समाज का प्रभाव भी महत्वपूर्ण माना जाता है। संजय निषाद और निषाद पार्टी का एनडीए के साथ होना बीजेपी के लिए एक अहम राजनीतिक फैक्टर है। हालांकि 2027 में यह समर्थन किस तरह और कितनी मजबूती से चुनावी नतीजों को प्रभावित करेगा, यह देखने वाली बात होगी।कुल मिलाकर गोरखपुर शहर में 2027 का चुनाव सिर्फ बीजेपी बनाम विपक्ष की लड़ाई नहीं रहने वाला। यहां योगी आदित्यनाथ का प्रभाव, बीजेपी का संभावित टिकट, विकास के दावे, विपक्ष की रणनीति और सामाजिक समीकरण—सभी एक साथ परीक्षा में होंगे।अब नजर इस बात पर है कि क्या योगी के गढ़ में बीजेपी 2022 की तरह एकतरफा बढ़त कायम रख पाएगी, या विपक्ष ऐसा चेहरा और रणनीति तैयार करेगा, जो गोरखपुर शहर के सियासी समीकरण को चुनौती दे सके?

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Source: Filmitics

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