कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के दौरान भारतीय सेना और चीनी सैनिकों को लेकर दिए गए कथित बयान से जुड़े आपराधिक मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवा…
कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के दौरान भारतीय सेना और चीनी सैनिकों को लेकर दिए गए कथित बयान से जुड़े आपराधिक मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई, सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने मामले को जल्द सुनवाई के लिए अलग से सूचीबद्ध करने की मांग की, गौरव भाटिया ने अदालत को बताया कि यह मामला कई बार टल चुका है और याचिकाकर्ता निर्धारित तारीखों पर स्वयं उपस्थित नहीं हुए, उन्होंने कहा कि करीब पांच महीने पहले भी मामला सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हुआ था, लेकिन उस समय भी सुनवाई नहीं हो सकी।
शिकायतकर्ता की ओर से पेश गौरव भाटिया ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया कि मामले को अन्य मामलों से अलग करके जल्द सुनवाई के लिए लिया जाए, उन्होंने कहा कि राहुल गांधी कोई वीवीआईपी नहीं हैं और इसलिए मामले की सुनवाई में किसी विशेष प्राथमिकता की जरूरत नहीं होनी चाहिए, भाटिया ने यह भी कहा कि मामले के लगातार टलने के कारण इसे अब प्राथमिकता के आधार पर सुनना उचित होगा।
गौरव भाटिया की मांग पर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने स्पष्ट किया कि अदालत में सभी पक्ष समान हैं और मामलों की सुनवाई निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही होगी, सीजेआई ने कहा कि अगर शिकायतकर्ता जल्द सुनवाई चाहता है तो इसके लिए विधिवत आवेदन दाखिल किया जाए। आवेदन मिलने के बाद अदालत उस पर विचार करेगी।
यह मामला राहुल गांधी की उस अपील से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने भारत जोड़ो यात्रा के दौरान भारतीय सेना और चीनी सैनिकों को लेकर दिए गए बयान के आधार पर उनके खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को चुनौती दी है, राहुल गांधी की ओर से इस कार्यवाही को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया गया है, शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि मामले की सुनवाई लंबे समय से लंबित है और इसे जल्द निपटाने की जरूरत है।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से यह स्पष्ट हुआ कि किसी मामले में जल्द सुनवाई की मांग के लिए निर्धारित न्यायिक प्रक्रिया का पालन करना होगा, अदालत ने मौखिक अनुरोध के आधार पर मामले को अलग से प्राथमिकता देने के बजाय विधिवत आवेदन दाखिल करने को कहा, इससे कोर्ट ने यह संदेश भी दिया कि किसी भी पक्षकार की पहचान या राजनीतिक हैसियत के आधार पर मामलों की सूचीबद्धता में विशेष प्राथमिकता नहीं दी जाएगी।
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Source: Filmitics







