उत्तर प्रदेश को आपदाओं के लिहाज से और सुरक्षित बनाने के लिए 18 सितंबर को प्रदेश के 34 जिलों की 157 तहसीलों में एक साथ मेगा मॉक एक्सरसाइज आयोजित की जाएगी। इस रा…
उत्तर प्रदेश को आपदाओं के लिहाज से और सुरक्षित बनाने के लिए 18 सितंबर को प्रदेश के 34 जिलों की 157 तहसीलों में एक साथ मेगा मॉक एक्सरसाइज आयोजित की जाएगी। इस राज्यव्यापी अभ्यास में भूकंप, आग और रासायनिक रिसाव जैसी आपदाओं से निपटने की तैयारियों को वास्तविक परिस्थितियों के करीब जाकर परखा जाएगा। खोज एवं बचाव, सुरक्षित निकासी, चिकित्सा सहायता, राहत कार्य और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की भी परीक्षा होगी।अभ्यास के दौरान स्कूल, अस्पताल, प्रशासनिक कार्यालय, बहुमंजिला इमारतों और औद्योगिक इकाइयों में संभावित आपदा की परिस्थितियां बनाई जाएंगी।
जिला आपातकालीन संचालन केंद्र और घटना प्रतिक्रिया दल को सक्रिय कर उनकी त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता जांची जाएगी। अस्पतालों में बड़ी संख्या में घायलों के पहुंचने की स्थिति में उपचार, सुरक्षित निकासी और जरूरत पड़ने पर मरीजों को दूसरे अस्पतालों में भेजने की व्यवस्था भी परखी जाएगी।मेगा मॉक एक्सरसाइज में क्षतिग्रस्त इमारतों से लोगों को निकालने, मलबे में खोज एवं बचाव, आग लगने और गैस या रसायन के रिसाव जैसी परिस्थितियों का व्यावहारिक अभ्यास किया जाएगा।
भारतीय रेल की ओर से भूकंप के कारण ट्रेन के पटरी से उतरने की स्थिति को लेकर भी विशेष अभ्यास होगा। पूरे अभ्यास की राज्य स्तर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए निगरानी की जाएगी।मेगा एक्सरसाइज से पहले उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से लखनऊ में दो दिवसीय संगोष्ठी और टेबल टॉप एक्सरसाइज आयोजित की गई। इसमें आपदा प्रबंधन से जुड़े विभागों, विशेषज्ञ संस्थाओं और आपदा प्रतिक्रिया बलों के अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
भूकंप, औद्योगिक एवं रासायनिक आपदा और अग्नि सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विशेषज्ञों ने अनुभव और तकनीकी जानकारी साझा की।उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी ने कहा कि ऐसे अभ्यासों का उद्देश्य राज्य, मंडल और जिला स्तर पर आपदा प्रतिक्रिया तंत्र की वास्तविक क्षमता को परखना, कमियों की पहचान करना और उन्हें समयबद्ध तरीके से दूर करना है। वहीं राजस्व विभाग की प्रमुख सचिव अर्पणा यू. ने कहा कि आपदा प्रबंधन का मकसद केवल आपदा के बाद राहत पहुंचाना नहीं, बल्कि पहले से जोखिम कम करना और प्रभावी तैयारी सुनिश्चित करना है।उत्तर प्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं की अपर पुलिस महानिदेशक पद्मजा चौहान ने विभिन्न विभागों की क्षमताओं को एकीकृत करने पर जोर दिया। पीएसी के पुलिस महानिदेशक डॉ. आलोक सिंह ने कहा कि आपदा के समय हर सेकेंड महत्वपूर्ण होता है, इसलिए कमान, नियंत्रण और संसाधनों की उपलब्धता पहले से स्पष्ट होनी चाहिए। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की सदस्य रीना सिंह ने भी राज्य की आपदा प्रबंधन तैयारियों की सराहना की।
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Source: Filmitics







