RBI Bank Account Freeze News: साइबर फ्रॉड के मामलों में बैंक अकाउंट फ्रीज होने की समस्या से परेशान ग्राहकों और कारोबारियों के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ए…
RBI Bank Account Freeze News: साइबर फ्रॉड के मामलों में बैंक अकाउंट फ्रीज होने की समस्या से परेशान ग्राहकों और कारोबारियों के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक अहम प्रस्ताव पेश किया है। RBI ने साइबर-enabled financial fraud और suspected money mule accounts से जुड़े मामलों में बैंकों द्वारा लगाए जाने वाले temporary debit hold को लेकर समयबद्ध प्रक्रिया का ड्राफ्ट जारी किया है।
प्रस्ताव के तहत सामान्य परिस्थितियों में temporary debit hold की अधिकतम अवधि 60 दिन रखने की बात कही गई है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि यह अभी अंतिम नियम नहीं है। RBI ने 11 सितंबर 2026 को Draft RBI (Know Your Customer) Amendment Directions, 2026 जारी कर बैंकों, संबंधित संस्थाओं और आम लोगों से सुझाव मांगे हैं। सुझाव 2 अक्टूबर 2026 तक दिए जा सकते हैं।
RBI के प्रस्तावित सिस्टम में एक महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि साइबर फ्रॉड के संदेह में पूरे बैंक अकाउंट पर रोक लगाना सामान्य प्रक्रिया नहीं होगी। बैंक को पहले संबंधित रकम या संदिग्ध लेनदेन पर temporary debit hold लगाने पर विचार करना होगा।
उदाहरण के तौर पर, अगर किसी व्यक्ति के बैंक खाते में 2 लाख रुपये हैं और जांच में केवल 30 हजार रुपये के लेनदेन पर संदेह है, तो परिस्थितियों के अनुसार सिर्फ 30 हजार रुपये पर रोक लगाई जा सकती है। बाकी रकम ग्राहक के इस्तेमाल के लिए उपलब्ध रह सकती है।
प्रस्ताव में account-level temporary debit hold को last resort यानी अंतिम विकल्प बताया गया है। इसका इस्तेमाल केवल exceptional circumstances में किए जाने की बात कही गई है।
RBI के प्रस्ताव के मुताबिक, suspected money mule transaction या cyber-enabled financial fraud के कारण लगाए गए temporary debit hold की प्रक्रिया को निर्धारित समयसीमा में पूरा करना होगा।
यदि किसी Law Enforcement Agency (LEA) या Competent Authority की ओर से अलग से रोक जारी रखने का निर्देश नहीं है, तो temporary debit hold की अधिकतम अवधि 60 दिन होगी।
ड्राफ्ट में इस प्रक्रिया को अलग-अलग चरणों में बांटने का प्रस्ताव है। शुरुआती प्रक्रिया के लिए अधिकतम 30 दिन और आगे की प्रक्रिया के लिए अतिरिक्त 30 दिन तक का समय निर्धारित करने की बात कही गई है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर साइबर फ्रॉड मामले में खाते या रकम पर 60 दिन तक रोक रहना अनिवार्य होगा। जांच पूरी होने और ग्राहक की ओर से संतोषजनक जानकारी मिलने पर इससे पहले भी hold हटाया जा सकता है।
प्रस्तावित SOP में खाताधारक को संदिग्ध लेनदेन के बारे में अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अवसर देने की व्यवस्था भी शामिल है।
रिपोर्टों के मुताबिक, debit hold लगाए जाने के बाद ग्राहक को अपनी explanation या justification देने के लिए 20 दिन तक का समय दिया जा सकता है।
ग्राहक इस दौरान बैंक को बता सकता है कि संबंधित लेनदेन किस उद्देश्य से हुआ, रकम कहां से आई, किस व्यक्ति या संस्था से लेनदेन हुआ और उसके पास लेनदेन को सही साबित करने वाले कौन-कौन से दस्तावेज मौजूद हैं।
इसके बाद बैंक ग्राहक की ओर से दी गई जानकारी और उपलब्ध रिकॉर्ड की समीक्षा करके आगे की कार्रवाई कर सकेगा।
RBI के प्रस्ताव में suspected money mule accounts को भी खास तौर पर शामिल किया गया है।
Money mule account ऐसे बैंक खाते को कहा जाता है जिसका इस्तेमाल किसी दूसरे व्यक्ति या नेटवर्क की रकम प्राप्त करने और उसे आगे ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है। साइबर ठगी के मामलों में अपराधी कई बार रकम को अलग-अलग बैंक खातों में भेजते हैं, जिससे पैसे के वास्तविक स्रोत तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
हालांकि, हर संदिग्ध खाते का धारक जरूरी नहीं कि जानबूझकर साइबर अपराध में शामिल हो। कई बार कोई व्यक्ति या कारोबारी अनजाने में ऐसी रकम प्राप्त कर सकता है जिसका संबंध बाद में साइबर फ्रॉड से सामने आता है।
इसी वजह से RBI के प्रस्ताव में genuine transactions और suspected fraud transactions के बीच अंतर करने वाली प्रक्रिया पर जोर दिया गया है।
साइबर फ्रॉड का पैसा कई बैंक खातों से होकर गुजर सकता है। ऐसे में किसी निर्दोष व्यक्ति या कारोबारी के खाते में भी ऐसी रकम पहुंच सकती है, जिसके बारे में उसे जानकारी न हो।
मान लीजिए किसी कारोबारी को ग्राहक से 50 हजार रुपये का सामान्य भुगतान मिलता है, लेकिन बाद में जांच में उस रकम की कोई कड़ी साइबर फ्रॉड से जुड़ जाती है। अगर पूरा बैंक अकाउंट फ्रीज कर दिया जाए तो कारोबारी के वेतन, किराए, सप्लायर के भुगतान और रोजमर्रा के खर्च प्रभावित हो सकते हैं।
प्रस्तावित व्यवस्था में account-level hold को अंतिम विकल्प बनाने और संभव होने पर केवल संदिग्ध रकम पर रोक लगाने से सामान्य बैंकिंग गतिविधियों को जारी रखने की संभावना बढ़ सकती है।
प्रस्तावित SOP में बैंक की communication प्रक्रिया को भी व्यवस्थित करने की बात कही गई है।
बैंक की internal policy में यह स्पष्ट करना होगा कि ग्राहक को temporary debit hold के बारे में किस तरीके और किस format में जानकारी दी जाएगी।
इसके अलावा बैंकों को suspected transactions की पहचान, hold लगाने और उसे हटाने की परिस्थितियों को लेकर स्पष्ट internal policy तैयार करनी होगी।
ग्राहकों की शिकायतों के समाधान के लिए customer grievance redressal mechanism को भी इस व्यवस्था का हिस्सा बनाने का प्रस्ताव है।
RBI के प्रस्ताव में बैंकों की व्यवस्था को गृह मंत्रालय के National Cyber Crime Reporting Portal (NCRP) और Citizen Financial Cyber Fraud Reporting and Management System (CFCFRMS) से जोड़ने पर भी जोर दिया गया है।
इसका उद्देश्य बैंक, साइबर क्राइम जांच एजेंसियों और अन्य संबंधित संस्थाओं के बीच सूचना साझा करने की प्रक्रिया को ज्यादा व्यवस्थित बनाना है।
इससे संदिग्ध लेनदेन की पहचान और उस पर आगे की कार्रवाई में तेजी आने की उम्मीद है।
RBI ने प्रस्तावित व्यवस्था को विभिन्न प्रकार के बैंकों के लिए रखा है। इसमें:
हालांकि, अभी यह Draft Amendment Directions हैं। सार्वजनिक सुझाव मिलने और उनकी समीक्षा के बाद RBI अंतिम Directions जारी करेगा।
ड्राफ्ट से जुड़ी जानकारी के अनुसार प्रस्तावित दिशानिर्देशों के लिए 1 अप्रैल 2027 की प्रभावी तारीख रखी गई है। हालांकि, बैंक इससे पहले भी अपनी SOP लागू करने का फैसला कर सकते हैं।
अंतिम RBI Directions जारी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि प्रस्तावित प्रावधानों में कोई बदलाव किया जाता है या नहीं।
इसलिए फिलहाल ग्राहकों को यह नहीं मानना चाहिए कि साइबर फ्रॉड से जुड़े हर बैंक अकाउंट या रकम का hold 60 दिन पूरे होते ही अपने आप हट जाएगा। मौजूदा मामलों में कार्रवाई संबंधित बैंक, जांच एजेंसी और सक्षम प्राधिकारी के निर्देशों पर निर्भर कर सकती है।
RBI का यह प्रस्ताव 4 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश की पृष्ठभूमि में आया है। कोर्ट ने RBI को money mule activity और cyber-enabled financial fraud से जुड़े temporary debit holds के लिए Standard Operating Procedure तैयार करने और जारी करने का निर्देश दिया था।
इसके बाद RBI ने KYC Directions में बदलाव के लिए Draft Amendment Directions जारी किए हैं।
सबसे जरूरी बात यह है कि 60 दिन की सीमा अभी प्रस्तावित व्यवस्था है, अंतिम लागू नियम नहीं। RBI ने इस ड्राफ्ट पर आम लोगों और संबंधित पक्षों से 2 अक्टूबर 2026 तक सुझाव मांगे हैं।
अगर अंतिम नियम प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार लागू होते हैं, तो साइबर फ्रॉड के मामलों में पूरे बैंक अकाउंट को लंबे समय तक अनिश्चित अवधि के लिए फ्रीज रखने की समस्या कम हो सकती है।
साथ ही, विवादित रकम और खाते की बाकी रकम के बीच अंतर करने की व्यवस्था से genuine customers और कारोबारियों को राहत मिलने की संभावना है।
हालांकि, बैंकों के सामने चुनौती दोहरी होगी—एक तरफ निर्दोष खाताधारकों को अनावश्यक परेशानी से बचाना और दूसरी तरफ money mule accounts के जरिए साइबर ठगी की रकम को आगे बढ़ने से रोकना।
कुल मिलाकर RBI का प्रस्ताव समयबद्ध जांच, सीमित रकम पर रोक, ग्राहक को जवाब देने का अवसर और साइबर क्राइम एजेंसियों के साथ बेहतर समन्वय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है। लेकिन इसकी अंतिम स्थिति RBI के अंतिम Directions जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
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Source: Filmitics







